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जानिए कौन हैं 2जी घोटाले को सामने लाने वाले विनोद राय

विनोद राय जनवरी 7 जनवरी 2008 से लेकर 22 मई 2013 तक भारत के सीएजी रह चुके हैं. इसी दौरान 2जी मामला सामने आया था

FP Staff Updated On: Dec 21, 2017 04:41 PM IST

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जानिए कौन हैं 2जी घोटाले को सामने लाने वाले विनोद राय

2जी केस में सभी 17 आरोपियों को बरी किए जाने के बाद पूर्व सीएजी विनोद राय एक बार फिर से चर्चा में हैं. कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने उनपर गंभीर आरोप लगाए हैं. कपिल सिब्बल का कहना है कि विनोद राय ने फर्जी रिपोर्ट के आधार पर 2जी केस को आगे बढ़ाया. कोर्ट का फैसला आने के बाद अब उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए.

विनोद राय जनवरी 7 जनवरी 2008 से लेकर 22 मई 2013 तक भारत के सीएजी रह चुके हैं. इसी दौरान 2जी मामला सामने आया था. यूपीए सरकार के दौरान चर्चा में आए इस घोटाले को उजागर करने के पीछे विनोद राय का नाम सामने आता है.

विनोद राय ने 2जी के साथ ही यूपीए सरकार के कोयला घोटाले के मामले को भी सामने लेकर आए थे. इन दोनों घोटालों ने यूपीए सरकार को बदनामी का बड़ा दाग लगाया था. बाद में जब भी इन घोटालों की चर्चा हुई विनोद राय का नाम जरूर उठा.

यूपीए राज के दौरान जब 2जी और कोयला घोटाले को लेकर विनोद राय चर्चा में आए तो उस वक्त पीएमओ के राज्यमंत्री वी नारायणसामी ने सार्वजनिक रूप से विनोद राय की आलोचना की थी. मीडिया के सामने बयान देकर नारायणसामी ने कहा था कि सीएजी को सरकारी स्कीमों में हो रहे घोटालों पर अपनी टिप्पणी देने का कोई अधिकार ही नहीं है, इससे सीएजी के काम करने के तरीके को लेकर सवाल उठता है.

विनोद राय ने इसके बाद जवाब भी दिया था. उन्होंने कहा था कि सीएजी का यह मूलभूत और नैतिक दायित्व है कि वह सरकार के कामकाज में दखल न देते हुए भी आर्थिक मामलों में पाई गई अनियमितताओं के बारे में बताए ताकि संविधान द्वारा मिले उसके अधिकारों की रक्षा की जा सके और सरकार पर नियन्त्रण बना रहे. अगर ऐसा नहीं होता है तो यह देश की जनता के साथ विश्वासघात होगा.

विनोद राय का जन्म 23 मई, 1948 को हुआ. उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से इकनॉमिक्स में मास्टर्स की डिग्री ले रखी है. इसके बाद उन्होंने हॉर्वड यूनिवर्सिटी से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर्स की डिग्री हासिल की.

विनोद राय 1972 बैच के केरल कैडर के आईएएस अधिकारी हैं. उन्होंने थ्रिसूर जिले में सब-कलेक्टर के तौर पर अपना करियर शुरू किया था. बाद में वो कलेक्टर बने और थ्रिसूर जिले में 8 साल बिताए. इसके बाद वो 1977 से 1980 के बीच केरल राज्य को-ऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन के एमडी भी रहे.

बाद के दिनों में उन्हें केरल राज्य का मुख्य सचिव (वित्त) नियुक्त किया गया. इसके बाद वो कई अहम पदों रहे. विनोद राय ने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का खुला समर्थन किया. सीएजी रहते हुए उन्होंने इस संस्था को जवाबदेह और पारदर्शी बनाने में अहम रोल अदा किया.

सीएजी से रिटायर होने के बाद विनोद राय को उनके अनुभवों को देखते हुए बीसीसीआई का अंतरिम अध्यक्ष बनाया गया. फरवरी 2016 में विनोद राय को बैंक बोर्ड ब्यूरो का चेयरमैन भी बनाया गया. ये संस्था पब्लिक सेक्टर्स के बैंकों में सीनियर पोजिशन पर नियुक्तियों को लेकर सरकार को अपनी राय देती है. विनोद राय को मार्च 2016 में पद्म भूषण अवॉर्ड से भी नवाजा गया है.

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