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26/11 टेरर अटैक: मोशे के दादा ने कहा, 10 साल बाद भी हरे हैं जख्म

रब्बी शिमोन रोसेनबर्ग ने कहा, ‘जैसे जैसे मोशे बड़ा हो रहा है और उसका जिज्ञासु दिमाग सवाल उठाता है, हमारे लिए चीजों को संभालना मुश्किल होता जाता है’

Updated On: Nov 26, 2018 04:58 PM IST

Bhasha

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26/11 टेरर अटैक: मोशे के दादा ने कहा, 10 साल बाद भी हरे हैं जख्म

कहते हैं वक्त हर जख्म भर देता है, लेकिन मुंबई में 26/11 आतंकी हमले में जिंदा बचे 2 साल के बच्चे मोशे होल्ट्सबर्ग के दादा रब्बी शिमोन रोसेनबर्ग इस हमले के एक दशक बाद भी दर्द से उबर नहीं पाए हैं. 26 नवंबर, 2008 में मुंबई के नरीमन हाउस पर हुए हमले में मोशे के माता-पिता को आतंकवादियों ने मार दिया था.

मुंबई के चबाड़ लुबावित्च यहूदी केंद्र नरीमन हाउस में मोशे के पिता रब्बी गैवरिएल और 5 महीने की गर्भवती उसकी मां रिवका को पाकिस्तानी आतंकवादियों ने 4 अन्य बंधकों के साथ मार दिया था.

मोशे उस वक्त उसी इमारत में था. उसकी भारतीय धाय मां (नैनी) सांद्रा सैमुअल ने उसे अपने माता-पिता के गोलियों से छलनी शव के पास बैठे देखा. वो जीवित था और रो रहा था. सांद्रा ने अपनी जान जोखिम में डालकर मोशे को गोद में उठाया और उसे लेकर इमारत से भाग निकलीं.

मोशे अब 12 साल का हो चुका है और इजराइल में अपने नाना-नानी के साथ रहता है. इजराइल सरकार ने 54 वर्षीय सांद्रा को मानद नागरिक के तौर पर सम्मानित किया है. वह यरूशलम में रहती हैं लेकिन हर वीकेंड मोशे से मिलने जाती हैं.

दुनिया भर को हिला देने वाले इस आतंकी हमले की 10वीं बरसी पर रोसेनबर्ग ने कहा, ‘वो कहते हैं कि समय जख्मों को भर देता है लेकिन हमारे लिए बीते 10 वर्षों में जैसे-जैसे हमने बच्चे को बड़ा होते हुए देखा है, हमारा दर्द सिर्फ बढ़ा ही है.’

उन्होंने कहा, ‘जैसे जैसे मोशे बड़ा हो रहा है और उसका जिज्ञासु दिमाग सवाल उठाता है, हमारे लिए चीजों को संभालना मुश्किल होता जाता है.’ उन्होंने कहा कि जब वो अपने माता-पिता के बारे में पूछता है या यह सवाल करता है कि वो अपने बुजुर्ग नाना-नानी के साथ क्यों रह रहा है तो यह बेहद होता दुखद है.’

रोसेनबर्ग ने कहा, ‘हमारी उम्र बढ़ रही है और उसके सवाल बेहद स्वाभाविक हैं.’

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