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किसानों के मुद्दे पर बदनाम बीजेपी छवि सुधारने की कर रही बड़ी तैयारी

सरकार को इस बात का डर सता रहा है कि कृषि और किसानों से जुड़ी योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में अबतक वो सफलता नहीं मिल पा रही है जिसकी उम्मीद की गई थी.

Amitesh Amitesh Updated On: Sep 20, 2017 12:16 PM IST

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किसानों के मुद्दे पर बदनाम बीजेपी छवि सुधारने की कर रही बड़ी तैयारी

केंद्र सरकार के एजेंडे में 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुना करने का लक्ष्य है. प्रधानमंत्री से लेकर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह तक सबकी तरफ से हर मंच पर किसानों की बदहाली दूर कर उन्हें हर तरह से राहत पहुंचाने की बात की जाती है. दावा इस बात का होता है कि सरकार की नीतियों की बदौलत ही इस वक्त देश में किसानों के हालात में सुधार हो रहा है.

लेकिन, अंदरखाने सरकार को इस बात का डर सता रहा है कि कृषि और किसानों से जुड़ी योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में अबतक वो सफलता नहीं मिल पा रही है जिसकी उम्मीद की गई थी. परेशानी इस बात को लेकर है कि दूर-दराज के इलाकों में तो सरकार की योजनाओं के बारे में ठीक ढंग से लोगों को जानकारी तक नहीं है.

किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी नहीं

गौरतलब है कि केंद्र में बीजेपी की सरकार बनने के बाद सरकार की तरफ से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मृदा (सॉएल) हेल्थ कार्ड की योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना समेत कई दूसरी बड़ी योजनाओं की सौगात मिली है. लेकिन इनमें कई योजनाओं के बारे में दूर-दराज के गांवों में किसानों को सही जानकारी नहीं मिलने से वो इसका फायदा नहीं उठा पा रहे हैं.

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उधर, विपक्ष की तरफ से लगातार हो रहे हमलों ने भी सरकार को परेशान कर दिया है. विपक्ष किसानों की खराब हालत और आत्महत्या ना रुकने का मामला उठाकर सरकार को घेर रहा है. किसानों के अपार समर्थन के दम पर सत्ता में आई बीजेपी सरकार की तरफ से संकल्प-सिद्धि नाम से अभियान भी चलाया गया. लेकिन कृषि मंत्रालय की तरफ से चलाया गया अभियान सफल नहीं हो पाया था. इस अभियान के जरिए लोगों तक सरकारी योजनाओं को लेकर संवाद स्थापित करना था.

बीजेपी किसान मोर्चा की बढ़ी जिम्मेदारी

अब सरकार की इन योजनाओं को किसानों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी बीजेपी किसान मोर्चा को दी गई है. बीजेपी किसान मोर्चा की तरफ से पूरे देश में मंडल और जिला स्तर पर पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसके बाद वो गांव-गांव में किसानों के बीच जाकर उन्हें सरकार की योजनाओं के फायदे और उसे अपनाने के तरीके बताएंगे.

बीजपी सूत्रों के मुताबिक, पूरे देश में करीब 50000 प्रशिक्षित कार्यकर्ता होंगे जो अलग-अलग जगहों पर जाकर किसानों को जानकारी देंगे. अक्सर देखा जाता है कि किसानों को सही जानकारी के अभाव में कई बार सरकारी दफ्तरों का चक्कर लगाना पड़ता है. लेकिन इस नई व्यवस्था के बाद हर जिले में मौजूद प्रशिक्षित कार्यकर्ता किसानों के लिए मददगार साबित होगा जहां उन्हें हर समस्या का निदान संभव है.

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हालांकि, बीजेपी किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह मस्त किसानों की समस्या को कांग्रेस की देन बता रहे हैं. मस्त का कहना है कि ‘कृषि का मूलभूत संकट कोई नया नहीं है. यह सब कांग्रेस की देन है.’

वीरेंद्र सिंह मस्त मानते हैं कि ‘किसानों की हालत में सुधार हुए बगैर खेती-किसानी में सुधार मुमकिन नहीं है. इसलिए हम हर कीमत पर किसानों की दशा सुधारने की कोशिश कर रहे हैं.’

किसान संवाद कार्यक्रम और आमदनी बढ़ाने पर जोर

किसान मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शैलेंद्र सेंगर ने फ़र्स्टपोस्ट से बातचीत में बताया कि ‘किसान मोर्चा पहले से ही किसान -संवाद कार्यक्रम चला रहा है. लेकिन, अब जिला और मंडल स्तर पर कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित कर इस काम में लगाने जा रहे हैं जिससे किसान इन योजनाएं से लाभान्वित हो सकें.

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सरकार की तरफ से किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए सात सूत्री कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं. सरकार की तैयारी के मुताबिक, सिंचाई व्यवस्था को ठीक करने यानी हर खेत को पानी उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है. पानी की बचत के लिए 'पर ड्राप मोर क्राप' नाम से योजना भी चल रही है. इसके अलावा पैदावार बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है.

फसल की गुणवत्ता में वृद्धि होने से किसानों को फसल की अच्छी कीमत मिल सकती है लिहाजा जोर इस पर भी है. इसके अलावा सात सूत्री कार्यक्रम के अंतर्गत मंडियों में सुधार पर जोर दिया जा रहा है. प्राकृतिक आपदा से फसल के नुकसान पर निगरानी रखने जैसी अहम बातों को भी सात सूत्री कार्यक्रम में शामिल किया गया है.

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खेती के साथ-साथ कृषि की सहायक गतिविधियों के जरिए आमदनी दोगुना करने पर भी काम हो रहा है.

कम प्रचार को लेकर चिंतित है सरकार

लेकिन सरकार की चिंता है कि इसे उस कदर प्रचार नहीं मिल पा रहा है जितना होना चाहिए. रही-सही कसर यूपी में कर्जमाफी के दौरान सामने आ रहे आंकड़ों ने पूरी कर दी है. यूपी में किसानों की कर्ज माफी के नाम पर बड़ी तादाद में किसानों को फायदा भी हुआ है. उनका एक लाख रुपए तक का कर्ज माफ भी हो गया है. लेकिन, कुछ जगहों पर 0.01 पैसे कर्ज माफी का मामला सामने आया है तो कुछ किसानों का तीन रुपए और चार रुपए तक का कर्ज माफ हुआ है.

इस तरह की खबरें सामने आने के बाद सरकार की खूब किरकिरी हो रही है. लिहाजा, अब कर्जमाफी से खुश किसानों की दशा और एक लाख तक फायदा मिलने वाले किसानों के सही आंकड़े किसानों के बीच रखा जाएगा. मामले की गंभीरता देख कर ही अब तमाम योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने की जिम्मेदारी बीजेपी किसान मोर्चा को दी गई है.

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