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2+2 डायलॉग: अहम सुरक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर, अब अमेरिकी सेना के उपकरणों को खरीदना आसान

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मीटिंग के बाद एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि भारत और अमेरिका ने साथ काम करने की प्रतिबद्धता जताई है

Updated On: Sep 06, 2018 03:06 PM IST

FP Staff

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2+2 डायलॉग: अहम सुरक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर, अब अमेरिकी सेना के उपकरणों को खरीदना आसान

भारत और अमेरिका के बीच गुरुवार को पहली टू प्लस टू मीटिंग संपन्न हो गई है. इस मीटिंग में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो और रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस से द्विपक्षीय बातचीत में हिस्सा लिया.

यहां दोनों देशों के बीच बहुत महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं. यहां एक ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं, जिसके बाद भारत के लिए अमेरिकी सेना के इक्विपमेंट्स खरीदना आसान हो जाएगा.

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मीटिंग के बाद एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि भारत और अमेरिका ने साथ काम करने की प्रतिबद्धता जताई है.

सूत्रों की मानें तो दोनों देशों ने कम्यूनिकेशन कम्पैटिबिलिटी एंड सिक्योरिटी एग्रीमेंट (COMCASA) पर समझौते पर साइन किए हैं. इस समझौते के तहत भारत के लिए अमेरिका सेना के औजारों को खरीदना भारत के लिए बहुत आसान हो जाएगा.

सुषमा ने ये भी बताया कि दोनों देश भारत को एनएसजी देशों में शामिल करवाने की दिशा में काम करेंगे. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि दोनों देशों ने अफगानिस्तान समस्या पर भी बात की. उन्होंने कहा कि भारत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अफगानिस्तान नीति का स्वागत करता है और दोनों देश साथ मिलकर आतंक से लड़ रहे हैं.

पॉम्पियो और मैटिस पहली भारत-अमेरिका टू प्लस टू वार्ता के लिए बुधवार को यहां पहुंचे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछले साल हुई अमेरिका यात्रा में इस वार्ता को निर्धारित किया गया था.

सुषमा स्वराज ने बुधवार को यहां एयरपोर्ट पर अमेरिकी विदेश मंत्री पॉम्पियो की अगवानी की, वहीं सीतारमण ने रक्षा मंत्री मैटिस का स्वागत किया. यह इस बात को दिखाता है कि भारत अमेरिकी मंत्रियों की इस यात्रा को कितना महत्व देता है.

अधिकारियों ने बताया कि टू प्लस टू वार्ता का उद्देश्य दोनों देशों के बीच वैश्विक सामरिक साझेदारी को गहरा करना और रूस के साथ भारत की रक्षा साझेदारी और ईरान से कच्चे तेल के आयात के मुद्दों पर मतभेदों को सुलझाना है. इस दौरान भारत-अमेरिका के बीच कई अहम रक्षा समझौते होने वाले हैं. दोनों देश ड्रोन बेचने और सैटेलाइट डेटा के आदान-प्रदान को लेकर भी समझौता कर सकते हैं.

ऐसी संभावना है कि भारत मीटिंग के दौरान अमेरिका को बताएगा कि वह एस-400 ट्रियुम्फ वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली खरीदने के लिए रूस के साथ 40,000 करोड़ रुपए का सौदा करने वाला है.

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