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1993 मुंबई ब्लास्ट: 24 साल में क्या-क्या हुआ, जानिए सबकुछ

1993 में हुए बम ब्लास्ट में मुंबई के टाडा कोर्ट में सात आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चली, जिनमें 6 आरोपियों को साजिश रचने और आतंकी गतिविधियों में शामिल होने को लेकर दोषी करार दे दिया गया था

FP Staff Updated On: Sep 07, 2017 11:23 AM IST

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1993 मुंबई ब्लास्ट: 24 साल में क्या-क्या हुआ, जानिए सबकुछ

1993 में हुए बम ब्लास्ट में मुंबई के टाडा कोर्ट में सात आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चली, जिनमें 6 आरोपियों को साजिश रचने और आतंकी गतिविधियों में शामिल होने को लेकर दोषी करार दे दिया गया था. 7वें आरोपी अब्दुल कयूम को सभी मामलों में निर्दोष पाया गया था. कोर्ट ने उसे निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया था.

इस केस का फैसला काफी अहम था क्योंकि यही वो हमला था, जिसने मुंबई में माफिया और गैंगस्टरों का चेहरा सामने लाया था. इस मामले में और भी कई नाम जुड़े, जिससे ये घटना और भी पेचीदा होती गई. इस सबके अलावा सबसे बड़ी बात मुंबई ब्लास्ट भारत के इतिहास का 26/11 के अलावा सबसे भयावह हमला है.

साथ ही इस तथ्य को नजरअंदाज करना मुश्किल है कि ये उस वक्त का सबसे बड़ा और सुनियोजित तरीके से किया गया हमला था. इस हमले में पूरी दुनिया में सबसे पहली बार इतनी ज्यादा मात्रा में आरडीएक्स का प्रयोग किया गया था.

12 मार्च, 1993 जब दहल गई थी मुंबई

12 मार्च को दिन के लगभग 1:30 बजे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की बिल्डिंग की बेसमेंट में खड़ी एक कार में पहला ब्लास्ट हुआ. ब्लास्ट से 28 मंजिला इमारत बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई. इस ब्लास्ट में 50 लोगों की मौत हुई. अगले 2 घंटे 10 मिनट यानी 3:40 तक पूरी मुंबई कुल 13 धमाकों से हिल गई.

शहर के कई हिस्सों में थोड़ी-थोड़ी देर में धमाके होते रहे. ये बम बिल्कुल सामान्य सी भीड़-भाड़ वाली जगहों पर लगाए गए थे. इन हमलों के शिकार जगहों में थे- माहिम कॉजवे, झवेरी बाजार, प्लाजा सिनेमा, सेंचुरी बाजार, काथा बाजार, होटल सी रॉक, एयर इंडिया की बिल्डिंग, होटल जुहू सेंटॉर, मछुआरा कॉलोनी, वर्ली और पासपोर्ट ऑफिस.

कितने लोग हुए प्रभावित?

इस हमले में 257 लोगों की मौत हई थी और 700 घायल हुए थे. लेकिन अगर कुछ दूसरी मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो मौतों की संख्या 300 से ऊपर और घायलों की संख्या लगभग 1400 तक रही थी.

Dawood Ibrahim

कौन था मास्टरमाइंड?

इन हमलों के पीछे पाकिस्तान में बैठे अंडरवर्ल्ड बॉस दाउद इब्राहिम का था. दाउद इब्राहिम भारत के साथ-साथ अमेरिका और इंटरपोल के मोस्ट वांटेड के लिस्ट में शामिल है. दाउद के इस मास्टरप्लान में साथ दिया था उसके विश्वसनीय हाथ टाइगर मेमन ने. इन धमाकों को सऊदी में बैठे भारतीय स्मगलरों ने फाइनेंस किया था. साथ ही भारतीय अधिकारियों ने इसके पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के हाथ होने की आशंका भी जताई है. इन आतंकियों में से कई को पाकिस्तान से ट्रेनिंग और हथियार मिले थे.

हमले के पीछे बड़ी साजिश

आतंकियों का प्लान 1992 में 6 दिसंबर को हुए बाबरी विध्वंस की आग को हिंदू-मुस्लिम दंगों में तब्दील करने का था. अयोध्या में हुई इस घटना ने पूरे देश में छिटपुट हिंसक दंगों को भड़का दिया था और इसका फायदा उठाते हुए आतंकियों ने देश को एक वृहद सांप्रदायिक दंगों में झोंकने का प्लान बनाया गया था.

क्या था मास्टरप्लान?

इस प्लान के तहत मुस्लिम युवाओं को यहां से दुबई भेजना था. फिर वहां से उन्हें पाकिस्तान भेजा जाता, जहां उन्हें हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जाती. इसके बाद वो वापस भारत आकर इस हमले को अंजाम देते.

बाद की रिपोर्ट्स में ये कहा गया कि ये हमले मार्च में नहीं अप्रैल में होने वाले थे. लेकिन एक गड़बड़ी हो जाने की वजह से आतंकियों ने जल्दबाजी में इसे मार्च में ही ऑपरेट कर दिया. दरअसल इन हमलों में हथियार और बम बनाने के लिए टाइगर मेनन ने 19 आदमियों को चुना था, जिन्हें पाकिस्तान में ट्रेनिंग के बाद वापस भारत भेजा गया था. इनमें से एक गुल नूर मुहम्मद उर्फ गुल्लु को नव पाड़ा पुलिस ने 9 मार्च को हिरासत में ले लिया.

गुल्लू ने पुलिस के सामने पाकिस्तान में ट्रेनिंग और बड़े हमले की तैयारी की बात कबूल ली. उसने हमलों के लिए तयशुदा जगहों के नाम भी बताए लेकिन पुलिस ने इसे बस एक कहानी माना. बस यही गलती हुई. इस गिरफ्तारी ने मेमन को अपने मास्टरप्लान में बदलाव लाने के लिए मजबूर कर दिया और मुंबई 12 मार्च को ही 13 बड़े बम धमाकों का शिकार हो गई.

कौन थे आरोपी?

इस हमले में 1993 में अभिनेता संजय दत्त समेत 189 आरोपियों पर केस दर्ज हुआ था. इनमें से कुछ को बाद में बरी कर दिया गया. संजय दत्त को 1995, अप्रैल में मुंबई कोर्ट से बेल मिल गई थी. इसके बाद 2006 में एक स्पेशल टेरेरिस्ट एंड डिसरप्टिव एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट (टाडा) कोर्ट के तहत 123 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई. टाडा कोर्ट के जज प्रमोद कोड़े ने 100 को दोषी करार दिया और एक को प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट के तहत बरी कर दिया.

लेकिन इस मामले में 7 आरोपी अबू सलेम, मुस्तफा दौसा, अब्दुल कय्यूम, ताहिर टक्लया, करीमुल्लाह, फिरोज अब्दुल राशिद खान और रियाज सिद्दीकी के खिलाफ बाद में सुनवाई हुई क्योंकि ये आरोपी अबतक गिरफ्तार नहीं किए गए थे.

Bollywood star Dutt gestures towards photographers as he arrives at a special court to stand trial for his involvement in the 1993 Mumbai blasts in Mumbai

संजय दत्त की भूमिका

मामले में संजय दत्त का नाम आने के बाद हडकंप मच गया था. जांच में पता चला था कि संजय दत्त के इस मामले से जुड़े आरोपियों से काफी करीबी संबंध थे और उन्होंने इन आरोपियों से हथियार लेकर अपने घर में रखे थे. रिपोर्ट्स आई थी कि जांच में संजय दत्त के घर से 3 एके-56 राइफल, 9 मैगजीन, 450 कार्टरिज, एक 9mm की पिस्टल और 20 हैंड ग्रेनेड बरामद किए गए थे. इन्हें अबू सलेम, बाबा मूसा चौहान और समीर हिंगोरा ने इसे संजय के घर पर डिलीवर किया था.

संजय दत्त को अप्रैल 19, 1993 को गिरफ्तार कर लिया गया. 2006 में उन्हें दोषी पाया गया, उन्हें 5 साल की सजा दी गई. इसके बात दया याचिकाओं और सुनवाइयों का दौर चला. आखिर में संजय को फरवरी, 2013 में सजा दी गई और वो 2016 में यरवदा जेल से रिहा हो गए.

Salem leaves a court in New Delhi

अबू सलेम के प्रत्यर्पण का मामला

अबू सलेम को नवंबर, 2005 में पुर्तगाल से प्रत्यर्पित किया गया था. पुर्तगाल की नीति के तहत भारत सलेम को फांसी की सजा नहीं दी जा सकती थी. पुर्तगाल भारत के प्रत्यर्पण निदेशालय से एक समझौते पर हस्ताक्षर करवाए, जिनमें निदेशालय ने ये वादा किया कि वो सलेम को सुनवाई के बाद फांसी की सजा नहीं देंगे.

सलेम से हुई पूछताछ में ही मामले में सिद्दीकी और शेख के ताल्लुकात सामने आए. वहीं मुस्तफा का नाम 1995 में ही सामने आ गया था लेकिन उसे 2003 में गिरफ्तार किया गया. जब वो दुबई से दिल्ली आया.

दाउद इब्राहिम का क्या हुआ?

हमले के मास्टरमाइंड और डी-कंपनी का बॉस दाउद अभी भी भारत की पहुंच से बाहर है. गृह मंत्रालय ने दावा किया है कि दाउद पाकिस्तान में है. हाल ही में खबर आई थी कि दाउद की तबियत खराब है और वो आईसीयू में एडमिट है. खबर सच है झूठ, पता नहीं. लेकिन ये जरूर है कि मुंबई हमले के पीछे जिसका दिमाग था, वो अभी भी आजाद है.

शुक्रवार को हुई सुनवाई में सलेम और बाकी आरोपियों  पर आरोप तय कर दिए गए हैं. अब सजा का इंतजार है.

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