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नशा-मुक्ति केंद्र में डियोड्रेंट सूंघने से हुई 19 साल के लड़के की मौत

बच्चा ड्रग एडिक्ट था और नियमित तौर पर केमिकल इनहेल करता था

Updated On: Nov 17, 2018 05:41 PM IST

FP Staff

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नशा-मुक्ति केंद्र में डियोड्रेंट सूंघने से हुई 19 साल के लड़के की मौत

दुनियाभर से ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जब ड्रग के आदी हो चुके युवाओं के आगे नशा-मुक्ति केंद्र भी अपने हाथ खड़े कर देते हैं. ड्रग का बुी तरह शिकार हो चुके इन युवाओं को अगर नशा मुक्ति केंद्रों में लाया भी जाता है तो वो यहां भी नशा करने के नए उपाय तलाश लेते हैं और ऐसे ही में इनकी मृत्यु हो जाती है. ताजा मामला नीदरलैंड का है. नीदलैंड के एमस्टरडैम में नशा-मुक्ति की प्रक्रिया से गुजर रहे एक 19 साल के लड़के की मौत डियोड्रेंट इनहेल करने यानी सूंघने से हो गई.

लड़का ड्रग एडिक्ट था और नियमित तौर पर केमिकल इनहेल करता था. उसके के मेडिकल रिपोर्ट से सामने आई बात के अनुसार बच्चे में पूर्व से साइकोटिक (मानसिक रूप से अस्वस्थता) लक्षण थे. वह भांग और केटामीन के नशे में डूबा रहता था. कभी-कभी इनमें से कुछ भी ना मिलने पर वह नशा करने के दूसरे तरीके ढ़ूंढ़ता लेता था. नशा मुक्ति केंद्र में जब उसे नशा करने वाली दूसरी चीजें नहीं मिली तो उसने डियोड्रेंट को तौलिए में छिंटकर सूंघ लिया. इसके बाद  अचानक ही उसके शरीर में ऊर्जा आई और वह बहुत एक्टिव हो गया. इधर-ऊधर कूदने फानने लगा, लेकिन थोड़ी ही देर में उसके शरीर का रक्त संचार रुक गया. उसे कार्डियक अरेस्ट आया और वह वहीं नीचे गिर गया.

15-19 साल के बच्चों में नशे की लत सबसे अधिक

बाद में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मृत्यु हो गई. अस्पताल में उसका इलाज कर रहे डॉक्टरों ने कहा ,' मरीज का दिमाग काम करना बंद कर चुका था. करीब नौ दिनों तक उसका इलाज चला, लेकिन कोई सुधार नहीं देखी गई. ये बहुत ही दुर्लभ केस था, क्योंकि डियोड्रेंट सूंघने से अक्सर इतना ज्यादा असर नहीं होता. ये पहली बार है जब डियो सूंघने का यह दुष्परिणाम मैं देख रहा हूं.'

कार्डियक अरेस्ट के तीन कारण सबसे ज्यादा सामान्य हैं, पहला तो इनहेलेंट यानी जिसे रोगी नशा करने के लिए सूंघ रहा है, उसके दिल को अतिसंवेदनशील बना देता है, ऐसे में अगर वह अपने मां-बाप द्वारा पकड़ा जाता है, तो उस तनाव की स्थिति में उसे कार्डियक अरेस्ट सकता है.

इसके अलावा, इनहेलेंट दिल की मांसपेशियों के सिकुड़ने की ताकत के भी कम करते हैं. ये इनहेलेंट कोरोनरी धमनियों के स्पैम का कारण बन सकते हैं, ऐसे में शख्स कार्डियक अरेस्ट का शिकार हो सकता है.

सॉलवेंट या किसी भी पदार्थ को सूंघकर नशा करने वाले में 15-19 वर्ष के बच्चों की तादाद सबसे अधिक होती है. एक अध्यन में पाया गया है कि पुनर्वास केंद्रों या जेलों में लोग घरेलू उत्पादों का दुरुपयोग करने की अधिक संभावना रखते हैं, जिसका मतलब है कि इन वातावरणों में कार्डियक मौतों का अधिक खतरा हो सकता है.

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