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ED अधिकारी बनकर 100 से ज्यादा लोगों से Fraud करने वाले गिरोह का पर्दाफाश

धींगरा और उसका साथी रत्नाकर लाल खुद को चार्टेड अकाउंटेंट बताते थे और ईडी के नकली लेटरहेड का इस्तेमाल कर लोगों के बड़े लोन क्लियर करते थे

Updated On: Feb 16, 2019 04:19 PM IST

FP Staff

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ED अधिकारी बनकर 100 से ज्यादा लोगों से Fraud करने वाले गिरोह का पर्दाफाश

खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ED) का अधिकारी बताकर बिजनेसमैन और व्यापारियों को ठगने वाले एक गिरोह को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया है. इस गिरोह का सरगना टारगेट को पकड़ता था और उसके बड़े लोन को रफा दफा करने के लिए लाखों की कमीशन मांगता था. गैंग के सदस्य अपने टारगेट को भरोसा देते थे कि उनका ट्रांजेक्शन यानी की लेन देन ईडी द्वारा स्कैन नहीं किया जाएगा. क्योंकि इसके लिए उन्होंने ईडी में ही अपने लोग बैठा रखे हैं जो इस लेन देन को लिस्ट से हटा देते हैं. ये पाया गया कि पिछले कुछ सालों में उन्होंने 100 से ज्यादा लोगों के साथ ये धोखाधड़ी की है.

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टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक डीसीपी राजेश देव के नेतृत्व में एक टीम इस मामले की जांच कर रही है. एडिशनल कमिश्नर राजीव रंजन ने बताया कि टीम ने गिरोह के सरगना सतीश धींगरा को गिरफ्तार किया. धींगरा खुद को फाइनेंसर बताता है. धींगरा और उसका साथी रत्नाकर लाल खुद को चार्टेड अकाउंटेंट बताते थे और ईडी के नकली लेटरहेड का इस्तेमाल कर लोगों के बड़े लोन क्लियर करते थे. रंजन ने कहा, 'ये लोग ईडी के अधिकारियों के साथ अपने नजदीकी संबंधों का दावा करते थे. और अभी हाल ही में एक आदमी से 38 लाख रुपए की धोखाधड़ी की है.'

गिरोह ने एक फर्जी फाइनेंस फर्म 'सक्सेस फाइनेंशियल सर्विस' और 'सीडी फाइनेंशियल सर्विस' की भी स्थापना की थी. वो अपने टारगेट को अपने निजी अकाउंट में पैसे डालने के लिए कहते और फिर गायब हो जाते. धींगरा को फरीदाबाद कोर्ट ने भगोड़ा भी घोषित किया हुआ था.

साधारण परिवार से आते थे आरोपी:

धींगरा और लाल क्राइम करने के बाद लगातार अपनी जगह बदलते रहते. पुलिस ने वो पहले जहां जहां भी रहे उन जगहों से जानकारियां इकट्ठा की और अंत में धींगरा को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया गया.

पूछताछ के दौरान धींगरा ने कहा कि वो अपने टारगेट को ऊंचे इंटरेस्ट दरों पर लोन देने का लालच देते और उनसे जाली लोन दस्तावेजों पर साइन करा लेते. उसके बाद वो कमीशन के तौर पर उनसे मोटी रकम लेते और उन्हें पैसे ट्रांसफर होने के लिए कुछ दिन इंतजार करने के लिए कहते. इसके बाद वो अपना फोन बंद कर लेते और सीम कार्ड को फेंक देते.

पुलिस के मुताबिक धींगरा पलवल के एक साधारण से आता है. और ग्रेजुएशन करने के बाद उसने एक कॉल सेंटर में काम किया जहां से उसने लोन के बारे में जानकारी पाई. वहीं उसके साथी लाल ने वेब डिजाइनिंग में डिप्लोमा कर रखा है.

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