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Year Ender 2018 : इन सितारों की जगह कभी न भर सकेगा बॉलीवुड

बॉलीवुड के कई सितारों ने 2018 में दुनिया को अलविदा कहकर एक ऐसा शून्य बना दिया जिसका भरपाई करना बॉलीवुड में काफी मुश्किल होगा

Updated On: Dec 26, 2018 11:49 PM IST

Abhishek Srivastava

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Year Ender 2018 : इन सितारों की जगह कभी न भर सकेगा बॉलीवुड

साल 2018 के बारे में जब भी आगे चल कर कभी बात होगी तो इस साल को एक ऐसे साल के तौर पर याद किया जाएगा जब एक दिग्गज अभिनेत्री ने दुनिया को हमेंशा के लिए अलविदा कह दिया. जीहां, बात श्रीदेवी की ही हो रही है. महज 54 साल की उम्र में श्रीदेवी इस दुनिया से हमेंशा के लिए रुखसत हो गईं. इस बात में जरा भी शक नहीं है कि श्रीदेवी की प्रतिभा की भरपाई शायद ही कोई दूसरा बॉलीवुड में कर सके. श्रीदेवी के अलावा भी बॉलीवुड के और भी कलाकार थे जिनके जाने के बाद यही महसूस हुआ की मानो बॉलीवुड की चमक धूमिल हो गई है.

श्रीदेवी 

RIP Sridevi

श्रीदेवी की मौत पूरी तरह से अकस्मात् थी और जब लोगों को उनकी मौत की जानकारी मिली तब किसी ने विश्वास नहीं किया. श्रीदेवी अपनी बेटी के साथ दुबई गयी हुई थीं, अपने भतीजे मोहित मारवाह की शादी में शिरकत करने के लिए. 22 फरवरी की शादी के जश्न के बाद श्रीदेवी ने कुछ और दिन दुबई में बिताने की सोची, मजह इस बात के लिए कि वो अपनी बेटी खुशी कपूर के आने वाले जन्मदिन के लिए कुछ ख़रीददारी कर सकें. उनके पति और निर्माता बोनी कपूर को कुछ कारणवश घर लौटना पड़ा लेकिन जाते-जाते उन्होंने ये वादा भी श्रीदेवी को कर दिया था कि 24 फरवरी को वो वापस लौट आएंगे और डिनर साथ में करेंगे.

बोनी कपूर ने अपना वादा निभाया और वो दुबई के एक होटल में उसी कमरे में आ पहुंचे जहां श्रीदेवी अपना वक्त बिता रही थीं, बताया जाता है कि श्रीदेवी ने शराब पी रखी थी वो किसी बात से डिस्टर्ब भी थीं, ऐसे में उन्हें डिनर पर ले जाने के लिए बोनी ने उनसे आग्रह किया, वो डिनर पर जाने के लिए तैयार होने बाथरूम में गईं लेकिन करीब 20 मिनट तक जब वो बाथरूम से वापस नहीं निकलीं तो बोनी कपूर को बाथरूम का दरवाजा खटखटाना पड़ा. शुक्र था कि दरवाजा अंदर से बंद नहीं था और उसके बाद जो कुछ भी बोनी ने देखा उसे देखकर उनके होश उड़ गए.

Sridevi funeral

पानी से भरे बाथटब ने श्रीदेवी की मौत हो चुकी थी. बॉलीवुड के लिए ये एक बेहद ही अविश्वसनीय खबर थी. दुबई पुलिस ने उनकी मौत की जांच की और पूरी तरह से संतुष्ट हो जाने के बाद उन्होंने श्रीदेवी के शव को मुंबई लाने की अनुमति दे दी. श्रीदेवी की फिल्में सदमा, हिम्मतवाला, चालबाज़, चांदनी, मिस्टर इंडिया, लम्हे में उनकी जबरदस्त अदाकारी उनको हमेंशा जिन्दा रखेगी. हाल ही में रिलीज हुई शाहरुख खान की फिल्म जीरो में भी उनका एक छोटा सा कैमियो है जिसे देखकर दर्शकों को फिर से उनकी याद आ जाती है.

मोहम्मद अजीज 

Mohammad Aziz

मुंबई एयरपोर्ट पर दिल का दौरा पड़ने की वजह से मशहूर गायक मोहम्मद अजीज का निधन 27  नवंबर को हो गया. 80-90 के दशक में मोहम्मद अजीज ने अपनी गायकी से एक तरह से बॉलीवुड में धमाल मचा दिया था. कुछ लोगों ने उनके बारे में यहां तक कहा कि बॉलीवुड को दूसरा मोहम्मद रफी मिल गया है.

कोलकाता में एक शो करने के बाद जब वो मुंबई एयरपोर्ट पहुंचे तब उसी वक्त उनको दिल का दौरा पड़ा जो जानलेवा साबित हुआ. जब अनु मालिक ने उनको 1984 में फिल्म मर्द में गाने का मौका दिया उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा.

लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, कल्याणजी-आनंदजी, आर डी बर्मन जैसे संगीतकारों की सोहबत में उन्होंने एक से एक नायाब गाने दिए. फिल्म राम लखन के लिए उनका गाना माई नेम इज लखन बेहद लोकप्रिय हुआ था.

कल्पना लाजमी

Kalpana-Lajmi

23 सितम्बर को किडनी और लिवर फेलियर की वजह से निर्माता-निर्देशिका और लेखिका कल्पना आजमी ने दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया. कल्पना लाजमी मशहूर अभिनेता और निर्देशक गुरुदत्त की भतीजी थीं और निर्देशन के गुर उन्होंने श्याम बेनेगल की छत्रछाया में रहकर सीखे. अपनी पहली फिल्म ‘एक पल’ से वो सुर्खियों में आ गई थीं.

उनकी फिल्म रुदाली के लिए अभिनेत्री डिंपल कपाडिया को नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया गया था. आगे चलकर कल्पना ने दमन, दर्मियां और क्यों जैसी दमदार फिल्में बनाईं. भूपेन हज़ारिका के साथ अपने रिश्ते को लेकर वो काफी समय तक सुर्खियों में भी रहीं. मृत्यु के कुछ समय पहले उनकी जीवनी भी प्रकाशित हुई थी.

नितिन बाली 

Nitin Bali dead road Accident in mumbai

गायक नितिन बाली की मौत 9 अक्टूबर को एक कार दुर्घटना में हो गई. नितिन को सफलता तब मिली जब उन्होंने पुराने हिंदी फिल्म के गानों को रीमिक्स करना शुरू किया था. नीले नीले अम्बर पर, पल पल दिल के पास जैसे गानों को जब नितिन ने रीमिक्स किया तो लोगों ने इन गानों के नये-नये कलेवर को बेहद पसंद किया. कहा जा सकता है कि रिमिक्स की दुनिया के वो पहले नायकों में से एक थे.

कृष्णा राज कपूर 

Ranbir Kapoor grandmother Krishna Raj Kapoor dies after a long illness in Mumbai

हिंदी फिल्मों के शोमैन राज कपूर की पत्नी कृष्णा राज कपूर का निधन 87 साल की उम्र में 1 अक्टूबर को हो गया था. कृष्णा राज कपूर का निधन दिल के दौरे के चलते हुआ. कृष्णा राज कपूर के निधन की जानकारी सबसे पहले रणधीर कपूर ने दी थी. उनके अंतिम संस्कार में बॉलीवुड का पूरा हजूम अपना सम्मान देने के लिए उमड़ पड़ा था.

रीता भादुड़ी

Rita Bhaduri

रीता भादुड़ी गुजराती फिल्मों में जाना मान नाम है. रीता ने जब हिंदी फिल्मों का रुख किया तब वहां भी बॉलीवुड ने उनकी प्रतिभा को गले लगाने में ज्यादा समय नहीं लिया. 1968 में उन्होंने अपनी पहली हिंदी में काम किया लेकिन शोहरत पाने के लिए उनको 1975 तक इंतजार करना पड़ा जब सिनेमाघरों में जूली रिलीज़ हुई. भले ही फिल्म में वो मुख्य भूमिका में नहीं थी लेकिन उनकी सशक्त अदाकारी ने सभी का दिल मोह लिया. आगे चलकर उन्होंने अपने अभिनय प्रतिभा का सबूत अनुरोध, विश्वनाथ, सावन को आने दो जैसी फिल्मों में दिया. सन 1995 में फिल्म बेटा में उनके शानदार अभिनय के लिए उनको फिल्मफेयर अवार्ड के बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस की श्रेणी में नामांकित किया गया था.

एफटीआईआई पुणे से एक्टिंग में स्नातक लेने वाली रीता ने 17 जुलाई को 62 साल की उम्र में किडनी की परेशानी की वजह से दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया था.

अर्जुन हिंगोरानी

dharmendra-arjun hingorani

70 और 80 के दशक में अर्जुन हिंगोरानी की गिनती जाने में निर्माता-निर्देशको की श्रेणी में हुआ करती थी. उनकी फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे से धर्मेंद्र ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी. और इस फिल्म के बाद ही दोनों की दोस्ती कुछ इस कदर अटूट हो गई कि आगे चलकर अर्जुन हिंगोरानी की ज्यादातर फिल्मों में धर्मेंद्र ही मुख्य भूमिका में नजर आए.

अर्जुन हिंगोरानी को क अक्षर से कुछ ज्यादा ही लगाव था और इसी के चलते उनकी अधिकतर फिल्मों का नाम क से ही था. कब क्यों और कहां, खेल खिलाड़ी का, कहानी किस्मत की, कातिलों के कातिल उनके निर्देशन में बनी फिल्में थीं जिनको बाक्स ऑफिस पर दर्शकों का प्यार और भरपूर सफलता मिली. 5 मई को 90 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था.

शम्मी

shammi aunty

शम्मी या नरगिस रबाडी का निधन 88 साल की उम्र में 6 मार्च को हुआ था. 1949 में अपनी पहली फिल्म करने वाली शम्मी ने आगे चल कर 200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. अपने अभिनय में उन्होंने हल्के फुल्के कॉमेडी का जो तड़का मारा था उसको लोगों ने बेहद पसंद किया.

अपने करियर के शुरूआती दिनों में उन्होंने दिलीप कुमार की हीरोइन बतौर संगदिल फिल्म में काम किया था. 70 के दशक में उनको दर्शकों ने कई फिल्मों में मां की भूमिका ने देखा जिसमें पूरब और पश्चिम, स्वर्ग नरक, अधिकार फिल्में प्रमुख थी. आगे चल कर उन्होंने फिल्म निर्देशक सुल्तान अहमद से शादी की लेकिन महज सात साल के बाद ये शादी टूट गयी.

उसके बाद फ़िल्मी दुनिया में अपने पांव फिर से जमाने के लिए शम्मी को अच्छा खासा संघर्ष करना पड़ा जिसमें उनकी मदद राजेश खन्ना, नरगिस दत्त जैसे सितारों ने की. 2013 में संजय लीला भंसाली के बैनर तले बनी फिल्म शिरीन फरहाद की निकल पड़ी में उनके आखिरी बार पर्दे पर दीदार हुए थे.

नरेंद्र झा

narendra jha

चरित्र अभिनेता नरेंद्र झा का देहांत 29 अप्रैल को दिल के दौरे के चलते हो गया था और उनके जाने के साथ-साथ एक कमाल के अभिनेता से बॉलीवुड को वंचित होना पड़ा. बिहार में जन्मे नरेंद्र झा ने यूं तो फिल्मों में काम करना सन 2003 में ही कर दिया था लेकिन सही मायने में उनको पहचान दस साल के बाद 2014 में विशाल भारद्वाज की फिल्म हैदर से मिली जिसमें उन्होंने शाहिद कपूर के पिता का किरदार निभाया था.

हैदर के बाद नरेंद्र झा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और उसके बाद मोहनजोदारो, फोर्स 2, घायल, रईस, काबिल सरीखी बड़ी फिल्मों में अपने अभिनय का हुनर दिखाया. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से प्राचीन इतिहास की पढ़ाई करने वाले नरेंद्र झा ने जब मुंबई का रुख किया था तब बहुत ही कम समय उन्होंने एड की दुनिया में अपनी पहचान बना ली थी.

श्रीवल्लभ व्यास

amir vallabh

श्रीवल्लभ व्यास की पहचान फिल्म लगान से बनी थी और भुवन की क्रिकेट टीम के ईश्वर वही थे. उनका निधन 7 जनवरी को जयपुर में पैरालाइसिस अटैक की वजह से हुआ. लगान के पहले उन्होंने सरफरोश और शूल जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का परिचय दे दिया था. लगान के बाद उन्होंने चांदनी बार, अभय, सत्ता, तीन दीवारें जैसी फिल्मों में काम किया. पैसे की तंगी और बीमारी की वजह से उनको मुंबई छोड़कर राजस्थान में अपने पैतृक घर की ओर रुख करना पडा था. श्रीवल्लभ व्यास के इलाज के लिए इरफान खान, आमिर खान और मनोज बाजपेयी ने उनके परिवार को आर्थिक सहायता दी थी.

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