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Controversy: फरहान अख्तर के बाद ऋतिक-विवाद में कूद पड़ी यामी गौतम

यामी गौतम ने सोशल मीडिया पर एक ओपन लैटर लिखकर ऋतिक रोशन और कंगना रनौत के विवाद पर अपनी बात रखी है

Updated On: Oct 09, 2017 05:01 PM IST

Akash Jaiswal

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Controversy: फरहान अख्तर के बाद ऋतिक-विवाद में कूद पड़ी यामी गौतम

ऋतिक रोशन और कंगना रनौत के विवाद पर हाल ही में फरहान अख्तर ने एक ओपन लैटर लिखकर इस मुद्दें पर चर्चा की. अब इस मामले पर अपनी राय देते हुए फिल्म ‘काबिल’ से ऋतिक की को-एक्ट्रेस यामी गौतम ने फेसबुक पर एक लैटर पोस्ट किया है.

आइए देखें कि यामी ने इस लैटर में क्या कहा है.

“ वैसे तो मैं सोशल मीडिया पर ज्यादा टिका टिप्पणी नहीं करती हूं लेकिन आज मैं कुछ कहना चाहूंगी क्योंकि एक महिला के तौर पर मैं जो देख रही हूं वो मुझे बहुत डराता है.

ये लैटर इंडस्ट्री के दो बड़े स्टार्स के बीच चल रहे विवाद को लेकर है. खुशकिस्मती से इनमें से एक के साथ मुझे काम करने का अवसर मिला. लेकिन मैं ये एक दोस्त या को-स्टार के तौर पर नहीं लिख रही हूं. मैं ये एक औरत और देश की नागरिक होने के तौर पर लिख रही हूं. मैं अपनी बात को संक्षेप में और यथासंभव निष्पक्ष तरह से रखने की कोशिश करूंगी.

मैं कोई लीगल एक्सपर्ट नहीं हूं और मैं इस मामले के विवरणों के बारे में नहीं जानती हूं. मैं केवल मीडिया में रिपोर्ट की जा रही बातों के बारे में जानती हूं और मैं एक अच्छी और सच्चाई भरी रिपोर्टिंग के समर्थन में हूं. किसी तरह से ये विवाद अब एक जेंडर वॉर में बदल चुका है जहां सोसाइटी के कुछ हिस्सों ने आदमी को पहले ही दोषी ठहरा दिया है. लोगों ने सोच लिया कि क्योंकि वो आदमी दोषी हैं क्योंकि ऐसा ही तो होता आया है. आदमियों ने औरतों को कई दशकों से दबा कर है और इस केस में भी ऐसा ही सोचा जा रहा है.

ये खतरनाक है. जो भी हुआ, दोषी साबित होने तक निर्दोष है और कानून को फैसला करने देना चाहिए. कई बार इस देश में हम अक्सर न्याय पाने के लिए सड़कों पर उतर आते हैं. पुलिस इस मामले की तहकीकात कर रही है और दोनों ही पार्टी इतनी सक्षम है कि वो कोर्ट में खुद का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं और कानूनी तौर पर इस मामले को सुलझा सकते हैं. दुखवश! हमारी कानून और व्यवस्था एक तरह की क्लासिस्ट है, लेकिन हम पीछे नहीं हटेंगे.

इस तरह से किसी सबूत पर विश्वास रखकर किसी आदमी को गाली देना खतरनाक है. यदि जेंडर कार्ड का इस्तमाल न करके निष्पक्ष तरीके से इस मामले की सुनवाई हो तो विपरीत लिंग की महिलाओं को आदमियों के बराबरी में लाने वालों के प्रयासों को एक झटका लगेगा. अगर मीडिया द्वारा इस बेबुनियादी ट्रायल को इसी तरह चलने दिया गया, जहां सिर्फ एक पार्टी को दोषी माना गया है तो फिर जल्द ही लोगों का देश के उन सभी आंदोलनों से विश्वास उठ जाएगा जो पिछले कुछ सालों में किए गए हैं.

मैं यहां किसी को दोषमुक्त कराने की कोशिश नहीं कर रही हूं. मैं किसी भी एक पार्टी द्वारा द्वेष की सलाह नहीं दे रही हूं. मैं बस इतना कह रही हूं कि इसे दो जेंडर्स के बीच का झगड़ा न बनाया जाए. आइए इसे दो लोगों के बीच की एक ऐसी लड़ाई रहने दें जिनका अतीत में पत्राचार न हुआ हो. इस मामले की सभी बातों को सामने आने दिया जाए और तब तक हमारे जजमेंट को सुरक्षित रखा जाए.

बस क्योंकि एक आदमी और औरत के बीच की लड़ाई है इसका ये मतलब नहीं कि ये दो जेंडर्स के बीच की लड़ाई है. इसी तरह हर मुद्दे को दो जेंडर के बीच की लड़ाई बनाने से समाज में इस तरह के सेक्सिस्ट इश्यूज से निपटते समय हमारा ध्यान भटक जाता है. ऐसी इश्यूज जो हमारे समाज को प्लेग की तरह ग्रसित करते हैं.”

 

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