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डेनियल डे-लुईस: सबसे बड़े एक्टर ने क्यों कहा एक्टिंग को अलविदा

सबसे अधिक बेस्ट एक्टर ऑस्कर जीतने वाले डेनियल डे-लुईस ने अचानक अभिनय से संन्यास ले लिया है

Pawas Kumar Updated On: Jun 21, 2017 03:20 PM IST

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डेनियल डे-लुईस: सबसे बड़े एक्टर ने क्यों कहा एक्टिंग को अलविदा

हॉलीवुड अभिनेता डेनियल डे-लुईस रिटायर हो रहे हैं. हो सकता हो आपको डेनियल डे-लुईस का नाम याद न हो. लेकिन आपको उनके किरदार जरूर याद होंगे. अपनी पिछली फिल्म 'लिंकन' में उन्होंने अब्राहम लिंकन का किरदार निभाया था. इस रोल के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का ऑस्कर मिला था.

2013 में यह ऑस्कर जीतने से पहले डे-लुईस ने 1990 में 'माई लेफ्ट फुट' और 2008 में 'देयर विल बी ब्लड' के लिए भी ऑस्कर जीता था. डे-लुईस ने तीन बार बेस्ट एक्टर का खिताब जीता है. यह कारनामा कोई दूसरा हीरो नहीं कर पाया है. यह डे-लुईस की कमाल की शख्सियत ही है कि दूसरे बड़े अभिनेताओं की तरह लोगों को वह कम ही याद रहते हैं, लेकिन वह मौजूदा जेनेरेशन के सबसे बड़े एक्टर हैं.

उनकी शख्सियत ही ऐसी है कि अपने करियर के टॉप पर होने के बाद भी डे-लुईस के संन्यास लेने की खबर चौंकाती नहीं. डे-लुईस के बारे में जानना और पढ़ना बिल्कुल ऐसा ही लगता है कि उन्हीं की किसी फिल्म की कहानी जानी या पढ़ी जा रही हो. आयरलैंड में जन्मे डे-लुईस ने अपना करियर स्टेज पर शुरू किया था लेकिन स्टेज की अदाकारी से वह काफी पहले ही संन्यास ले चुके हैं. उनकी स्टेज एक्टिंग छोड़ने की कहानी भी बेहद रोचक है.

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स्टेज पर दिखा पिता का भूत

1989 में डे-लुईस नेशनल थिएटर में शेक्सपियर के हैमलेट में मुख्य भूमिका निभा रहे थे. एक सीन में हैमलेट अपने पिता की आत्मा से बात करते हैं. कहा जाता है कि इस सीन के दौरान एक बार डेनियल अचानक से कांपने लगे और फूट-फूट कर रो पड़े. उन्होंने यह सीन बीच में ही छोड़ दिया और स्टेज से चले गए. इसके बाद वह दोबारा कभी स्टेज पर अभिनय करने नहीं लौटे. कहा जाता है कि डेनियल एक्टिंग में इतना डूब गए थे कि उन्हें इस सीन में अपने पिता का भूत नजर आने लगा.

मेथड एक्टिंग की हद

आपने आमिर खान जैसे अभिनेताओं को अपनी फिल्मों के लिए एक ही लुक में रहते देखा है. लेकिन जब मेथड एक्टिंग की बात आती है तो डे-लुईस का कोई सानी नहीं है. कहा जाता है कि जब वह 'माई लेफ्ट फुट' में एक विकलांग का किरदार निभा रहे थे तो उन्होंने पूरी शूटिंग के दौरान व्हीलचेयर से न उठने का फैसला किया. यहां तक कि सेट पर एक ओर से दूसरी तरफ ले जाने के लिए स्पॉट बॉयज को उन्हें उठाकर ले जाना पड़ता. डे-लुईस का कहना था कि वह देखना चाहते थे कि आखिर असल में अशक्त लोगों से कैसा व्यवहार होता है.

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जब 2002 में वह स्पीलबर्ग की फिल्म 'गैंग्स ऑफ न्यूयॉर्क' में एक गैंगस्टर कसाई का किरदार निभा रहे थे तो उन्होंने काम सीखने के लिए एक कसाई के यहां नौकरी कर ली. चाकू फेंकना सीखने के लिए उन्होंने सर्कस के कलाकारों से ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी.

जब चाहा काम किया, जब चाहा छोड़ दिया

संडे ब्लडी संडे, गांधी और माई ब्यूटीफुल लॉन्डेरेट जैसी फिल्मों से शुरुआत करने वाले डे-लुईस को पहचान मिली 1989 के 'माई लेफ्ट फुट' से. इसके लिए उन्होंने पहला ऑस्कर जीता. इसके बाद उन्होंने द लास्ट ऑफ़ द मोहिकन्स, द ऐज ऑफ इनोसेंस, इन द नेम ऑफ़ द फादर, द क्रूसिबल और द बॉक्सर जैसी फिल्में कीं. लेकिन 1997 में उन्होंने अचानक फिल्मों से ब्रेक ले लिया और गायब हो गए. इस दौरान डे-लुईस ने लकड़ी की बढ़ईगिरी का काम सीखा. वह इटली के प्रसिद्ध जूते बनाने वाले डिजायनर के यहां जूते बनाना सीखने लगे. क्यों? डेनियल का सीधा सा जवाब था क्योंकि वह ऐसा करना चाहते थे.

2002 में स्पीलबर्ग के कहने पर डे-लुईस ने फिल्मों में वापसी की. 2012 में लिंकन के बाद उन्होंने फिर 5 साल का ब्रेक ले लिया. उनके दोस्तों के मुताबिक डे-लुईस फिर से आयरलैंड चले गए. दोस्तों का कहना था कि डे-लुईस ने कहा कि वह वहां खेतों-किसानी से जुड़े काम और पत्थर तराशने के काम सीखना चाहते हैं.

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डे-लुईस ने फिलहाल फिल्म फैंटम थ्रेड का काम खत्म किया है. अगर वह संन्यास के फैसले पर टिके रहते हैं तो यह उनकी आखिरी फिल्म होगी.

अद्भुत फैसला

अभी डे-लुईस बस 60 साल के हैं. किसी एक्टर के लिए यह उम्र बहुत ज्यादा नहीं होती. हिंदी फिल्मों में तो इस उम्र के एक्टर अभी भी कॉलेज स्टुडेंट वाला किरदार निभा रहे हैं. ऐसा शायद ही कोई और एक्टर होगा जो ऑस्कर जीत कर 5 साल का ब्रेक ले ले या फिर अचानक से एक्टिंग ही छोड़ दे. अपने करियर के शीर्ष पर रहकर एक्टिंग को अलविदा कह देना बड़ी हिम्मत या कोरी सनक का काम है.

डेनियल डे-लुईस के बारे में कुछ और कहा जाए या नहीं यह तो पक्का कहा जा सकता है कि उनमें न तो हिम्मत कम है और न ही सनक. फिलहाल अगर डेनियल का यह संन्यास स्थायी है तो यह अच्छी एक्टिंग के कद्रदानों के लिए बुरी खबर है.

डेनियल डे-लुईस की कहानी में सच वाकई कल्पना से अधिक विचित्र है. उम्मीद है कि एक दिन इस कहानी पर कोई फिल्म बनेगी. शायद उसके लिए डेनियल भी फिर से पर्दे पर लौट आएं.

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