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नूतन स्पेशल: अदाकारी की खूबसूरती से हिंदी सिनेमा की बुलंदियों को छुआ

फ्लॉप फिल्म से शुरू हुए अपने फिल्मी सफर में नूतन ने सिनेमा के आकाश पर ध्रुव तारे की सी हैसियत हासिल की

Raajkumar Keswani Updated On: Jun 04, 2017 05:20 PM IST

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नूतन स्पेशल: अदाकारी की खूबसूरती से हिंदी सिनेमा की बुलंदियों को छुआ

हिंदुस्तानी सिनेमा का इतिहास एक से एक आला हुनर और खूबसूरत हीरोइनों से भरा पड़ा है. लेकिन इन तमाम नामों के बीच एक नाम ऐसा भी है जिसके नाम के साथ ‘एक्सीलेंस’ अपने आप ही जुड़ जाता है. इस अजीम अदाकारा का नाम है नूतन.

अपने दौर की मशहूर अभिनेत्री शोभना समर्थ और डायरेक्टर कुमार सेन समर्थ की बड़ी बेटी का जन्म 4 जून 1936 को हुआ था. अजब सी बात है कि अपनी जवानी में ब्यूटी कांटेस्ट जीतने वाली नूतन पैदाइश के समय इतनी दुबली-पतली सी पैदा हुईं थीं कि उनकी मां शोभना समर्थ उनको ‘अगली बेबी’ और ‘अगली डक’ बुलाती थीं.

तानों से बेपरवाह नूतन, स्कूल के दौर से ही जिंदगी को बड़े उत्साह के साथ जीती रहीं. बैडमिंटन, हार्स राइडिंग, स्विमिंग जैसी एक्टिविटीज के साथ ही संगीत की भी बाकयदा शिक्षा लेती रही. महज पांच साल की उम्र में ही आत्मविश्वास से लबरेज नूतन ने बंबई के ताज महल होटल में एक परफार्मेंस भी दिया था.

9 साल की उम्र में फिल्मी करियर शुरू

नूतन का फिल्मी सफर भी बहुत छोटी सी उम्र में शुरू हो गया. नौ साल की उम्र में ही उनके पिता कुमार सेन ने अपनी फिल्म ‘नल दमयंती’ में नूतन को बतौर बाल कलाकार पेश किया था. इस फिल्म की रिलीज के कुछ साल बाद प्रसिद्ध निर्माता-निदेशक चंदूलाल शाह ने नूतन को देखकर उसे बतौर हीरोइन लॉन्च करने का इरादा कर लिया, और वो भी दिलीप कुमार और राज कपूर के साथ.

किन्हीं कारणों से यह फिल्म शुरू तो नहीं हो पाई लेकिन इस घटना से हौसला लेकर शोभना समर्थ ने 1950 में सिर्फ चौदह बरस की नूतन को फिल्म ‘हमारी बेटी’ में बतौर हीरोइन लॉन्च कर दिया. फिल्म के हीरो थे शेखर, जो तब बड़े नामी कलाकार थे. इस फिल्म की निर्माता और निदेशक भी शोभना समर्थ खुद ही थीं. यह फिल्म बुरी तरह से फ्लाप साबित हुई.

नूतन की इस पहली लेकिन असफल फिल्म की एक दिलचस्प बात यह है कि इसमें एक गीत ‘तुझे कैसा दूल्हा भाए री बांकी दुल्हनिया’ भी गाया था.

मिस इंडिया का खिताब जीत कर सबको चौंकाया

1951 के साल में नूतन की जिंदगी में दो बड़ी घटनाएं हुईं. पहली तो यह कि उनको फिल्म ‘हम लोग’ में रंगमंच और सिनेमा के मंजे हुए कलाकार बलराज साहनी और निर्देशक जिया सरहदी के साथ काम करने का और अभिनय की बारीकियां सीखने का मौका मिला. दूसरी बात ये हुई कि जिसे घर के लोगों ने जन्म के समय ‘अगली बेबी’ कहकर स्वागत किया था उसी ने 1951 में मिस इंडिया का खिताब जीत कर सबको चौंका दिया.

इसी साल रिलीज होने वाली उनकी फिल्म नगीना के निर्माता पंचोली प्रोडक्शंस ने इस खुशी में बड़े-बड़े इश्तिहार देकर इस बात का प्रचार किया था कि उनकी हीरोइन नूतन को ताज महल होटल में आयोजित प्रतियोगिता में मिस इंडिया चुना गया है.

मजे की बात यह है कि फिल्म नगीना जबरदस्त हिट साबित हुई. लेकिन नूतन को सिनेमाघर में इसलिए प्रवेश नहीं मिला कि फिल्म केवल व्यस्कों के लिए ‘ए’ सर्टिफिकेट मिला था. तब नूतन केवल 16 बरस की थीं.

नूतन के करियर की पहली बड़ी सफलता 1955 में आई फिल्म सीमा थी. इस फिल्म में नूतन को एक बार फिर साथ मिला बलराज साहनी का. शानदार कहानी और बेहतरीन निर्माता-निदेशक अमिया चक्रवर्ती का भी उन्हें साथ मिला.

बेस्ट एक्ट्रेस का पहला फिल्मफेयर अवार्ड मिला

इस फिल्म में नूतन ने एक ऐसी अनाथ लड़की गौरी की भूमिका निभाई थी जिसे समाज के हाथों हर तरह की प्रताड़ना सहनी पड़ती है. उसे चोरी के झूठे इल्जाम में भी फंसाया जाता है. इन हालातों से वह बगावत कर उठती है. पुलिस उसे सुधार आश्रम में भेज देती है जहां पहली बार प्यार-मोहब्बत और दोस्ती जैसी चीजों से उसका वास्ता होता है. गौरी के इस चरित्र को नूतन ने इतनी शिद्दत के साथ जिया कि चारों तरफ वाह-वाह हो उठी. इस किरदार को निभाने के लिए उनको बेस्ट एक्ट्रेस का पहला फिल्मफेयर अवार्ड भी मिला.

इस फिल्म में एक सिचुएशन पर बलराज साहनी एक गीत गाते हैं, ‘कहां जा रहा है तू ऐ जाने वाले’, इस पूरे गीत पर नूतन को अपने जज्बात का इजहार महज अपने चहरे और अपनी आंखों से करना है. नूतन ने इस काम को जिस तरह अंजाम दिया है वो फिल्म एक्टिंग की किताबों में दर्ज होने लायक है.

नूतन की संगीत की शिक्षा और उसके साथ गाने का शौक फिल्मों में काफी काम आया. फिल्म हमारी बेटी में ही संगीतकार स्नेहल भाटकर ने उनसे एक गीत ‘तुझे कैसा दूल्हा भाए री बांकी दुल्हनिया’ गवाया था.

इसके बाद 1960 में फिल्म छबीली में अपनी छोटी बहन तनूजा के साथ अभिनय करने के अलावा नूतन ने इसमें छह गीत भी गाए हैं. इनमें से एक उनका प्रसिद्ध सोलो गीत है ‘ऐ मेरे हमसफर, ले रोक अपनी नजर’ और दूसरा हेमंत कुमार के साथ एवरग्रीन डुएट ‘लहरों पे लहर’ आज भी सुनाई देते हैं.

लता मंगेशकर से एक बार पूछा गया कि उनके गाए गीतों को किस अभिनेत्री ने सबसे ज्यादा परफेक्शन के साथ पर्दे पर निभाया है ? उनका जवाब था – नूतन. उन्होंने फिल्म ‘सीमा’ में नूतन पर फिल्माए गए गीत ‘मनमोहना बड़े झूठे’ का उदाहरण देते हुए बताया था कि नूतन को पर्दे पर गाते हुए देखकर लगता था जैसे सचमुच वही गा रही हैं. मुझे बाद में पता लगा कि उन्होंने तो बाकायदा संगीत सीख रखा है.

बिमल राय जैसे निर्देशक के साथ उन्होंने फिल्म सुजाता में एक अछूत लड़की की भूमिका में डायलाग कम बोले और आंखों से अपनी भावनाओं को ज्यादा प्रकट किया. ‘बंदिनी’ में एक ऐसी औरत का किरदार निभाया जो ईर्ष्या में अंधी होकर होश खो बैठती है. और अपने महबूब की पत्नी की हत्या भी कर बैठती है.

दूसरी तरफ ‘दिल्ली का ठग’ जैसी फिल्म में किशोर कुमार जैसे कॉमेडी के बादशाह के साथ ‘सी ए टी कैट, कैट माने चूहा’ जैसे गीत में बराबरी से बिना हल्के किस्म की भाव-भंगिमाओं के ही सिर्फ अपनी चुलबुली अदाओं से बराबरी पर आकर खड़ी हो जाती हैं.

नूतन का फिल्मी सफर एक फ्लॉप फिल्म के साथ शुरू जरूर हुआ लेकिन देखते ही देखते उसने सिनेमा के आकाश पर चमकते चांद-तारों के बीच ध्रुव तारे की सी हैसियत हासिल कर ली. उन्होंने उस दौर के हर बड़े सितारे के साथ काम किया.

नूतन ने अशोक कुमार के साथ ‘बंदिनी’ में काम किया तो राज कपूर के साथ ‘कन्हैया’, ‘छलिया’ और ‘अनाड़ी’ जैसी फिल्में की. देव आनंद के साथ ‘पेइंग गेस्ट’, ‘बारिश’, ‘मंजिल’ और ‘तेरे घर के सामने’ जैसी फिल्मे कीं. दिलीप कुमार के साथ उनकी जोड़ी दो बार बनते-बनते रह गई. 1986 में फिल्म कर्मा में उन दोनों की जोड़ी पर्दे पर पूरी हुई. अमिताभ बच्चन के साथ नूतन ने फिल्म ‘सौदागर’ में काम किया.

लेकिन इन सारे बड़े नामों के साथ ही नए लोगों के साथ काम कर के भी उन्होंने फिल्मों की सफलता दिलाई. 1968 की फिल्म सरस्वतीचंद्र में एक अंजान सा कलाकार मनीष उनका हीरो था लेकिन फिल्म अकेले नूतन के अभिनय के दम पर कामयाब हो गई.

जिंदगी बड़ी अजीब चीज होती है. आज जो प्यारे हैं कल वो न जाने क्यों और कैसे गैर हो जाते हैं. नूतन के जीवन में भी ऐसा समय आया. शोभना समर्थ जैसी मां जिसने अपना सब कुछ दांव पर लगाकर नूतन को हीरोईन बनाने और उसे कामयाब बनाने की जिद में खुद को भी भुला दिया था, एक दिन अदालत में आमने-सामने आ गए.

मां पर कमाई के पैसों में हेर-फेर का आरोप

नूतन ने अपनी मां पर अपनी कमाई के पैसों में हेर-फेर का आरोप लगाकर कोर्ट में केस लगा दिया था. वक्त के साथ यह तूफान भी शांत हो गया और एक बार फिर मां-बेटी ने सबकुछ भुलाकर एक दूसरे को गले लगा लिया.

Nutan with her Mother and Sisters

नूतन अपनी मां शोभना समर्थ और बहनों तनूजा और चतुरा के साथ (फोटो: फेसबुक से साभार)

हिंदुस्तानी सिनेमा की अद्वितीय अभिनेत्री नूतन जिसने सर्वश्रेष्ठ अभिनय के लिए छह बार फिल्मफेयर अवार्ड जीता और अपने बेजोड़ अभिनय से लोगों का दिल जीता, उसके खुशहाल जीवन में एक दिन आग लग गई.

1959 में नेवी कमांडर रजनीश बहल से शादी और फिर बेटे मोहनीश बहल के आने और एक बेहद कामयाब करियर के साथ सब कुछ ठीक चल रहा था. 1989 में अचानक नूतन को कैंसर डिटेक्ट हुआ. तमाम इलाज के बाद भी आखिर 21 फरवरी 1991 को महज पचपन साल की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया. लेकिन उनकी फिल्में, उनका बेमिसाल अभिनय आज भी इसी दुनिया की हर नई पीढ़ी के लिए अभिनय की बुलंदी की एक मिसाल की तरह मौजूद है और रहेगा.

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