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The Ghazi Attack Review Roundup: क्रिटिक्स को कैसी लगी द गाजी अटैक

'द गाजी अटैक' 1971 में हुए भारत-पाकिस्‍तान युद्ध की एक घटना पर आधारित है.

Updated On: Feb 17, 2017 12:33 PM IST

FP Staff

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The Ghazi Attack Review Roundup: क्रिटिक्स को कैसी लगी द गाजी अटैक

'द गाजी अटैक' 1971 में हुए भारत-पाकिस्‍तान युद्ध और बांग्‍लादेश की मुक्ति के ठीक पहले की घटना पर आधारित है. इसमें पाकिस्‍तानी पनडुब्‍बी गाजी को भारतीय जांबाज नौसैनिकों ने बहादुरी से नष्‍ट कर दिया था. यह फिल्म इसी हमले की अनसुनी कहानी दिखाती है. हालांकि फिल्म शुरू होते ही एक डिस्‍क्‍लेमर बताता है कि यह सच्‍ची घटनाओं की काल्‍पनिक कथा है.

हाल ही में दिवंगत हुए ओम पुरी की मृत्‍यु के बाद रिलीज हुई यह पहली फिल्‍म है. फिल्म में भारतीय नौसेना की पनडुब्बी के कप्तान के तौर पर रणविजय सिंह की भूमिका में के के मेनन, लेफ्टिनेंट कमांडर अर्जुन के रोल में राणा दग्गुबती, अफसर देवराज के तौर पर अतुल कुलकर्णी अहम भूमिकाओं में हैं.

जानिए फिल्म को आलोचकों से कैसी राय मिल रही है:

शालिनी लैंगर (इंडियन एक्सप्रेस)

दिखता है कि फिल्म बनाने से पहले एक पनडुब्बी से निर्माण, एक जहाज के चलने यहां तक टोरपीडो छोड़ने और समुद्र में लैंडमाइन बिछाने जैसे चीजों के पीछे के तकनीकी पहलुओं को समझने की कोशिश की गई है. फिल्म में जहाजों के टूटने-फूटने, रिसने से लेकर उसकी आवाज तक के अंडरवाटर शॉट्स को रचने में कसर नहीं छोड़ी गई हैं.

रेणुका व्यवहारे (टाइम्स ऑफ इंडिया)

इस महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के विस्तार और सीमित संसाधनों के बीच ऐसी फिल्म बनाने के नए निर्देशक संकल्प रेड्डी की तारीफ होनी चाहिए. फिल्म देखने के बाद आप निर्देशक में थोड़ा बारीकी और अदाकारी में थोड़ी और अर्थ की चाहत रख सकते हैं. लेकिन संकल्प अपने किरदारों में गहराई लाते हैं.

रोहित भटनागर (डेक्कन क्रॉनिकल)

'द गाजी अटैक' वीकेंड पर अच्छी चॉइस है. हां, इसके आप बोर्डर, चक दे इंडिया, रंग दे बसंती या दंगल जैसी उम्मीद न रखें. इसे इस फिल्म की तकनीक और एक्टिंग के लिए देखें.

मयंक शेखर (मिडडे)

फिल्म का प्रोडक्शन अद्भुत है क्योंकि आप इसकी उम्मीद नहीं करते. हम भारत में ऐसी फिल्में नहीं बनाते. हालांकि विदेशों में ऐसी फिल्में कई वर्षों से बन रही हैं. हैदराबाद से आए संकल्प रेड्डी की यह पहली फिल्म है. उनसे आगे काफी उम्मीद रहेगी. फिल्म देखने लायक है.

कुणाल गुहा (मुंबई मिरर)

फिल्म में बहुत कुछ ऐसा है जो आपको 125 मिनट के लिए बांधे रखता है. गाजी अटैक इतिहास का ऐसा पन्ना है जिसे बड़े पर्दे पर देखा जाना चाहिए.

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