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Review फुकरे रिटर्न्स : ये फिल्म आपको देगी 'लाफ्टर' के रिटर्न गिफ्ट्स 

चूचा यानी वरुण शर्मा और पंकज त्रिपाठी की कॉमेडी ने फिल्म का मजा दोगुना कर दिया है

फ़र्स्टपोस्ट रेटिंग:

Abhishek Srivastava Updated On: Dec 08, 2017 12:50 PM IST

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Review फुकरे रिटर्न्स : ये फिल्म आपको देगी 'लाफ्टर' के रिटर्न गिफ्ट्स 
निर्देशक: मृगदीप लांबा
कलाकार: वरुण शर्मा, अली फ़ज़ल, ऋचा चड्ढा और पंकज त्रिपाठी 

फुकरे रिटर्न्स की समीक्षा के पहले ही मैं इस बात का खुलासा कर देता हूं कि पहली फुकरे मैंने नहीं देखी है. फिल्म देखते वक्त मेरे बगल में मीडिया जगत के एक दिग्गज बैठे थे और बड़े ही इन्फॉर्मल तरीके से जब उनसे फिल्म के बीच में छोटी सी गुफ्तगू हुई तब उन्होंने बड़े ही सहज अंदाज में इस बात को बताया कि फुकरे रिटर्न्स में हंसी की मात्रा पहली फिल्म से ज्यादा है.

उनकी बात और साथ ही मेरी सोच पर मुहर तब लग गई जब सिनेमा हॉल के अंदर हंसने की मात्रा कुछ ज्यादा ही सुनाई देने लगी. कई बार तो दौर ठहाकों का भी निकला. सच्चाई यही है कि फुकरे रिटर्न्स में आपको हंसने के ढेर सारे मौके मिलेंगे और लगभग दो घंटे की इस फिल्म को देखकर जब आप सिनेमाहाल से बाहार निकलेंगे तो आपके चेहरे पर हंसी होगी.

कहानी

फिल्म के शुरुआत में ही पुलकित सम्राट और वरुण शर्मा के ऊपर फिल्माया एक सीक्वेंस है जब पुलकित को सांप काट लेता है और फिल्म में उसके दोस्त बने वरुण सांप का जहर चूसकर निकालना शुरु कर देते हैं और बाद में उसी सांप के मानवी रुप के साथ वरुण नाचना शुरू कर देता है.

भले ही फिल्म मे ये एक ड्रीम सीक्वेंस है लेकिन इसका मतलब यही है कि फिल्म अपने इरादे शुरू में ही जाहिर कर देती है. यानी दर्शकों को एक तरह से चेतावनी मिल जाती है की अगर हंसना है या खुद का मनोरंजन करना है तो अक्ल लगाने की ज्यादा जरुरत नहीं है. मैंने अपनी अक्ल नहीं लगाई और बदले में मुझे हंसने के ढेर सारे मौके मिले.

कई फिल्में ऐसी भी होती हैं जो कॉमेडी होकर भी हंसा नहीं पाती लेकिन फुकरे रिटर्न्स के साथ ऐसा कुछ भी नहीं है. जो वादा फिल्म के सितारों ने प्रमोशन के दौरान किया था, उस वादे को निभाने में कामयाब भी हुए है.

फिल्म में एक और सीक्वेंस है जब चारों दोस्तों का बिजनेस ठप हो जाता है और लोगों को उनके पैसे ना देने के एवज में उनको अपनी जान बचाने के लिए यमुना में कूदना पड़ता है. उसके बाद जो कुछ भी होता है वो बेहद ही मजेदार है. इसके अलावा जब पंकज त्रिपाठी चूचा को एक बार फिर से भविष्य देखने के लिए दबाव डालते हैं तो उस सीक्वेंस में भी धमाल काफी होता है.

कहानी का मूल वही है जो पहली फिल्म में था यानी की चार दोस्तों की चौकड़ी और उनका धमाल मचाना. चूचा (वरुण शर्मा), लाली (मनजोत सिंह), जफ़र (अली फ़ज़ल)  और हनी (पुलकित सम्राट). यहां भी इनके कारनामे अजीबो गरीब होते हैं और इस बार भी उनके रास्ते का रोड़ा बनती है भोली पंजाबन (ऋचा चड्ढा). भोली पंजाबन जेल में अपनी सजा काट रही होती है और जेल से निकलने को बेताब है. उसको जेल से निकालने में मदद करते है मंत्री बाबूलाल भाटिया (राजीव गुप्ता) जो दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने का सपना संजोये हुए हैं.

बाबूलाल भाटिया एक भ्रष्ट मंत्री है जिसके कई अवैध धंधे भी चलते हैं जिनमें से प्रमुख है लाटरी. भोली को जेल से बाबूलाल रिहा तो करवा लेते हैं लेकिन इसकी कीमत होती है दस करोड़ रुपए. जब भोली दोस्तों की चौकड़ी से मिलती है तो अपनी पुरानी रंजिश कुछ समय के लिए भुलाकर उनकी मदद से वो पैसों की उगाही का काम उनसे करवाती है लेकिन जब चीज़ें उलट जाती हैं तब सब कुछ उल्टा हो जाता है.

एक्टिंग

इस फिल्म में अगर कोई सबसे ज्यादा उभरकर सामने आया है तो वो निश्चित रूप से वरुण शर्मा और पंकज त्रिपाठी हैं जो फिल्म में पंडित जी के रोल में नजर आएंगे और चांडाल चौकड़ी के लिए सलाहकार का काम भी करते है. बल्कि हम यूं कह सकते हैं कि अगर पूरी फिल्म में वरुण शर्मा छाये हुए हैं तो दूसरी ओर पंकज त्रिपाठी जब भी स्क्रीन पर आते हैं तब एक तरह की अलग गुदगुदी का एहसास होता है.

पंकज त्रिपाठी बेहतरीन कॉमेडी भी कर सकते हैं यह फिल्म इस बात को पूरी तरह से साबित करती है. अली फ़ज़ल, पुलकित सम्राट और मनजोत सिंह का काम साधारण है. भोली पंजाबन के किरदार में ऋचा चड्ढा को जितना खूंखार दिखना चाहिए था उतनी दिखी नहीं हैं. शायद इसके पीछे निर्देशक का यह उद्देश्य रहा होगा की इनसे कॉमेडी भी करवानी है. आखिर में इसकी कहानी को जिस तरह से कामनवेल्थ गेम्स के दौरान हुए घोटाले से जोड़ा गया है उससे कहानी को एक निश्चित अंत भी मिल जाता है.

डायरेक्शन

फुकरे रिटर्न्स के बारे  में हम यह नहीं कह सकते हैं कि यह एक बेहतरीन कॉमेडी फिल्म है इसका स्तर इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि जिन्होनें इस फिल्म में कॉमेडी की है उनका काम बेहद ही शानदार है. मृगदीप सिंह लांबा ने इस फिल्म का निर्देशन किया है और उनकी तारीफ़ करनी पड़ेगी जिस तरह से उन्होंने फिल्म का निर्देशन किया है.

उन्होंने फिल्म का निर्देशन काफी चतुराई से किया है और इस बात का खास ध्यान रखा है कि हंसने के मौके लोगों को मिलते रहें ताकि बाकी खामियों पर ध्यान काम जाए. फिल्म के स्क्रीनप्ले और डायलॉग में उनका साथ दिया है विपुल विग ने और मानना पड़ेगा कि उनके अंदर लोगों को हंसाने की खूबी है. खैर ज्यादा खामियां निकलने से मजा और किरकिरा हो सकता है. जाइए और दो घंटे लोटपोट होकर आइए.

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