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तनुश्री दत्ता और नाना पाटेकर का केस बॉलीवुड के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है

तनुश्री दत्ता ने जिस तरह नाना पाटेकर और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की करतूतों का पर्दाफाश किया है उससे जाहिर तौर पर कई पीड़ित लड़कियों को बोलने का साहस मिलेगा

Updated On: Oct 02, 2018 03:46 PM IST

Bharti Dubey

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तनुश्री दत्ता और नाना पाटेकर का केस बॉलीवुड के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है

अभिनेत्री तनुश्री दत्ता और अभिनेता नाना पाटेकर के बीच का विवाद इन दिनों सुर्खियों में बना हुआ है. इस विवाद के चलते बॉलीवुड इस वक्त दो धड़ों में बंटा नजर आ रहा है. कई लोग जहां तनुश्री दत्ता के समर्थन में उतर पड़े हैं. वहीं काफी लोग ऐसे भी हैं जो नाना पाटेकर का सपोर्ट कर रहे हैं. कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि तनुश्री-नाना विवाद के चलते पूरी इंडस्ट्री में खलबली मची हुई है.

ऐसे में बॉलीवुड को इंतजार है एक और ऐसी अभिनेत्री का जो सच बोलने का साहस दिखा सके. बॉलीवुड को इंतजार है एक अदद ऐसी अभिनेत्री का जो तनुश्री दत्ता के कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हो सके. जो रूपहले पर्दे के पीछे की कालिख को उजागर कर सके. जो फिल्म के सेट पर अपने साथ हुए किसी तरह के भेदभाव, बदसलूकी या यौन शोषण पर खुलकर बोल सके. क्या पुरुष प्रधान बॉलीवुड में कोई अभिनेत्री सामने आकर अपनी जुबान खोलेगी.

क्या कोई अभिनेत्री बॉलीवुड के उन छिछोरे और दिलफेंक लोगों के मुंह से नकाब नोंचने की हिम्मत दिखाएगी, जिन्होंने सभ्य इंसान का चोला ओढ़ रखा है?अतीत में कुछ अभिनेत्रियां बॉलीवुड में कास्टिंग काउच और यौन शोषण का मुद्दा उठा चुकी हैं. लेकिन उनके बयान और आरोप इतने सरसरी तौर पर थे कि उन्हें जुबानी जमा खर्च से ज्यादा कुछ और नहीं माना गया.

हॉलीवुड से शुरू हुए 'मी टू मूवमेंट' के बाद भी कुछ अभिनेत्रियों ने अपना मुंह खोला. लेकिन उन्होंने भी इशारों-इशारों में इल्जाम लगाए. सभी ने सीधे तौर पर किसी व्यक्ति विशेष का नाम लेने से परहेज किया. ऐसे में छिछोरे, दिल फेंक और विकृत मानसिकता वाले लोगों के खिलाफ 'मी टू मूवमेंट' बॉलीवुड में खास असरदार साबित नहीं हो पाई. लिहाजा हॉलीवुड की तरह यहां पर गुनहगारों को कठघरे में खड़ा नहीं किया जा सका.

तनुश्री का कहना है कि, "जिन लोगों ने मेरा समर्थन किया है, मैं उनकी सराहना करती हूं. मैंने उन लोगों के लिए मशाल थामी है जो पीड़ित हैं और डरे हुए हैं. मैं उन लोगों को रौशनी में लाना चाहती हूं जो खौफजदा हैं. मैं उन लोगों से कहना चाहती हूं कि अपने डर से बाहर निकलो. अपनी जुबान खोलो. इस चमत्कारी लम्हे को जाने न दो."

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नाना पाटेकर के वकील राजेंद्र शिरोडकर के बयान पर तनुश्री का कहना है कि, "मजे की बात यह है कि, 'मी टू' अभियान ने भारत में जहां डरकर खामोश बैठे लोगों को अपनी आवाज बुलंद करने का मौका दिया है, वहीं दूसरी तरफ नाना पाटेकर और उनके वकील देश के छिछोरों, लुच्चे-लफंगों और आदतन अपराधियों को यह सिखा रहे हैं कि, भविष्य के व्हिसिल ब्लोअर की आवाज बंद करने के लिए कानून व्यवस्था का इस्तेमाल कैसे किया जाए. ऐसे में नाना पाटेकर के बारे में मेरे सभी दावे अपने आप सही और सच्चे साबित हो जाते हैं. उन लोगों ने 10 साल पहले भी मेरे साथ ऐसा ही किया था....और हां....मैं अब भी नाना पाटेकर के कथित कानूनी नोटिस का इंतजार कर रही हूं."

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तनुश्री दत्ता को अपने साथ हुई कथित बदसलूकी और यौन शोषण का मुद्दा दोबारा उठाने में 10 साल का वक्त लग गया. यह घटना फिल्म 'हॉर्न ओके प्लीज' के सेट पर मीडिया के सामने हुई थी. एक दशक से ज्यादा वक्त बीत चुका है. लेकिन अभी तक तनुश्री को इंसाफ नहीं मिला है. जैसा कि तनुश्री ने  बताया कि, घटना की वजह से उन्हें न्यूयॉर्क में एक एनजीओ की नौकरी से हाथ धोना पड़ा. उनके माता-पिता को बहुत परेशान किया गया. यहां तक कि अपने कर्मचारियों का बकाया भुगतान पाने के लिए तनुश्री को फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एंप्लोईज (FWICE) की शरण में जाना पड़ा.

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अपने साथ हुई बदसलूकी के खिलाफ तनुश्री ने सिने एंड टेलीविजन आर्टिस्ट एसोसिएशन (CINTAA) का दरवाजा भी खटखटाया था. लेकिन नाना पाटेकर स्टारर फिल्म के सेट पर एक अभिनेत्री के साथ हुए दुर्व्यवहार पर एसोसिएशन ने कोई कार्रवाई नहीं की थी. तनुश्री का मानना है कि बॉलीवुड का रवैया अब भी नहीं बदला है. दस साल पहले ज्यादातर लोगों की जो सोच थी वह अब भी बरकरार है.

तनुश्री के मुताबिक, "बॉलीवुड में ज्यादा कुछ नहीं बदला है. अब भी चंद लोगों ने ही अपनी जुबान खोली है. यह वे लोग हैं जो सामाजिक रूप से सक्रिय हैं. यह लोग हर तरह के भेदभाव और बाधाओं के खिलाफ बहुत हिम्मत के साथ लड़े हैं. इन लोगों ने बहुत मेहनत से वह मकाम हासिल किया है जहां आज वे खड़े हैं. लेकिन वास्तव में वे लोग जो ताकतवर हैं और जो सत्ता में हैं, जिनके मुंह से निकला एक शब्द गहरा प्रभाव डाल सकता है. उन शक्ति संपन्न लोगों ने चुप्पी साध रखी है. कुछ अभिनेत्रियां जो भले ही टॉप पर न हों लेकिन उन्होंने अपनी आवाज उठाई है. उन्होंने मेरी बात का समर्थन किया है.

हालांकि इन सबके बदले उन्हें सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर ट्रोलिंग का शिकार होना पड़ रहा है. वहीं दूसरी तरफ वे लोग हैं जो टॉप पर हैं. जो सत्ता के केंद्र में हैं और ताकतवर हैं. जिन्होंने महिला सशक्तिकरण का झंडा थाम रखा है. लेकिन जब वास्तव में महिलाओं को सशक्त बनाने की बात आती है तब वे कुछ भी नहीं करते हैं. बॉलीवुड के बड़े नाम, जिनके पास बदलाव लाने की ताकत है, वे जुबान ही नहीं खोल रहे हैं. यही नहीं ये बड़े नाम लगातार उन गुनहगारों के साथ काम कर रहे हैं, जिन्होंने मेरे साथ बदसलूकी की थी."

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सोनम कपूर, प्रियंका चोपड़ा और ट्विंकल खन्ना जैसी अभिनेत्रियां कथित यौन उत्पीड़न के मुद्दे पर तनुश्री दत्ता को समर्थन दे रही हैं. वहीं प्रियंका चोपड़ा ने एक निर्देशक की प्रेमिका की वजह से एक फिल्म में रोल खोने के बारे में जिक्र करके इस मुद्दे को और हवा दे दी है. हालांकि प्रियंका चोपड़ा ने न तो उस निर्देशक के नाम का खुलासा किया है और न ही उसकी प्रेमिका के बारे में कोई जानकारी दी है. ऋचा चड्ढा, स्वरा भास्कर, राधिका आप्टे और अदिति राव हैदरी जैसी बॉलीवुड अभिनेत्रियां भी मी टू आंदोलन पर अपनी राय रख चुकी हैं. लेकिन राधिका ने अपने साथ ऐसी कोई भी घटना होने से इनकार किया.

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राधिका आप्टे ने कहा कि, "बॉलीवुड के लोगों को अपने साथ हुए दुर्व्यवहार पर जुबान खोलना चाहिए. मैं चाहती हूं कि यह सब जल्द से जल्द हो. लोगों को न बोलने की आदत डाल लेना चाहिए ताकि यह सब बकवास बंद हो सके. अगर बॉलीवुड में बदसलूकी और यौन शोषण को खत्म करना है तो लोगों को सामने आना होगा. उन्हें बेखौफ होकर अपने साथ हुई घटना का जिक्र करना होगा. जबकि दूसरे लोगों को उनका समर्थन करना होगा. यह अच्छी बात है कि लोगों ने अब इस मुद्दे के बारे में चर्चा करना शुरू कर दी है. लेकिन वे अभी भी खुले तौर पर सबके सामने आकर बात करने से परहेज कर रहे हैं.''

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अभिनेत्री ऋचा चड्ढा ने पिछले साल न्यूज एजेंसी पीटीआई को बयान दिया था कि, "बॉलीवुड में ज्यादती के शिकार हुए कलाकार डर की वजह से और काम छिन जाने के खौफ में शोषण या बदसलूकी करने वाले शख्स का नाम उजागर नहीं करते हैं. अगर आप जिंदगी भर के लिए मेरी पेंशन पक्की दें, मेरी और मेरे परिवार की सुरक्षा की गारंटी लें, यह सुनिश्चित करें कि फिल्मों और टीवी में मेरा काम करना जारी रहेगा या जो कुछ भी मैं करना चाहूं वह कर सकती हूं और किसी का नाम उजागर करने पर मेरा करियर तबाह नहीं होगा, तब मैं यकीनन किसी का नाम बताकर उसे शर्मिंदा कर सकती हूं. सिर्फ मैं ही नहीं, मेरे जैसे अनगिनत लोग ऐसा करने को तैयार हो जाएंगे. लेकिन सवाल यह उठता है कि, इतनी सारी गारंटी लेगा कौन?"

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ऐसा लगता है कि, शोषण की कोशिश करने वाले लोगों के खिलाफ अपना मुंह खोलने से पहले अभिनेत्रियां अपने करियर और काम को पुख्ता कर लेना चाहती हैं. वास्तव में बॉलीवुड अभी भी महिलाओं को स्वीकार करने और उन्हें बराबर का दर्जा देने के लिए तैयार नहीं है. उन लोगों के लिए बॉलीवुड के दरवाजे बंद होने में ज्यादा देर नहीं लगती है, जो शोषण और बुरे बर्ताव पर अपनी जुबान खोलते हैं. जैसे ही यह लोग किसी के खिलाफ कुछ बोलते हैं, उन्हें काम मिलना बंद हो जाता है.

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तनुश्री का कहना है कि, "हमारी कानून व्यवस्था ऐसी है कि अपराधी उसका जमकर फायदा उठाते हैं. हमारे यहां एक ऐसा राजनीतिक दल है, जो मॉब लिंचिंग के लिए जाना जाता है. इस राजनीतिक दल के लोग खुलेआम मनमानी करते हैं. लेकिन कोई भी उन्हें छू नहीं सकता है. क्योंकि उन्होंने मराठी मानुष नाम का रक्षा कवच पहन रखा है. लोग कम्यूनिटी कार्ड खेलकर (सामुदायिक भावनाएं भड़काकर) साफ बचकर निकल जाते हैं. ऐसे में कोई आंदोलन कैसे शुरू हो सकता है. कोई आंदोलन तभी शुरू हो सकता है जब इंसाफ का राज हो. लेकिन हमारा देश इंसाफ का सम्मान ही नहीं करता है. इंसाफ का राज तो सिर्फ संयुक्त राज्य अमेरिका में संभव है. क्योंकि वहां कानून व्यवस्था बहुत सख्त है.

अमेरिका में कई ऐसे उदाहरण हैं कि, किसी घटना या हमले की 10 साल बाद शिकायत दर्ज की गई. कोई गवाह या ठोस सबूत नहीं होने के बावजूद आरोपी/गुनहगार को कठघरे में खड़ा किया गया. और आखिरकार पीड़ित को इंसाफ मिला. लेकिन हमारे देश में अगर कोई महिला घटना के खिलाफ आवाज उठाती है, तो लोग पलटकर उस महिला को ही दोषी ठहरा देते हैं. उस महिला के चरित्र पर सवाल उठाए जाने लगते हैं. जब तक न्याय व्यवस्था का सहयोग नहीं मिलेगा तब तक कोई आंदोलन कैसे शुरू होगा और कैसे कामयाब होगा. लेकिन यहां भारत में तो पीड़ित का ही उत्पीड़न हो जाता है.''

फिल्म इंडस्ट्री का एक वर्ग और बड़ी तादाद में आम लोग तनुश्री के आरोपों और दावों की टाइमिंग पर सवाल उठा रहे हैं. लिहाजा तनुश्री पर पब्लिसिटी स्टंट करके तवज्जो और हमदर्दी पाने के लिए हथकंडे अपनाने के आरोप लगाए जा रहे हैं.

लेकिन तनुश्री ने इस सभी आरोपों को खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा, "मी टू आंदोलन की भारत में सख्त जरूरत है. इस आंदोलन के लिए मौजूदा वक्त पूरी तरह से माकूल है. इसके अलावा लोग कितनी आसानी से यह बात भूल गए हैं कि, मैं इस मुद्दे पर पिछले 10 साल से बात करती आ रही हूं. मेरी मंशा पर शक करके और टाइमिंग पर सवाल खड़े करके मुद्दे के मुख्य बिंदु से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है."

"बीजेपी की नेता, फैशनडिजायनर और एक्टिविस्ट साइना एन सी ने तनुश्री समेत बाकी लड़कियों को सलाह दी है कि वो ऐसे मुद्दों को तुरंत लोगों के समाने लाएं क्योंकि जांच एजेंसियों को सबूत जुटाने में मदद मिल सके और सही तौर पर न्याय मिल सके"

तनुश्री दत्ता ने आगे कहा कि, "सार्वजनिक रिकॉर्ड उठाकर देख लीजिए, मैं पिछले एक दशक से लगातार अपने साथ हुई बदसलूकी के खिलाफ बोलती आ रही हूं. यह मीडिया और जनता की मेहरबानी है कि उन्होंने इस मुद्दे को हवा देने के लिए यह वक्त चुना. शायद ऐसे मुद्दों पर जागरूकता के लिए लोगों की सामूहिक चेतना बढ़ रही है. इसके अलावा पीड़ित होने के बावजूद मेरी प्रतिष्ठा को बार-बार और लगातार ठेस पहुंचाई गई.

तमाम कठिनाइयों और विषमताओं से जूझकर फिर से खड़े होने और खुद का बचाव करने के लिए कभी भी देर नहीं होती है. मुझे यकीन है कि मेरी इस बात से कोई असहमत नहीं होगा. उन्हें अपने कर्मों का फल मिलने का वक्त आ गया है. उन्होंने बहुत झूठ बोल लिया. बहुत मनोवैज्ञानिक छल-कपट कर लिया. अब उनका पर्दाफाश हो चुका है. लोग उनकी असलियत पहचान गए हैं. इस कहानी का यही सबसे दिलचस्प पहलू है.''

फिल्ममेकर विनीता नंदा के मुताबिक तनुश्री दत्ता जिस बारे में बात कर रही है, व्यक्तिगत रूप से मैं भी उनकी गवाह और पीड़ित रही हूं. अपने साथ हुए दुर्व्यवहार पर मुंह खोलने पर तनुश्री के साथ जो हो रहा है वह शर्मनाक है. यही कारण है कि हम में से कई लोग अपना मुंह नहीं खोलते हैं. मीडिया तनुश्री से पूछ रही है कि, उसने 10 साल बाद यह मुद्दा फिर से क्यों उठाया है?

वह इस मुद्दे को अब खत्म करना चाहती है, क्या आप लोग इतनी सी बात नहीं समझ पा रहे हैं. यह उसका वाजिब अधिकार है. क्या आपने कभी ऐसे लोगों के बारे में नहीं सुना है, जिन्होंने अपनी जिंदगी के आखिरी लम्हों के दौरान मौत के बिस्तर पर अपने जीवन की गहरी सच्चाई को बयां किया हो?

कई साल पहले जब मैंने अपनी आवाज बुलंद की थी, तो पता है मेरे बारे में क्या अफवाहें फैलाई गई थीं?  तब कहा गया था कि मैं अटेंशन सीकर हूं, लोगों की तवज्जो पाना चाहती हूं. बॉलीवुड में जहां सितारों की भरमार हो वहां इस लेखक को नोटिस करने वाला कौन होगा?

जाहिर है, बॉलीवुड में जो मुंह खोलता है, उसे खारिज करके बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है. महिलाओं, मैं आप लोगों से आह्वान करती हूं कि बाहर निकलो. चाहे कितने भी साल बीत चुके हों लेकिन अपनी आवाज बुलंद करो. उन लोगों को बेनकाब करो जिन्होंने आपसे बदसलूकी की या आपका शोषण किया. भले ही वे लोग मर कर खाक हो चुके हों.

उन घृणित पुरुषों से कहीं पर मुलाकात हो जाना एक भयानक एहसास है. वे अक्सर इंडस्ट्री के किसी फंक्शन या पार्टियों में नजर आ ही जाते हैं. उनमें से कई बूढ़े हो चले हैं. लेकिन वे अब भी उतने ही लंपट और कामुक नजर आते हैं जितना की उस वक्त थे जब उन्होंने आपके स्वाभिमान को रौंदने की कोशिश की थी.

आपके साथ हुई बदसलूकी/शोषण को भले ही कितने ही साल गुजर जाएं, लेकिन आपके जहन में उसकी याद हमेशा ताजा रहती है. यह याद उस उबकाई की तरह होती है जो किसी मुर्दाघर में जाने पर महसूस होती है.

(लेखक एक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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