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महिला दिवस स्पेशल : बॉलीवुड की महिलाओं को अबला ना समझना

इंटरनेशनल वुमन्स डे पर दमदार एक्ट्रेसेस के काम को बॉलीवुड का सलाम

Updated On: Mar 08, 2017 12:05 PM IST

Hemant R Sharma Hemant R Sharma
कंसल्टेंट एंटरटेनमेंट एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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महिला दिवस स्पेशल : बॉलीवुड की महिलाओं को अबला ना समझना

पुरुष प्रधान फिल्मों के बीच पिछले कुछ सालों में कई अभिनेत्रियों ने परदे पर अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है. अनुष्का शर्मा, कंगना रनौत, रानी मुखर्जी और सयानी गुप्ता जैसी अभिनेत्रियों ने अपने किरदारों से दर्शकों के एक बड़े वर्ग को इंस्पायर भी किया है.

यही वजह है इन दिनों महिला प्रधान फिल्मों की संख्या में जबरदस्त वृद्धि देखी जा रही है. बहरहाल वुमन्स डे पर आपको रुबरु करवाते हैं हिंदी सिनेमा के कुछ दमदार अभिनेत्रियों से जिन्होंने पर्दे पर महिलाओं के स्टेटस को काफी मजबूती से पेश किया

anushka-sharma-nh10

अनुष्का शर्मा : एनएच 10 में अनुष्का शर्मा ने दर्द सहती हुई, खून से सनी, हिम्मत नहीं हारने वाली मीरा के किरदार को बेहतरीन तरीके से जिया है. उनकी आंखों में बदला लेने की चमक साफ देखने को मिलती है. इस फिल्म का जो परिवेश है और उस परिवेश में महिलाओं की जो स्थिति है उसमें अनुष्का का ये किरदार सामजिक स्थिति को बदलने के लिए प्रेरक साबित हो सकती है.

Richa-Chadha-Fukrey

ऋचा चड्ढा : फिल्म "फुकरे" में ऋचा चड्ढा ने भोली पंजाबन के निगेटिव किरदार के जरिये हिंदी फिल्मों में विलेन की नयी परिभाषा गढी. ये किरदार जितना फनी था उतना ही मजबूत भी. क्राइम की दुनिया में महिला डॉन का दबदबा भले ही नयी कल्पना नहीं है लेकिन सेक्सी डॉन दर्शकों के लिए एक दिलचस्प अनुभव साबित हुआ.

Rani Mukherjee- Mardaani

रानी मुखर्जी : मर्दानी में रानी मुखर्जी द्वारा निभाया गया पुलिस इन्स्पेक्टर का किरदार सहज और सामान्य होने के बावजूद सशक्त है. इस फिल्म में नारी को लेकर  परंपरागत सोच को वास्तविकता के साथ पेश किया गया. रानी मुखर्जी ने उतनी ही सादगी से अपने किरदार को याद रखने लायक बना दिया.

Sayani Hupta- Margarita with a straw

सयानी गुप्ता : मार्गेरिटा विद ए स्ट्रॉ में सयानी गुप्ता के लेस्बियन किरदार के जरिये फिल्मों में नारी की मजबूत होती स्थिति को बेबाकी से पेश किया गया. भले ही इस नजरिये से दर्शक ज्यादा प्रभावित नहीं हुए लेकिन सयानी का ये किरदार आज की युवा पीढ़ी के लिए इंस्पायरिंग फैक्टर का काम करने का दमखम रखती है.

Taapsee Pannu- Pink

तापसी पन्नू : तापसी पन्नू ने शुजीत सरकार की फिल्म "पिंक" में एक ऐसे मुद्दे को उठाया जिसके बारे आज का समाज में सोचने तक  को राजी नहीं है. ये तापसी का ही कमाल था कि फिल्म को एक बड़े दर्शक वर्ग द्वारा ना केवल सराहा गया बल्कि समाज अपनी ही मान्यताओं को लेकर खुद ही कठघरे में खड़ा नजर आया. 'पिंक' की सफलता ये साबित करती है कि आज का समाज अपनी बुजुर्वा सोच के साथ इत्तेफाक नहीं रखता. इस सोच की स्वीकृति का क्रेडिट तापसी को भी मिलना ही चाहिए.

Vidya Bala - Kahaani

विद्या बालन: फिल्म कहानी में विद्या बालन ने अपने किरदार के जरिये महिला शक्ति का  पाठ बखूबी  पढ़ाया. हालात मुसीबतों से निकलने का सबक खुद ही देता है. विद्या ने इस फिल्म के जरिये इस सीख को और मजबूत कर दिया.

Kangana- Queen

कंगना : कंगना रनौत द्वारा फिल्म क्वीन में निभाया गया किरदार एक तरह से जड़ मान्यताओं के खिलाफ फूंका गया एक बिगुल है. इस किरदार के जरिए एक ऐसी मानसिकता को चुनौती दी गयी जिससे बड़ी आबादी आज भी ग्रस्त है. इस फिल्म ने बॉलीवुड में कंगना की स्थिति को इतना मजबूत बना दिया कि कई फिल्ममेकर अब कंगना के कंधे पर पूरी फिल्म रखने का जोखिम उठाने से भी डरते नहीं हैं.

Madhuri- Gulab Gang

माधुरी दीक्षित : धक-धक गर्ल माधुरी दीक्षित के असली कैलिबर से दर्शक फिल्म गुलाब गैंग के जरिये ही परिचित हुए. फिल्म में घरेलू हिंसा और सामाजिक विषमता के बीच असहाय नारी की स्थिति को अच्छी तरह रेखांकित किया गया. लेकिन साथ ही वुमन पावर को जितने सशक्त तरीके से इस फिल्म में पेश किया गया वो काम फिल्मों में ही देखने को मिलता है.

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