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बॉलीवुड का ‘मासूम’ सा ‘मिस्टर इंडिया’

मशहूर फिल्मकार शेखर कपूर 6 दिसंबर को सत्तर साल के हो गए हैं.

Updated On: Dec 06, 2016 08:23 PM IST

FP Staff

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बॉलीवुड का ‘मासूम’ सा ‘मिस्टर इंडिया’

मशहूर फिल्मकार शेखर कपूर 6 दिसंबर को सत्तर साल के हो गए हैं. चार दशक के सिनेमाई सफर में शेखर कपूर हिंदी सिनेमा को कई यादगार फिल्में दे चुके हैं. शेखर कपूर का निर्देशन जीवन के यथार्थ को सिनेमाई पर्दे पर उतारने के लिये जाना जाता है. शेखर की यही खासियत उन्हें सात समंदर पार भी एक पहचान दे गई.

हरफनमौला शेखर 

कभी उन्होंने बीहड़ों के डरावने सन्नाटे में दस्यु सुंदरी फूलनदेवी पर कहानी तैयार की तो कभी ‘मासूम’ जैसी भावनात्मक कहानी को कैमरे में उतारा. उनका निर्देशन किसी एक धारा की दिशा में कभी बहा नहीं.

पर्दे से ‘मिस्टर इंडिया’ का गायब होना बच्चों के लिये रोमांचक था तो ‘मोगेम्बो खुश हुआ’ जैसे डायलॉग लोगों की जुबान पर चढ़ता चला गया.

'बैंडिट क्वीन' के बाद शेखर कपूर को हॉलीवुड फिल्म 'ऐलिजाबेथ' के निर्देशन का अवसर मिला. यह फिल्म ऑस्कर पुरस्कार से सम्मानित की गई. वर्ष 2007 में इस फिल्म के सीक्वल 'एलिजाबेथ द गोल्डन एज' का भी शेखर कपूर ने निर्देशन किया. इन सबके बीच शेखर कपूर ने हॉलीवुड फिल्म 'द फोर फीदर्स', 'न्यूयॉर्क आइ लव यू' और 'पैसेज' का निर्देशन भी किया.

चुनिंदा फिल्मों की छोटी सी फेहरिस्त भी शेखर कपूर को बड़ा नाम दे गई. 'एलिजाबेथ : द गोल्डन ऐज', 'बैंडिट क्वीन', 'मिस्टर इंडिया', 'द फोर फीदर्स', 'मासूम', 'टूटे खिलौने', 'इश्क-इश्क' और 'बिंदिया चमकेगी' जैसी हिट फिल्में शेखर की कामयाबी का पता देती हैं.

शुरुआती सफर 

शेखर कपूर का जन्म 6 दिसंबर 1945 को लाहौर में हुआ था. डॉक्टर फैमिली में जन्मे शेखर कपूर ने दिल्ली के मॉडर्न स्कूल से पढ़ाई के बाद सेंट स्टीफेंसन कॉलेज से इकॉनॉमिक्स में ग्रेजुएट किया. शेखर अगर फिल्मों में नहीं आते तो उनकी पहचान चार्टर्ड अकाउन्टेंट के रूप में होती. लंदन में शेखर चार्टर्ड अकाउंटेंट के तौर पर कुछ समय काम करते रहे.

1975 में उनका हिंदी सिनेमा में कदम रखना नए दौर के निर्देशकों की पटकथा का एक कामयाब किरदार बना. अभिनेता देवानंद उनके मामा थे जिस वजह से उन्हें बॉलीवुड अपनी तरफ खींचने में कामयाब रहा. फिल्म ‘जान हाज़िर है’ से उन्होंने बतौर एक्टर शुरुआत की. बाद में ‘टूटे खिलौने’ में भी अभिनय किया.

लेकिन शेखर के भीतर एक निर्देशक किसी कोने में छुपा हुआ था. साल 1983 में फिल्म ‘मासूम’ से निर्देशन की शुरुआत की. फिल्म ‘मासूम’ हिट रही और बेस्ट फिल्म का फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवार्ड भी मिला. लेकिन शेखर अपनी ही फिल्मों को लेकर दर्शकों के मिथ तोड़ने के लिये जाने जाते हैं. उन्होंने लीक से हटकर ‘मिस्टर इंडिया’ जैसी फिल्म दर्शकों के सामने पेश की. शेखर का नया प्रयोग दर्शकों को बेहद पसंद आया.

उतार-चढ़ाव भरी निजी जिंदगी

पर्दे की चकाचौंध से दूर शेखर कपूर की निजी जिंदगी में रिश्तों के उतार-चढ़ाव से अवसाद का अंधेरा भी गहराया. शेखर कपूर की पहली शादी मेधा जलोटा से हुई थी लेकिन बाद में अलगाव हो गया. बाद में उनकी पत्नी का अमेरिका में न्यूजर्सी में निधन हो गया. उनकी दूसरी शादी सुचित्रा कृष्णमूर्ति के साथ हुई. उनकी एक बेटी है जिसका नाम कावेरी कपूर है.

सुचित्रा कृष्णमूर्ति भी अभिनेत्री रह चुकी हैं. शेखर ने सुचित्रा को भी निर्देशन की बारीकियां सिखाईं. अब इन दोनों की बेटी कावेरी ने अपना पहला गाना 'डिड यू नो' डिजिटल प्लेटफार्म यूट्यूब पर लांच किया है.

शेखर कपूर अब यशराज के बैनर की फिल्म 'पानी' का निर्देशन कर रहे हैं. इस फिल्म में आने वाले वक्त में पानी की कमी से होने वाली तबाही की कल्पना को उतारा गया है. फिल्म का संगीत ए.आर.रहमान तैयार करेंगे.

जिंदगी के सात दशक के पड़ाव को शेखर पार कर चुके हैं. लेकिन उम्र के इस मोड़ पर भी वो अपने दर्शकों को कुछ नया और वास्तविक देने का जज्बा रखते हैं.

 

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