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Photos : शाहरुख खान ने रो-रोकर सुनाईं कुंदन शाह की कहानियां

कुंदन जी ने मुझे कहा था कि मुझे एक्टिंग नहीं आती और वो मेरे साथ काम नहीं करेंगे फिर कभी उन्होंने मेरे साथ काम नहीं किया

Akash Jaiswal Updated On: Oct 11, 2017 12:17 PM IST

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Photos : शाहरुख खान ने रो-रोकर सुनाईं कुंदन शाह की कहानियां

मुंबई में कल बॉलीवुड के चहेते फिल्मकार कुंदन शाह की प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया जहां शाहरुख खान, नसीरुद्दीन शाह, डेविड धवन, विजय कृष्णा आचार्य जैसी कई सारी नामचीन हस्तियां पहुंची. इस सभा मैं शाहरुख ने अपने बीतें दिनों को याद करते हुए कुंदन को धन्यवाद दिया और उनकी आत्मा के शांति की प्रार्थना की.

शाहरुख ने कहा, “वो एक बहुत अच्छे इंसान थे. उनके प्यार को इजहार करने का तरीका बहुत अलग था और वो हम सभी से प्रेम करते थे. उनका चले जाना मेरी जिंदगी के सबसे बड़े नुकसानों में से एक है.”

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अपने करियर की शुरूआती दिनों को याद करते हुए शाहरुख ने कहा, “मैं 25 साल का था जब मुंबई आया. मैं कुंदनजी के घर में रहा हूं और उस समय उनके ही परिवार ने मुझे खाना खिलाया था और मेरा ख्याल रखा था. जब मैं दिल्ली गया तब मेरे थिएटर के कुछ दोस्तों ने मुझसे कहा कि जब तुम कुंदनजी से मिलना तब उनके पैर छू कर उन्हें गले से लगा लेना और उन्हें बताना कि हम सब उन्हें कितना प्यार करते हैं.

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आगे शाहरुख ने कहा, “आज मैं जो हूं वो मैं उनके उनकी सीख और प्यार की वजह से हूं”

शाहरुख ने बताया कि एक अभिनेता के तौर पर किस तरह कुंदन ने उन्हें सख्ती से काम सिखाया. उन्होंने कहा, “वो मुझे कहते थे तुझे कुछ नहीं आता, तू पत्थर है पत्थर. वो मुझे इसी तरह से आकर टोकते थे थे और मुझे 100 रीटेक्स भी देने पड़े थे तब कहीं जाकर मैं पास हुआ था.

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मैंने उनसे पूछा कि क्या अब ठीक है? तब उन्होंने कहा तुझे एक्टिंग नहीं आती मैं अब तेरे साथ काम नहीं करूंगा. वो लम्हा मैं हमेशा मिस करता हूं क्योंकि उसके बाद कुंदन ने मेरे साथ कभी काम नहीं किया. वो बहुत ही सच्चे इंसान थे. मैं खुशकिस्मत हूं कि 6 महीने पहले मैं उन्हें एक बुक लॉन्च पर मिला और उनके साथ टाइम स्पेंड किया.

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शाहरुख ने बताया कि उनके पास तीन फिल्मों के साइन किए हुए पोस्टर्स हैं. एक मुगल ए आजम का जिसे दिलीप कुमार ने साइन किया है और दूसरा फिल्म ‘जाने भी दो यारों’ का है. एक हफ्ते पहले ही मैंने अपनी पत्नी से कहा था कि मैं इसे कुंदनजी से जाकर साइन करवा लूंगा. लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण कुंदन हमें उससे पहले ही छोड़ गए. लेकिन उनकी यादें अक्सर मेरे मन में आती रहेंगी जब उन्होंने मुझे खाना खिलाया और कहा था कि मैं कितना बुरा हूं और अच्छा काम नहीं कर सकता. इसी तरह से मेरी मां भी मुझे कहती थीं. मेरी कुंदनजी को अपनी मां की तरह ही मिस करूंगा.”

 

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