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Race 3 review: इस बार सलमान खान की ईदी उनके चाहने वालों को नहीं मिलेगी

इस फिल्म के बदले आप ईद के दिन सलमान और शाहरुख के फिल्म जीरो का ट्रेलर लूप में देख लीजिए

फ़र्स्टपोस्ट रेटिंग:

Updated On: Jun 15, 2018 04:39 PM IST

Abhishek Srivastava

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Race 3 review: इस बार सलमान खान की ईदी उनके चाहने वालों को नहीं मिलेगी
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निर्देशक: रेमो डीसूजा
कलाकार: सलमान खान, अनिल कपूर, बॉबी देओल, साकिब सलीम, डेजी शाह, जैकलीन फर्नांडीज

 

‘रेस 3’ बनाने के पीछे सिर्फ एक ही मकसद दिखाई देता है और वो है सलमान खान के सुपरस्टारडम को हर एंगल से दिखाने का. रेस सीरीज की फिल्मों का सबसे बड़ा फायदा ये है कि फिल्म के क्लाइमेक्स को आप अपने अंदाज में किसी भी तरह से ढाल सकते हैं. शिराज अहमद की कहानी अब बोर करने लगी है. ‘रेस 3’ का डीएनए वही है जो हमने ‘रेस’ और ‘रेस 2’ में देखा था-घरवाले और उनके करीब बाहर वाले डबल क्रॉस की किस हद तक जा सकते हैं. इंटरवल के ठीक पहले फिल्म का पहला ट्विस्ट नजर आता है और तब यही कहने का मन करता है कि यार अब बस करो. रिमो डीसूजा की ये फिल्म एक बेहद ही औसत दर्जे की फिल्म है जिसकी कहानी सिनेमैटिक लिबर्टी के नाम पर चलती है और इसकी असल कहानी गायब है. इस फिल्म में मसालों की भरमार है और लॉजिक को कहीं कोने में बांध कर रख दिया गया है. इस फिल्म को देखना दिन के तीन घंटे बर्बाद करने के बराबर है.

कहानी इस बार एक शस्त्रों के कारोबार मे लिप्त एक परिवार की है

फिल्म की कहानी शमशेर सिंह (अनिल कपूर) के बारे में है जो अल शिफा आईलैंड पर अपने असलहों की फैक्टरी चलाते हैं. संजना (डेजी शाह) और सूरज (साकिब सलीम) उनके दो बच्चे हैं और सिकंदर (सलमान खान) उनका सौतेला बेटा है. शमशेर सिंह अपने सभी बच्चों पर जान छिड़कते हैं लेकिन जब वो अपने जायदाद का 50 फीसदी हिस्सा सिकंदर के नाम कर देते हैं तब संजना और सूरज के अंदर जलन पैदा हो जाती और परेशानी वहीं से शुरू होती है. सिकंदर का बॉडीगार्ड और जिगरी दोस्त यश (बॉबी देओल) है जो उसके लिए अपनी जान भी दे सकता है. जेसिका (जैकलीन फर्नांडीज) जब सिकंदर और यश को अपने प्रेम जाल में फास लेती है तब कहानी का रुख बदल जाता है. आगे चल कर पता चलता है कि जेसिका, संजना और सूरज की ही मोहरा थी. एक हंसते खेलते परिवार पर बुरी नजर लग जाती है. इंटरवल के बाद सब कुछ बदल जाता है जिसका खुलासा करना ठीक नहीं होगा.

कई कहानियों का ताना-बाना आपको कंफ्यूज करेगा

‘रेस 3’ से मेरी सबसे बड़ी परेशानी इसकी कहानी को लेकर है. कई कहानियां एक साथ चलती है इस फिल्म में. इस फिल्म में आपको अनिल कपूर के घर की कहानी देखने को मिलेगी, इस फिल्म में जैकलीन फर्नांडीज, सलमान खान और बॉबी देओल का अलग ट्रैक मिलेगा और रही सही कसर एक और ट्रैक पूरा कर देता है जहां पर कुछ नेताओं के उनके अश्लील तस्वीरों पर उनको ब्लैकमेल करने की कहानी भी बताई गई है. फिल्म देख कर यही लगता है कि रेमो एक कहानी कहना चाहते थे या फिर ‘रेस 3’ की कहानी को ‘रेस’ और ‘रेस 2’ के मॉड्यूल में फिट करना चाहते थे. नतीजा वही है-ढाक के तीन पात. रेमो किसी भी कहानी के साथ ठीक से न्याय नहीं कर पाते हैं और सस्पेंस और ‘रेस 3’ के माड्यूल के चक्कर में उलझे हुए दिखाई देते हैं.

एक्शन और अनिल कपूर ही इस कमजोर फिल्म के जान हैं

ऐसी फिल्म जिसमें एक्शन सीन्स को ज्यादा महत्व दिया जाता है, उन फिल्मों में अभिनय की गुंजाईश कम ही रहती है. ‘रेस 3’ भी इस मामले में कोई अपवाद नहीं है. सलमान खान से आप रिफाइंड एक्टिंग की उम्मीद नहीं लगा सकते हैं वो हर फिल्म में वही करते हैं जिसकी उम्मीद उनके फैंस को रहती है और उस मामले में उन्होंने अपने फैंस को निराश नहीं किया है. बॉबी देओल एक लम्बे अरसे के बाद नजर आए हैं और थोड़े सुधरे हुए दिखाई देते हैं. जब भी साकिब सलीम और डेजी शाह परदे पर आते हैं उनके अभिनय से चिड़चिड़ापन महसूस होता है. जैकलीन फर्नांडीज ने फिल्म में ग्लैमर का तड़का दिया है और उनके एक्शन सीन्स पर सीटियां पड़ेंगी. अलबत्ता किसी को स्क्रीन पर देखने पर खुशी महसूस होती है तो वो एक बार फिर से हमेशा की तरह अनिल कपूर ही हैं. अनिल कपूर की वजह से फिल्म में जान दिखाई पड़ती है. अब ‘रेस 3’ का जॉनर ही ऐसा है कि किसी एक को विलेन करार देना गलत होगा. सच ये है कि फिल्म के अधिकतर कलाकार स्लीप वाक करते हुए फिल्म में नजर आते हैं.

 अगर आपको ठहाका लगाना है तो फिल्म के डायलॉग सुनिए

‘रेस 3’ को देखते वक़्त आपको एक बात का ध्यान रखना पड़ेगा कि इस फिल्म को आप माइक्रोस्कोप की नजरों से न देखें. अगर ये गलती आपने की तो मुमकिन है कि फिल्म शुरू होने के दस मिनट के बाद आपकी रूचि इस फिल्म से पूरी तरह से खत्म हो जाएगी. इस फिल्म के डायलॉग किरण कोटरियाल ने लिखे हैं और दाद देनी पड़ेगी की ये इतने बुरे हैं कि आधे घंटे के बाद ये आपको अच्छे लगने लगेंगे. आवर बिजनेस इज आवर बिजनेस, नन ऑफ योर बिजनेस, दिल के बदले डेल को खोलो, दे डोंट मेक मेन लाईक यू एनीमोर-ये सभी आपको एक साथ हसाएंगे और रुलाएंगे भी. इस फिल्म में अगर कुछ देखने लायक है तो वो है इस फिल्म का ग्रैंड कैनवास और इसके एक्शन सीन्स. फिल्म के निर्माता ने इन सभी के ऊपर दिल खोल कर पैसा खर्च किया है. अगर इतनी ही शिद्दत फिल्म को लिखते वक्त दिखाई गई होती तो ‘रेस 3’ का रंग-रूप अलग होता यानि कि एक ऐसी फिल्म जिसे देखा जा सकता था. मेरी तो ये सलाह होगी कि इस फिल्म के बदले आप ईद के दिन सलमान और शाहरुख के फिल्म जीरो का ट्रेलर लूप में देख लीजिए. इसको देखना जबर्दस्त सर दर्द को दावत देने के बराबर है.

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