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Sacred Games : बॉलीवुड में एक नए युग की शुरुआत का 'गेम चेंजर'

अमेरिकन टीवी का सुनहरा दौर अब इंडिया में भी आने वाला है, इस बदलाव के साक्षी बनेंगे आप

Abhishek Srivastava Updated On: Jul 18, 2018 07:15 PM IST

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Sacred Games : बॉलीवुड में एक नए युग की शुरुआत का 'गेम चेंजर'

हिंदी भाषा में बनी स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स की पहली पेशकश सेक्रेड गेम्स ने एक तरह से बहस का सिलसिला शुरू कर दिया है जिसकी आंच आने वाले समय में भी लोगों को झुलसाती रहेगी. मुंबई शहर की विभीषिका को बड़े ही करीब से दर्शाने वाली ये सीरिज जिस दिन से नेटफ्लिक्स पर लांच हुई थी, उसी दिन से अब तक सुर्खियों में बनी हुई है.

शुरुआत हुई थी इसके डायलॉग और फ्रंटल न्यूडिटी वाले सीन्स पर और अब मामला पहुंच गया है राजीव गांधी तक जिसको लेकर कुछ लोग अदालत का दरवाजा खटखटा रहे हैं. जी हां ये सीरिज मुंबई की कहानी कहने के लिए देश की कुछ एक बड़ी घटनाओं का भी सहारा लेती है और उसी कड़ी में बोफोर्स का मुद्दा भी शामिल है.

कहने को तो बोफोर्स और राजीव गांधी की बात सीरिज में पासिंग अंदाज में कही गई है लेकिन बात वहीं पर रुक जाती है कि जिनको तूल देना है वो तो कहीं से कुछ भी उखाड़ लेंगे. बहरहाल सेक्रेड गेम्स इन सबके अलावा जिस वजह से चर्चा में है वो है इसके प्रेजेंटेशन और अभिनय के अंदाज को लेकर. इस बात में कोई शक नहीं है की ऐसी चीज़ से हिंदुस्तानी के दर्शक पहली बार रूबरू हो रहे हैं. देखते वक्त मानो यही लगता है कि आप छह घंटे की कोई शानदार हिंदी फिल्म देख रहे हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार इसको देखने के लिए आपको पास के सिनेमा हाल नहीं बल्कि महज अपने घर के बेडरूम तक ही सफर तय करना है. सीरिज़ के मुख्य सितारे सैफ अली खान और नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी के बारे में ये भी कहा जा रहा ही कि ये उनके करियर का सबसे उम्दा परफॉरमेंस है.

सेंसर बोर्ड की वजह से सेक्रेड गेम्स का एक फिल्मी रुप लेना असंभव था

पहले दिन से इस सीरिज़ के बारे में ऐसा कहा जा रहा है कि ये एक तरह का गेम चेंजर है और ये कहीं से भी गलत नहीं है. इस बात में कोई शक नहीं कि अगर नेटफ्लिक्स के पहले विक्रम चंद्रा की लगभग 800 पन्नों वाली किताब के ऊपर आधारित इसको अगर कोई निर्माता या निर्देशक रुपहले पर्दे पर लाने की कोशिश करता तो ये बात तय है कि शायद ये कभी भी मुमकिन नहीं हो पाता. इसकी वजह कई हैं. इस किताब के किरदारों के संवाद ऐसे हैं जिसे सुनकर आपको बहुत बड़ा झटका लग सकता है. गाली मुंह से ऐसे निकलती है मानो ये किरदारों के रोज़मर्रा जिंदगी के बोलने का ही तरीका है.

ये तो रही बात इसके संवाद की इसके अलावा आपको इसमें फ्रंटल न्यूडिटी के भी प्रचुर मात्रा में दर्शन होंगे. कुल मिलकर सार यही यही है की दर्शकों तक पहुंचने के पहले ही अगर इसके ऊपर कोई फिल्म बनती तो फिल्म की सेंसर बोर्ड में ही अकस्मात मौत हो जाती. जिस अंदाज में इस सीरिज के दीदार दर्शकों को नेटफ्लिक्स पर हो रहे है उस अंदाज में इसका सिनेमा घरों तक पहुंचने की बात तो दूर ये पूरी तरह से असंभव था.

नहीं हुआ कॉन्टेंट से कॉम्प्रोमाइज

नेटफ्लिक्स के मंच पर इसको दिखाने का सबसे बड़ा लाभ फिल्म से जुड़े निर्देशकों को हुआ है. अनुराग कश्यप और विक्रमादित्य मोतवाने ने साझा तौर पर मिलकर सेक्रेड गेम्स का निर्देशन किया है. लेकिन अगर सफलता का सेहरा किसी के सर पर जाता है तो वो निश्चित तौर पर विक्रमादित्य मोतवाने है क्योंकि पूरे सीरिज के शो रनर वही हैं. कहने का आशय ये है कि सीरिज़ को बनाने की पूरी ज़िम्मेदारी उनके कंधे पर ही थी.

सेंसरशिप ना होने की वजह से इन दोनों ने इसका लाभ पूरी तरह से उठाया है और सीरिज़ के साथ कहीं भी किसी तरह का समझौता नहीं किया है. इस बात में कोई शक नहीं है की अनुराग कश्यप की सालों की सेंसरशिप को लेकर उनकी घुटन सिर्फ इस एक सीरिज से काफी हद तक कम हो गई होगी क्योंकि उनके ऊपर सीरिज़ को निर्देशित करते समय किसी तरह का कोई पहरा नहीं था किसी तरह की कोई बंदिश नहीं थी.

उनको जो कुछ भी सीरिज में दिखाना था उसको पूरे तन्मयता के साथ दिखाया है. मुमकिन है की सेंसरशिप ना होने की वजह से बॉलीवुड के बाकी फिल्म मेकर्स को भी बल मिलेगा और अपने दिल की बात छोटे पर्दे पर ला सकेंगे. आने वाले समय मे बालीवुड का एक बड़ा तबका इस मंच की ओर रुख करेगा इस बात से इंकार नही किया जा सकता है.

फिलहाल बंदिशों से फ्री हैं स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स

नेटफ्लिक्स का प्लेटफॉर्म एक तरह से ताजी हवा एक सामान हैं बॉलीवुड मेकर्स के लिए जहां उनकी फिल्म के हर सिगरेट और शराब पीने के सीन्स पर पर्दे के नीचे डिस्क्लेमर लिखा लिखना पड़ता है. नेटफ्लिक्स का प्लेटफॉर्म आपको इस बात का भी मौका देता है कि डायलॉग लिखने के पहले फिल्म मेकर्स को ये नहीं सोचना पड़ेगा कि डायलॉग की दिशा या दशा क्या होनी चाहिए.

सेक्स और फ्रंटल न्यूडिटी की बात तो आप भूल जाइये मुमकिन है कि सालों तक आपकी फिल्म सेंसर बोर्ड में अटकी रहे. और इन्हीं वजहों से नेटफ्लिक्स का ये पहला हिंदी शो कई मायनों में गेम चेंजर भी कहा जा रहा है. फिल्म में कहानी को कहने की भी एक सीमा अवधि होती है. फिल्म मेकर्स को ढाई से तीन घंटे के बीच में अपनी बात कहनी होती है जाहिर सी बात है कई चीजों पर फिल्म के निर्देशक को अपने सीने पर पत्थर रख कर उसे फिल्म से अलग करना पड़ता है. नेटफ्लिक्स में ऐसी कोई पाबंदी नहीं है. इस बात में अचरज नहीं होना चाहिए क अगर सेक्रेड गेम्स फिल्म के रूप में हमारे सामने आती तो शायद इसका स्वरूप कुछ और होता जो निश्चित रूप से उतना लुभाने वाला नहीं रहता.

200 देशों में पहुंची सेक्रेड गेम्स

नेटफ्लिक्स की पहुंच कुछ ऐसी है जो फिल्म मेकर्स के लिए अपने आप में एक बहुत बड़ा प्रलोभन हो सकता है. अगर कोई आपको ये कहे कि सेक्रेड गेम्स के दीदार दुनिया के 200 देशों के लोग कर सकते हैं तो शायद आप इस बात पर विश्वास ना करें लेकिन ये हकीक़त है. अब 200 देशों में सेक्रेड गेम्स को कितने लोग देख रहे हैं इसका डेटा सिर्फ नेटफ्लिक्स के अधिकारियों के पास रहता है और आज तक उन्होंने अपने शोज के आंकड़ों के बारे में किसी तरह का खुलासा नहीं किया है और शायद आगे भी ना निकाले लेकिन जिस तरह की बहस इसने शुरू कर दी है उसको देख कर यही लगता है कि नेटफ्लिक्स के इससे पौ बारह ही हुई है.

जिस तरह का पैसा इसके प्रमोशन पर खर्च किया गया था वो अकेले बॉलीवुड की कई बड़ी फिल्मों को मिलकर जो प्रोमोशन बजट होगा उसके बराबर था. यानी कि जिस बात का डर फिल्म मेकर्स को सबसे ज्यादा बना रहता है की फिल्म बनाने के बाद वो लोगों तक किस तरह तक पहुंचेगी इस डर को भी नेटफ्लिक्स दूर कर देता है. लॉन्च के पहले नेटफ्लिक्स की पूरी टीम मुंबई के एक पांच सितारा में कई दिनों से डेरा डाले हुई थी और उन सभी के लिए होटल का एक पूरा फ्लोर बुक्ड था यह अपने आप में बहुत कुछ कहता है.

अमेरिकन टीवी का गोल्डन पीरियड अब इंडिया में

अमेरिका में पिछले कुछ सालों से एक तरह का माइग्रेशन देखा जा रहा है जहां पर हॉलीवुड के दिग्गज निर्देशक और कलाकार रुपहले परदे का मोह छोड़ कर छोटे परदे की ओर रुख कर रहे हैं. इनमें मार्टिन स्कॉर्सेसे, डेमियन चेजेल, और मैथ्यू मैक्कौनेहुये जैसे बड़े नाम हैं. छोटे पर्दे को इसका फ़ायदा भी हुआ है और लोग अब यह कहने लगे हैं कि शायद यह छोटे पर्दे का सुनहरा दौर है. सेक्रेड गेम्स हिंदुस्तान में एक शुरुआत है और इस बात में कोई शक नहीं कि इसकी सफलता के बाद और भी लोग इससे जुड़ेंगे. जुड़ने की सबसे बड़ी वजह होगी हर चीज को अपने अंदाज़ से कहने की आज़ादी जहां सेंसरशिप का कोई भय नहीं होगा.

अब इसकी आंच बॉलीवुड के ऊपर पड़ेगी इस बात में कोई शक किसी को नहीं होना चाहिए. आने वाले दिनों में आप इस बात के लिए तैयार रहिये कि बड़ी फिल्मों के भी दीदार आपको परदे पर जल्द होने वाले हैं. जाने से पहले सिर्फ एक बात और यही कहूंगा कि साल 2019 की सबसे बड़ी हालीवुड फिल्म का प्रीमियर नेटफ्लिक्स पर ही होने वाला है जिसमे वहा के दो दिग्गज सितारे - अल पचीनो और रोबर्ट डी नीरो एक साथ नज़र आएंगे. जानना चाहेंगे कि उस फिल्म का निर्देशन कौन कर रहा है - मार्टिन स्कॉर्सेसे. ये कुछ वैसा ही हुआ कि अमिताभ बच्चन और दिलीप कुमार एक साथ किसी फिल्म में आ रहे हैं और उस फिल्म का निर्देशन राजकुमार हिरानी कर रहे है. ये पक्की बात है कि बॉलीवुड में आने वाले समय में एक क्रांतिकारी बदलाव के बहुत जल्द दर्शन होने वाले वाले है.

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