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Review रागदेश : फिर दौड़ेगा रगों में देशभक्ति का लहू

तिग्मांशु धूलिया की फिल्म रागदेश आपको आजादी के जमाने में ले जाएगी

फ़र्स्टपोस्ट रेटिंग:

Hemant R Sharma Hemant R Sharma Updated On: Jul 28, 2017 06:47 PM IST

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Review रागदेश : फिर दौड़ेगा रगों में देशभक्ति का लहू
निर्देशक: तिग्मांशु धूलिया
कलाकार: कुणाल कपूर, अमित साध, मोहित मारवाह

तिग्मांशु धूलिया के शानदार डायरेक्शन में बनी ये फिल्म आपको कुर्सी से बांधे रखेगी. कहीं कहीं पर कुछ पल आपको बोझिल लग सकते हैं लेकिन देशभक्ति से ओतप्रोत फिल्म के गाने आप में फिर से जोश भर देंगे.

शहनावाज खान बने कुणाल कपूर, गुरबक्श सिंह ढिल्लन के तौर पर अमित साद और मोहित मारवाह कर्नल प्रेम सहगल बनकर आपके दिलों पर छा जाने के लिए बेताब हैं.

स्टोरी 1945 की है जब भारत पर अंग्रेजी हुकूमत राज करती थी और भारत की आजादी के लिए देश संघर्ष कर रहा था. अंग्रेजों की सेना के कुछ जवानों में देश की आजादी के लिए मर मिटने का जुनून आ जाता है, जिसके बाद सरकार इन जवानों पर देशद्रोह का मुकदमा चलाती है.

मुकदमे के दौरान किस तरह कोर्ट में जिरह होती है. क्या अंग्रेजी हुकूमत देती है इन रणबांकुरों को न्याय, इसे देखने के लिए आपको रागदेश देखनी होगी.

आजाद हिंद फौज का जिक्र

रागदेश में नेताजी सुभाष चंद्र बोस और उनकी आजाद हिंद फौज के काम करने के तरीकों को बेहद ही दिलचस्प ढंग से दिखाया गया है. नेताजी के विचारों से प्रभावित होकर उन दिनों लोग कैसे अपना सब कुछ देश के लिए न्योछावर करने के लिए बेताब रहते थे, इसे देखना काफी मजेदार है.

अच्छी है कास्टिंग

फिल्म की कास्टिंग काफी अच्छी तरह से की गई है. कुणाल कपूर, अमित साद और मोहित मारवाह तीनों ही अपने रोल्स में सटीक लगे हैं. मोहित से आगे और भी अच्छे काम की उम्मीद की जा सकती है.

तिग्मांशु की तारीफ

इस फिल्म के लेखक और डायरेक्टर तिग्मांशु ही हैं. इसलिए उनकी पकड़ पूरी फिल्म पर मजबूत दिखाई पड़ती है. सिनेमैटोग्राफी भी शानदार है, जिसे देखकर कहा जा सकता है कि भारत में फिल्मों का स्तर अब धीरे-धीरे ही सही हॉलीवुड जैसा हो रहा है.

रगों में जोश भरता संगीत

म्यूजिक डायरेक्टर राजा मजूमदार का संगीत फिल्म में लोगों के दिलों में देशभक्ति का जुनून भरने में कामयाब साबित हुआ है. फिल्म के गानों में देशभक्ति के शब्द आपमें देश के लिए कुछ कर गुजरने की सोच पैदा कर सकते हैं.

रिसर्च टीम की मेहनत

फिल्म में तथ्यों को डीटेल में दिखाने की कोशिश काफी मनोरंजक तरीके से की गई है. फिल्म में भलाबाई देसाई का किरदार निभा रहे है केनेथ देसाई की एक्टिंग लाजवाब है. स्टोरी को अलग तरीके से कहने की कोशिश की गई है. जिसमें टीम पूरी तरह से सफल नजर आती है. फिल्म में फैक्ट्स को तारीखों के जरिए जिस तरह से पेश किया गया है उससे रिसर्च टीम की तारीफ तो बनती है.

1945 में चले जाएंगे आप

तिग्मांशु धूलिया ने फिल्म का जबरदस्त रिएलिटी का टच देने की कोशिश की है जिसे देखकर आपको ये पता नहीं चलेगा कि आप इस फिल्म के किरदारों का कब हिस्सा बन गए. जापानी भाषा का प्रयोग, शानदार कॉस्ट्यूम्स और सेट को पूरी तरह से प्रासंगिक बनाने की जो कोशिश है वो लाजवाब है.

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