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Review: ‘मिसिंग’ के लिए तब्बू और मनोज वाजपेयी ने अपनी हामी क्यों दी ये सबसे बड़ी गुत्थी है

ये फिल्म कहीं से भी आपको बांधकर रखने में नाकाम रहती है

फ़र्स्टपोस्ट रेटिंग:

Abhishek Srivastava Updated On: Apr 06, 2018 06:44 PM IST

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Review: ‘मिसिंग’ के लिए तब्बू और मनोज वाजपेयी ने अपनी हामी क्यों दी ये सबसे बड़ी गुत्थी है
निर्देशक: मुकुल अभयंकर
कलाकार: मनोज वाजपेयी, तब्बू, अन्नू कपूर

आजकल फिल्मों को स्ट्रीमिंग सर्विसेज के कंटेंट से जबर्दस्त टक्कर मिल रही है. अगर आप स्ट्रीमिंग सर्विसेज के कंटेंट देखते हैं तो आपको इस बात की भी जरूर जानकारी होगी कि बच्चों के गुम हो जाने के बाद उनकी खोजबीन पर तमाम टीवी सीरीज आजकल थोक के भाव से आ रहे हैं. कमाल की बात ये है कि इन सभी को देखने के बाद यही लगता है कि इन सभी में किसी तरह की होड़ मची है कि कौन दूसरे से कितना बेहतर है. दूसरे शब्दों में दर्शक के लिए अच्छे कंटेंट के विकल्प की कमी नहीं है. लेकिन निर्देशक मुकुल अभयंकर की ‘मिसिंग’ देखने के बाद लगता है की उनको पति नहीं है कि विश्व के बाकी जगहों में इस तरह के कंटेंट को किस ऊंचाई पर ले जाया जा चुका है. देखकर आश्चर्य होता है कि तब्बू और मनोज वाजपेयी ने ‘मिसिंग’ में काम करने के लिए अपनी हामी क्यों भरी? अगर इस फिल्म से आप अपनी दूरी बना सकते हैं तो इसमें आपकी ही भलाई है.

‘मिसिंग’ की कहानी से कई चीजें ‘मिसिंग’ हैं

‘मिसिंग’ की कहानी है सुशांत (मनोज वाजपेयी) और अपर्णा (तब्बू) की जो छुट्टी मनाने के लिए मॉरिशस का रूख करते हैं अपनी बेटी तितली के साथ. मॉरिशस के एक रिसॉर्ट में चेक इन करने के बाद वहीं से इनकी बच्ची अचानक गायब हो जाती है. लाचार और परेशान माता-पिता इसके बाद मॉरिशस के पुलिस अफसर रामखेलावन बुद्धू से मिलते हैं जो इसकी तफ्तीश अपने अनोखे अंदाज में शुरू करते हैं. तफ्तीश के दौरान एक के बाद एक परतें खुलती हैं.

तब्बू और मनोज वाजपेयी ने इस फिल्म के लिए अपनी हामी क्यों भरी?

कहने की जरूरत नहीं है कि ‘मिसिंग’ की कहानी की बुनियाद काफी ठोस है लेकिन इसका क्रियान्वयन उतना ही सतही है. बच्ची के गायब होने के बाद उसके माता-पिता जिस तरह की हरकतें करते हैं वो अपने आप में पूरी तरह से बचकाना लगता है. इस तरह के हादसे के बाद असल जिंदगी में कोई माता-पिता इस तरह की हरकतें करेंगे इस बात में मुझे पूरी तरह से शक है. एक सस्पेंस फिल्म होने के बावजूद इस फिल्म मे कोई गहराई नहीं है और ये इतनी सतही तरीके से चलती है कि इसको देखने के बाद यही सोचने का मन करता है कि तब्बू और मनोज वाजपेयी शूटिंग के दौरान आखिर क्या सोच रहे होंगे? ये तो रही उनके सोचने की बात लेकिन अगर उनके खुद के अभिनय पर नजर डाली जाए तो शायद उनको औसत मार्क्स भी नसीब न हो. सच्चाई यही है कि फिल्म में तमाम खामियां हैं और देखकर लगता है कि इस फिल्म को जल्द बनाने की कोई होड़ मची थी. पर्दे पर इसका रिजल्ट दिख जाता है. इस तरह की मिस्ट्री फिल्मों का एक ग्राफ होता है लेकिन मुकुल की इस फिल्म में इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया जिसका असर कहानी पर पड़ता है.

मुकुल अभयंकर के निर्देशन में ढेर सारी खामियां हैं

अभिनय की बात करें तो मनोज वाजपेयी इस पूरे फिल्म में अलग-थलग नजर आते हैं. पूरी फिल्म में उनके परफॉरमेंस में किसी तरह की कोई स्थिरता नहीं है. लगता है कि उन्हें खुद भी पता नहीं होगा की वो फिल्म में क्या कर रहे हैं. तब्बू का हाल भी कुछ वैसा ही है लेकिन हां कुछ लाज उन्होंने अभिनय के मामले में जरूर बचाई है. जब तक मनोज वाजपेयी के अंदर का अभिनय जागता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है. अन्नू कपूर ने जिस तरह का अभिनय फिल्म में दिया है उसकी उनसे कतई उम्मीद नहीं थी. उनको देखकर हंसी ही छूटती है. फ्रेंच वर्ड्स उनको फिल्म में दिए गए हैं बोलने के लिए और उनको सुनने के बाद यही लगता है की डायलॉग राइटर ने उनसे अपना कोई पुराना बदला लिया है. सच यही है कि इस बात की जानकारी आपको पहले ही हो जाती है कि फिल्म किस दिशा में जा रही है लिहाजा जब भी अन्नू कपूर पर्दे पर आते हैं उनको देखने में मजा आता है ये सोचकर कि चलो अब हंसने का मौका मिलेगा.

ये फिल्म कहीं से भी आपको बांधकर रखने में नाकाम रहती है

फिल्म जैसे-जैसे आगे बढ़ती है आपके सिर का दर्द भी उतना ही बढ़ता चला जाता है. बोरियत की चरम सीमा पर आप क्लाइमेक्स के पहले ही पहुंच जाते हैं. जब सस्पेंस की गुत्थी के समाधान की बारी आती है तब आपको इस बात की नहीं पड़ी होती है कि इस फिल्म का अंत किस तरीके से होने वाला है. फिल्म में आपकी दिलचस्पी पुरी तरह से काफूर हो चुकी होती है. मुकुल अभयंकर की ये पहली फिल्म एक बेहद ही निराशाजनक कोशिश है. उनको निर्देशन की बारीकियों पर और भी ध्यान देने की जरुरत है. एक मिस्ट्री फिल्म के बीच में अगर लोग हंसना शुरू कर दें तो ये इसी बात की निशानी है कि फिल्म के लिए रास्ता अभी बहुत लम्बा है. दूर रहिये इस ‘मिसिंग’ से.

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