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Remembering R K Studio : आर के स्टूडियो बनाने के लिए नरगिस ने बेच दिए थे अपने कंगन

पहले भी कई बार आर के स्टूडियो पर पैसे की कमी के बादल मंडराए थे लेकिन राजकपूर ने हमेशा उसे संकट से उबार लिया

Updated On: Aug 28, 2018 01:21 PM IST

Abhishek Srivastava

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Remembering R K Studio : आर के स्टूडियो बनाने के लिए नरगिस ने बेच दिए थे अपने कंगन

आर के स्टूडियो की अहमियत फिल्म जगत में क्या है इस बात का खुलासा निर्देशक इम्तियाज अली के एक ट्वीट से हो जाता है जो उन्होंने लगभग दो साल पहले उस वक्त किया था जब वो शाहरुख खान और अनुष्का शर्मा के साथ फिल्म जब हैरी मेट सेजल की शूटिंग आर के स्टूडियो में कर रहे थे.

अपने ट्वीट में इम्तियाज अली ने लिखा था कि राज कपूर के स्टूडियो में अपनी फिल्म की शूटिंग उनकी जिंदगी का एक बड़ा पल है और अपने छह दिन की शूटिंग के दौरान वो वहां के स्टूडियो से निकलने वाली महान सिनेमा की परछाइयों में रहे. इम्तियाज अली की ये बातें खुद-ब-खुद आर के स्टूडियो की प्रतिष्ठा का बयां कर देती हैं.

लगभग सत्तर साल के बाद जब इस स्टूडियो का मालिकाना हक़ किसी और के पास चला जाएगा तब भारतीय फिल्मी इतिहास का एक अध्याय खत्म भी हो जाएगा. ये कहना कही से भी गलत नहीं होगा कि जे पी दत्ता, राहुल रवेल और अनिल शर्मा जैसे निर्दशकों ने अपनी निर्देशन की बारिकियां आर के स्टूडियो के गलियारों में ही सीखी थीं.

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आर के स्टूडियो के बारे में ऐसा कहा जाता है कि लगभग चार एकड़ में फैले इस स्टूडियो की नींव मुम्बई के चेम्बूर इलाके में सन् 1950 में तब रखी गई थी जब राज कपूर अपनी पिछली फिल्म बरसात से बॉक्स ऑफ़िस पर कुछ पैसे कमाने में कामयाब रहे थे. शूटिंग की परंपरा आर के स्टूडियो में फिल्म आवारा से तब हुई जब इस फिल्म का एक ड्रीम सीक्वेंस यहां पर पहली बार फिल्माया गया. उस वक़्त स्टूडियो की ईटें ताज़ा थीं और दीवारों की लम्बाई 10 फ़ीट भी नहीं थी.

आर के स्टूडियो, सच में कहें तो ये शुरुआत में नर्गिस और राज कपूर का जॉइंट बैनर था. नरगिस की आर के स्टूडियो में हैसियत बतौर एक पार्टनर की थी और जब तक उनका दखल स्टूडियो में रहा, दोनों ने कुल मिलकर 6 फिल्में स्टूडियो के तहत दर्शकों को दीं. कपूर खानदान पर मधु जैन की किताब का यहां पर उल्लेख करें तो उनकी किताब में इस बात का भी जिक्र है कि स्टूडियो के मैनेजमेंट पर जो उनकी शक्ति थी उसको लेकर कुछ लोग उनसे खार भी खाते थे.

नरगिस ने बेच दिए थे अपने कंगन

मशहूर फिल्म इतिहासकार पी के नायर ने अपने एक संस्मरण में इस बात का जिक्र किया है कि जब तक वो सेट पर रहे पूरे दौरान मानो नर्गिस ही फिल्म का निर्देशन कर रही थीं. पूरे सीन में वो डूबी हुई थीं और सेट के लाइट मैन को निर्देश दिए जा रही थीं. इसका सीधा मतलब यह भी था कि आर के स्टूडियो को चलाने में उनकी उस दौरान एक महत्वपूर्ण भूमिका रही थी. नरगिस के बारे में ऐसा कहा जाता है कि स्टूडियो को बनाने के दौरान जब फंड की कमी आई तब नर्गिस ने धन उगाही के लिए अपने सोने के कंगनों को बेचने के अलावा बाहर की बाकी प्रोडक्शन की फिल्मों में भी काम करके वहां से मिले पैसों को स्टूडियो के निर्माण में लगाया.

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नर्गिस और राज कपूर स्टूडियो के कण कण में बसे हुए हैं ये बात स्टूडियो के लोगों को देखकर साबित हो जाती है जिसमें उनकी सुपरहिट फिल्म बरसात का एक इमेज इस्तेमाल किया गया है.

नरगिस के अलग होने के बाद स्टूडियो की पूरी ज़िम्मेदारी राज कपूर के कंधों पर आ गई थी जिसका निर्वाहन उन्होंने शानदार तरीके से किया और उसके बाद एक के बाद एक शानदार फिल्में दी. मेरा नाम जोकर राज कपूर के फिल्मी करियर की सबसे महत्वाकांक्षी फिल्म मानी जा सकती है.

पहले भी पड़ी है पैसे की कमी की मार

उस फिल्म के बॉक्स ऑफ़िस पर नहीं चल पाने के एवज में राज कपूर को अपना चहेता स्टूडियो गिरवी पर रखना पड़ा था. ये अलग बात है की उसके बाद उनकी दूसरी फिल्म बॉबी ने सारी कसर वसूल कर ली थी.

लेकिन मेरा नाम जोकर और बॉबी के बीच का फासला राज कपूर के लिए कठिनाइयों से घिरा पड़ा था. उसी दरमियान राज कपूर के पिता पृथवीराज कपूर की तबीयत बेहद नाजुक थी और उनका इलाज अमेरिका के एक अस्पताल में चल रहा था. स्टूडियो गिरवी होने और पैसे की अभाव के वजह से अमेरिका में दो महीने राज कपूर ने सोशलाइट बीना रमानी के छोटे से फ्लैट में जमीन पर सो कर बीताना पड़ा था और हर दिन उस छोटे से फ्लैट से अस्पताल का सफर वो बस में तय करते थे.

स्टूडियो में था राजकपूर का कॉटेज

आर के स्टूडियो का जब भी जिक्र होता तब तक राज कपूर के मशहूर कॉटेज का जिक्र ज़रूर होता है जो उनका क्रिएटिव स्पेस था. आर के स्टूडियो में बने उनके दफ्तर से ज्यादा समय उनका उनके कॉटेज में बीतता था. राज कपूर की बेटी ऋतु नंदा ने अपने पिता के इस कॉटेज के बारे में अपनी किताब राज कपूर स्पीक्स में बखूबी बयां किया है.

उनके हिसाब से राज कपूर अपने कॉटेज में अक्सर जमीन पर बिछे हुए गद्दे पर पालथी मार कर बैठते थे और वहीं से अपने स्क्रिप्ट को लेकर लोगों से चर्चा करते थे या फिर किसी तरह की बिजनेस डीलिंग. कॉटेज की दीवार पर विश्व के सभी चर्चित धर्म समुदाय के देवी देवताओं की तस्वीर लगी रहती थी.

इसके अलावा कॉटेज में उनके पिता पृथ्वीराज कपूर, नरगिस की एक इमेज आवारा से, पद्मिनी की इमेज जिस देश में गंगा बहती है और वैजयंती माला की तस्वीर उनकी सुपरहिट फिल्म संगम से, दीवार की दूसरी तरफ टंगी रहती थी.

लेकिन समय की मार आर के स्टूडियो पर बुरी तरह से पड़ी. किसी ज़माने में सभी सितारों के चाहते स्टूडियो कहलाने वाले आर के स्टूडियो की साख में तब कमी आई जब वेस्टर्न लाइन पर स्टूडियो एक के बाद एक पनपने लगे.

70 के दशक तक सितारों का भी पलायन चेम्बूर और साउथ बॉम्बे से जुहू और अंधेरी की तरफ हो चुका था. यह वो दौर था जब आर के स्टूडियो के कर्मचारियों की संख्या 1974 में 129 से घटकर 1982 तक महज 47 तक सिमट गई थी. लेकिन जो बुरा दौर राज कपूर ने मेरा नाम जोकर के रिलीज़ के बाद अपनी स्टूडियो को लेकर सहना पड़ा था वो दौर 1982 में भी एक बार आया था, जिसके बारे मे लोगों को कम जानकारी है, जब प्रेम रोग की रिलीज के ठीक पहले उनकी आर्थिक हालत का संतुलन गड़बड़ हो गया था. एक साक्षात्कार में उन्होंने इस बात को कबूल किया था की अगर प्रेम रोग बॉक्स ऑफ़िस पर चलने में नाकामयाब रहती है तो मुमकिन है की आर के स्टूडियो आगे चलकर और फिल्में नहीं बना पाए और शायद उनको अपना चहेता स्टूडियो एक गोदाम में तब्दील करना पड़े.

ये स्टूडियो की ही कशिश थी जो सत्तर के दशक के मशहूर निर्देशक मनमोहन देसाई को बार बार अपनी फिल्मों की शूटिंग के लिए वहां खींच कर ले आती थी. आर के के प्रांगण में ही किया था.

सबसे मशहूर थी आर के स्टूडियो की होली

आर के स्टूडियो की महत्ता इसी बात से पता चल जाती है कि जब मशहूर आर के होली की बात आती थी तब उस ज़माने के जाने माने सितारे अपने घर के बदले आर के स्टूडियो के प्रांगण में होली मानते थे. स्टूडियो के अंदर बने टैंक में में सभी सितारे को एक एक करके डुबोया जाता था और उसके बाद मस्ती का आलम चढ़ता था. लेकिन राज कपूर की मौत के बाद स्टूडियो मे होली की मौज मस्ती फिर से नजर नहीं आई. आग के बाद बढ़ते आर्थिक नुकसान की वजह से राज कपूर के बेटों - रणधीर कपूर, ऋषि कपूर और राजीव कपूर ने इस बात का साझा निर्णय लिया कि स्टूडियो को बेचना श्रेयस्कर होगा. यह एक विडम्बना ही कही जाएगी कि जिस आग की वजह से राज कपूर ने स्टूडियो बनाने की ओर अपना कदम लिया था, उसी आग की वजह से आज आर के स्टूडियो इतिहास के पन्नों में जाने की तैयारी कर रहा है.

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