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असली नाडिया को कितना जस्टिफाई करेगी ‘मिस जूलिया’?

विशाल भारद्वाज की मिस जूलिया इसी नाडिया की कहानी की प्रेरणा है?

Updated On: Feb 24, 2017 11:18 AM IST

Hemant R Sharma Hemant R Sharma
कंसल्टेंट एंटरटेनमेंट एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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असली नाडिया को कितना जस्टिफाई करेगी ‘मिस जूलिया’?

विशाल भारद्वाज की फिल्म ‘रंगून’ में जबसे कंगना रनौत ने 'मिस जूलिया'  का किरदार निभाया है तबसे उनकी ज़ुबानी धार और मिजाज़ भी बदल गया है. मीडिया में एक से एक बोल्ड स्टेटमेंट के जरिये कंगना अपने फ़िल्मी किरदार को जस्टिफाई करने में जुटी हैं लेकिन मिस जूलिया के पीछे जिस ओरिजिनल किरदार की प्रेरणा है उसके सामने कंगना तो क्या बॉलीवुड की कोई भी एक्शन क्वीन नहीं टिक सकती.

30 और 40 के दशक में एनी इवांस उर्फ़ फीयरलेस नाडिया के कारनामों को हिंदी सिनेमा दांतों तले उंगुलियां दबाये हैरत से देखता था. जब अभिनेत्रियां पेड़-टहनियां पकड़ हीरो के साथ लुका-छिपी करती नजर आती थीं तब नाडिया परदे पर विलेन्स के छक्के छुड़ा रही थी.

ऑस्टेलिया में हुआ जन्म

नाडिया का पब्लिक क्रेज आज भी फिल्ममेकर्स को घाटे का सौदा साबित होने के बावजूद अभिनेत्रियों को एक्शन फिल्मों में पेश करने की प्रेरणा देता है. 1908 में ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में जन्मी ब्रिटिश पिता और ग्रीक मां की संतान मेरी इवांस एन 1913 में भारत आयी.

मेरी से बनी नाडिया

आर्मी पिता की प्रेरणा के कारण खतरों से खेलना नाडिया का शौक बन गया. इस शौक को नाडिया ने घुड़सवारी, जिम्नास्टिक, तलवारबाजी की बाकायदा ट्रेनिंग लेकर ऊपर पहुंचाया. इन कलाओं में पारंगत होने के बाद मेरी ने अपना नाम बदल कर नाडिया रख लिया और सर्कस  में अपने करतब दिखाने लगी.

हंटरवाली नाडिया. फोटो सौजन्य विकिपीडिया

हंटरवाली नाडिया. फोटो सौजन्य विकिपीडिया

सर्कस से की थी शुरुआत

उनके हैरतअंगेज कारनामों की शोहरत दूर-दूर तक जा पहुंची और सिनेमा से जुड़े लोग भी सर्कस देखने आने लगे, ऐसे ही किसी शो में वाडिया मूवीटोन के मालिक जमशेद बोमन होमी वाडिया की नज़र नाडिया पर पडी. यहीं से नाडिया के फ़िल्मी सफर की शुरुआत हुई.

नाडिया बनी हंटरवाली

वाडिया ने सबसे पहले नाडिया को 1933 में बनी फिल्म ‘देश दीपक’ के लिए एक छोटे से रोल में साइन किया. इस फिल्म में नाडिया को दर्शकों ने काफी पसंद किया. 1935 में वाडिया ने 'हंटरवाली' की शुरुआत की और इस फिल्म में नाडिया को मेन लीड में कास्ट किया.

फीयरलेस नाडिया. फोटो क्रेडिट विकिपीडिया

फीयरलेस नाडिया. फोटो क्रेडिट विकिपीडिया

ओवरबजट हुई हंटरवाली

30 के दशक में अस्सी हजार की लागत से बनी इस फिल्म को ओवरबजट करार दिया गया. आखिरकार वाडिया ब्रदर्स ने खुद ही फिल्म को रिलीज करने का जोखिम उठाया. फिल्म उस जमाने की सबसे सफल फिल्म साबित हुई.

‘हंटरवाली’ उस समय के हिसाब से काफी आगे की फिल्म थी. पर्दे पर विलेन को उठा-उठाकर फेंकती और चाबुक चलाती हीरोइन दर्शकों के लिए एक रोमांचक अनुभव था.

हंटरवाली ने दिलाई पहचान

नाडिया ने इस फिल्म में माधुरी नामक किरदार निभाया था जिसने इंसाफ की खातिर खुद ही हथियार उठा लिया था. प्रयोग नया था लेकिन दर्शकों ने पसंद किया. आगे चलकर इस तरह के प्रयोग चलन में आ गए. इस  फिल्म के बाद नाडिया ने ‘जंगल प्रिंसेस’, ‘सर्कस क़्वीन’ और ‘मिस फ्रंटियर मेल’ जैसी दर्जनों फिल्मों में काम किया मगर उसकी पहचान हमेशा सिर्फ ‘हंटरवाली’ की ही रही.

पर्सनल लाइफ हुई प्रभावित

नाडिया को आज 75 साल बाद भी उसके असल नाम की बजाय ‘हंटरवाली’ के नाम से ही ज़्यादा याद किया जाता है. नाडिया ने वाडिया मूवीटोन को फिल्म जगत में खूब शोहरत दिलाई. 1940 में जेएच वाडिया के छोटे भाई होमी वाडिया का प्रेम प्रकरण शुरू हो गया जिसे शादी तक पहुंचने में 21 सालों का इंतज़ार करना पड़ा.

नाडिया ने दो दशक तक फ़िल्मी परदे पर एकछत्र राज्य किया. 1968 में नाडिया आख़िरी बार फिल्म 'खिलाड़ी' में नज़र आयी. इसके बाद उन्होंने फिल्म में काम करना बंद कर दिया. नाडिया ने हिंदी  फिल्मों को एक नया मिजाज दिया.

उन्होंने अभिनेत्रियों को अबला नारी की इमेज से निकाल कर झांसी की रानी, रजिया सुल्तान जैसे करेक्टर का अंदाज़ बख्शा, सबसे बड़ी बात ये कि उनके इस कायाकल्प का सिनेमा और दर्शक-दोनों ने खुले दिल से स्वागत किया. 1996 में नाडिया का मुम्बई में निधन हो गया. नाडिया की फ़िल्में और शख्सियत आज भी बॉलीवुड के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है.

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