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Interview : बॉलीवुड बहुत ही एक्सेप्टिंग है, ये खुले बाहों से आपका इस्तेकबाल करता है- राखी शांडिल्य

डेब्यू फिल्म 'रिबन' की कहानी और डायरेक्शन के लिए राखी शांडिल्य को क्रिटिक्स से लेकर दर्शकों के पॉजिटिव रीव्यूज मिल रहे हैं

Updated On: Nov 05, 2017 05:43 PM IST

Rajni Ashish

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Interview : बॉलीवुड बहुत ही एक्सेप्टिंग है, ये खुले बाहों से आपका इस्तेकबाल करता है- राखी शांडिल्य

महानगरीय जिंदगी की भाग-दौड़ और परेशानियां, करियर से जुड़े कई तरह के उतार-चढ़ाव और इस सबके बीच पेरेंटहुड और उसके बाद चाइल्ड एब्यूज जैसे मुद्दे को डायरेक्टर राखी शांडिल्य ने ईमानदारी के साथ सिल्वर स्क्रीन पर फिल्म 'रिबन' के जरिये पेश करने की अच्छी कोशिश की है. 'रिबन' उनकी डेब्यू फिल्म है और उन्होंने एक ऐसे इश्यू को इसमें दिखाने की कोशिश की है जो हमारे आस पास की ही कहानी लगती है. 'रिबन' सुमित व्यास और उनकी बीवी का किरदार निभा रही काल्कि कोचलिन की कहानी है. फिल्म को क्रिटिक्स से लेकर दर्शकों के पॉजिटिव रीव्यूज मिल रहे हैं. हाल ही में हमने राखी से उनकी डेब्यू फिल्म की कहानी और उससे जुड़े संघर्षों पर बात की. पेश है बातचीत के कुछ मुख्य अंश.

आपकी पहली हिंदी फिल्म है, फिल्म को लेकर कैसा महसूस कर रही हैं आप ?

दर्शकों को फिल्म पसंद आ रही है. हम लोगों के लिए ये सबसे अच्छी और एक बड़ी उम्मीद जगाने वाली बात है कि ये फिल्म जिनको भी पसंद आ रही है वो दूसरों को भी फिल्म के बारे में बताएंगे और फिल्म देखने के लिए प्रेरित करेंगे. हमारे लिए एक फिल्ममेकर के तौर पर सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि हमारी फिल्म को ज्यादा से ज्यादा दर्शक थिएटर में जाकर देखें ताकि हमारा मनोबल बढ़े.

फिल्म को क्रिटिक्स से भी बड़े अच्छे रिव्यूज मिले हैं. क्रिटिक्स से मिले पॉजिटिव रिस्पॉन्स पर क्या कहना चाहेंगी आप ?

जी बहुत अच्छा लग रहा है. कुछ क्रिटिक्स ने जो रिव्यूज दिए हैं उसने मुझे हैरान कर दिया. दरअसल कुछ रिव्यूज में क्रिटिक्स ने कुछ ऐसी बारीकियों पर गौर किया है जिसके बारे में मुझे लगता था कि वो सिर्फ मुझे ही पता है. मेरा कहने का मतलब ये नहीं है कि लोग मुर्ख हैं लेकिन मेरे लिए ये बड़ी बात थी कि ऐसी बारीकियों पर भी लोगों कि नजर गई जो फिल्म में हमने खुलकर सामने नहीं रखी थी लेकिन जिसके मायने बड़े थे.

फिल्म का कांसेप्ट लोगों को पसंद आ रहा है. इसके बारे में आपने कैसे सोचा ?

हमारे समाज में मां बनने के बारे में जो सोच है, ये फिल्म उसके बारे में है. आप देखेंगे कि पिछले 10 सालों में समाज काफी बदला है और खास कर महिलाओं कि जिंदगी भी काफी बदली है. मैंने उन औरतों की जिंदगी की कहानी को पर्दे पर दिखाने की कोशिश की है जो कामकाजी हैं और वो जब मां बनती हैं तो उसके बाद उनके पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में आई कठिनाइयां और चैलेंजेस को वो किस तरह से फेस करती हैं.

बच्चों के साथ होने वाले यौन शोषण पर भी आपकी फिल्म की कहानी बात करती है. आपने चाइल्ड एब्यूज जैसे मुद्दे को कैसे फिल्म की कहानी में ढाला ?

02kalki-koechlin2 देखिए हम सब के बचपन की अच्छी और बुरी मेमोरीज होती हैं. हम सब के साथ अलग अलग समय पर ऐसी चीजें घटित होती हैं जो हमें हिला कर देती हैं. मैंने चाइल्ड एब्यूज का जो मुद्दा फिल्म में दिखाया है वो हमारे समाज की सच्चाई है और ये समाज में इस तरह से फैला हुआ है कि आप सोच भी नहीं सकते. मैंने ये दिखाने कि कोशिश की है कि कामकाजी मां-बाप जो अपने बच्चे से प्यार करते हैं, जब उनके बच्चे के साथ ऐसा कुछ होता है तो वो कैसा फील करते हैं, कैसे इससे डील कर करते हैं? उनकी मेन्टल सिचुएशन और मेन्टल कॉनफ्लिक्ट को हमने फिल्म के जरिये दर्शाने की कोशिश की है . ये भी बताया है कि ऐसे मां-बाप फिर अपने बच्चे को कैसे चाइल्ड एब्यूज के बारे में बताते और समझाते हैं. उनकी हिचकिचाहट और उनके इस सिचुएशन से अपने बच्चे को निकालने की पुरजोर कोशिश पर भी हमारा पूरा फोकस रहा है.

काल्‍की कोचलिन और सुमित व्‍यास को डायरेक्ट करने का अनुभव कैसा रहा ?

काल्‍की एक फाइन एक्टर हैं. वो चीजें को अच्छे से समझती हैं. वो फिल्म के एक-एक हिस्से को अच्छे से पहले समझती हैं फिर खुद को उसमें ढालती हैं. फिल्म के लिए उन्होंने एक बच्चे की देखभाल से लेकर उसे खिलाने-पिलाने,नहलाने-धुलाने तक की बारीकियों को अच्छे से समझा, क्योंकि फिल्म को हमने वास्तविक तरीके से शूट किया है. वहीं सुमित भी कमाल के एक्टर हैं. वो बहुत ही सिंपल और सहज एक्टर हैं. वो आज के युवा को रिप्रेजेंट करते हैं. मुझे जोड़ी के तौर पर भी ये दोनों काफी फ्रेश और आज के युवाओं को रिप्रेजेंट करने वाले लगे.

एक महिला डायरेक्टर होने के नाते, आपको किस तरह के संघर्ष से होकर गुजरना पड़ा ?

जी, मुझे बिलकुल लगता है कि बॉलीवुड बहुत ही एक्सेप्टिंग है. ये खुले बाहों से आपका इस्तेकबाल करता है. अगर आपको पता है कि आपकी कहानी को आपको कैसे दिखाना हैं, तो यहां ज्यादातर लोग आपको ऐसे मिलेंगे जो आपकी मदद करेंगे. सच बात तो ये है कि एक फीमेल डायरेक्टर के तौर पर मुझे ज्यादा संघर्ष नहीं करना पड़ा. हां लेकिन एक फर्स्ट टाइम हिंदी फिल्म डायरेक्टर के तौर पर जो एक संघर्ष होता है उससे होकर जरूर मुझे भी गुजरना पड़ा.

'रिबन' के बाद आगे किस तरह के प्रोजेक्ट्स पर आप काम कर रही हैं ?

जी,मैं संजीदा कहानियों पर फिल्म बनाना चाहूंगी, जो हमारे आपके जीवन से जुडी हुई हों. फिलहाल मैं एक और स्क्रिप्ट पर काम कर रही हूं जिसके बारे में बहुत जल्द घोषणा करूंगी.

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