S M L

रजनीकांत: बस कंडक्टर से एक्टिंग के भगवान, अब राजनेता

थलापति, अन्नामलाई, बाशा और पदायाप्पा जैसी फिल्मों के बाद वह सिर्फ एक्टर नहीं रहे, आइकन बन गए.

Updated On: Dec 31, 2017 09:45 AM IST

FP Staff

0
रजनीकांत: बस कंडक्टर से एक्टिंग के भगवान, अब राजनेता

2017 के आखिरी दिन रजनीकांत ने राजनीति में आने का ऐलान कर दिया है उनकी. उनकी सियासी पारी तमिलनाडु में जयललिता के जाने के बाद खाली हुए स्पेस को भरने का काम करेगी. शायद थलाइवा ही हैं जो अम्मा के बराबर की जगह पा सकते हैं.

उनकी मौजूदगी, उनकी आवाज, उनका अहसास, उनकी एक तस्वीर भी फैंस की भीड़ इकट्ठा करने के लिए काफी है. उनकी फिल्में रिलीज होती हैं, तो लोगों के लिए त्योहार जैसा माहौल हो जाता है. उनकी तस्वीरों को दूध से नहलाया जाता है. उनकी आरती उतारी जाती है. उनकी फिल्में इतनी भीड़ जुटा लेती हैं कि फिल्म रिलीज के दिन को हॉलीडे डिक्लेयर कर दिया जाता है.

कुछ लोग उन्हें सुपरस्टार कहते हैं और कुछ भगवान ही मानते हैं. हालांकि सीधे और सरल शब्दों में वो सिर्फ रजनीकांत हैं.

असली नाम शिवाजी राव गायकवाड़ है. उनकी इमेज बेशक भगवान और सुपरमैन जैसी है, लेकिन असली कहानी इस परीकथा से एकदम उलट है. आज ही के दिन यानी 12 दिसंबर 1950 को एक मराठी परिवार में जन्मे रजनीकांत की इस कहानी के अब तक के सफर पर एक नजर-

चार भाई-बहनों में रजनीकांत सबसे छोटे हैं. वह काफी छोटे थे, जब उनकी मां का निधन हो गया. उनके घर की हालत अच्छी नहीं थी, इसलिए उन्हें कई छोटे-मोटे काम करने पड़े. उन्हें कारपेंटर के काम से लेकर कुली बनने तक का काम किया, ताकि अपनी फैमिली को सपोर्ट कर सकें. हालांकि इस सबके बीच भी उनका झुकाव सिनेमा की तरफ बना रहा. वह अक्सर स्कूल प्ले में हिस्सा लेते थे. यहीं से उन्होंने अपना एक्टिंग का हुनर संवारा.

स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद रजनीकांत ने बंगलुरु ट्रांसपोर्ट सर्विस में बतौर बस कंडक्टर काम करना शुरू कर दिया. इसी दौरान उन्होंने कन्नड़ रंगमंच में भी काम शुरू किया. 1973 में वह मद्रास फिल्म इंस्टीट्यूट से जुड़े. इस दौरान वह इंडियन फिल्म डायरेक्टर के. बालचंद्र के संपर्क में आए. उस वक्त वह रजनीकांत से कुछ खास प्रभावित नहीं हुए थे.

1975 में रजनीकांत और के. बालंचद्र एक बार फिर मुलाकात हुई. तब बालचंद्र ने उन्हें एक छोटा रोल ऑफर किया. उन्हें पहली सफलता मिली फिल्म भैरवी से, इसमें वह मुख्य भूमिका में थे. इसके बाद वो समय भी आया जब रजनीकांत के बारे में के. बालचंद्र ने कहा- वो मुझे अपना स्कूल मानता है, लेकिन मैं कहूंगा कि इस रजनीकांत को मैंने नहीं बनाया, उसने खुद समय के साथ अपने हुनर को निखारा है. मैंने उसे दुनिया के सामने पेश किया और उसने दुनिया को जीत लिया.

rajni-1

सन् 1975 के बाद रजनीकांत ने कई सुपरहिट फिल्में दीं. थलापति (1991), अन्नामलाई (1992), बाशा (1995) और पदायाप्पा (1999) उनकी कुछ बेहद सफल फिल्में हैं. इन फिल्मों के बाद वह सिर्फ एक्टर नहीं रहे, आइकन बन गए. उनकी फिल्मों और डायलॉग्स को छह साल के बच्चों से लेकर 60 साल तक के बुजुर्गों तक सभी ने इंज्वॉय किया.

2000 में उन्हें पद्मभूषण पुरस्कार से नवाजा गया. इसके बाद साल 2007 में उनकी फिल्म शिवाजी आई और साल 2010 में रोबोट, दोनों ही फिल्में ब्लॉकबस्टर हिट रहीं.

अब अगले साल उनकी फिल्म 2.0 रिलीज होने वाली है, जिसे इंडियन सिनेमा की अब तक की सबसे महंगी फिल्म बताया जा रहा है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Ganesh Chaturthi 2018: आपके कष्टों को मिटाने आ रहे हैं विघ्नहर्ता

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi