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Candid Chat : बॉलीवुड स्टार्स असल जिंदगी के 'हीरो' नहीं हो सकते - राजकुमार राव

राजकुमार राव मानते हैं कि देश की सरहदों की सुरक्षा करने वाले जवानों से प्रेरणा लेकर हमें अपने जीवन के हीरो चुनने चाहिए

Updated On: Aug 13, 2018 02:24 PM IST

Bharti Dubey

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Candid Chat : बॉलीवुड स्टार्स असल जिंदगी के 'हीरो' नहीं हो सकते - राजकुमार राव

वो एक ऐसे स्टार हैं जिन्होंने अपने दम पर बॉलीवुड में बहुत कम समय में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है. उन्हें अलग अलग किरदार निभाना पसंद है लेकिन कलाकारों को हीरो कहे जाने को वो सही नहीं मानते क्योंकि उनकी नजर में हीरो वो है जो सीमा पर तैनात होकर देश की रक्षा कर रहा है या वो जो समाज की भलाई में अपना जीवन अर्पण कर रहा है.

हम बात कर रहे हैं प्रतिभाशाली एक्टर राजकुमार राव की जिन्होंने बॉलीवुड के अपने महज सात साल के कैरियर में न केवल अपने अभिनय का लोहा मनवाया है बल्कि अपने बेहतरीन अभिनय के लिए कई पुरस्कार भी जीते हैं. राजकुमार की लोकप्रियता की वजह से ही उन्हें विज्ञापनों में भी काफी काम मिल रहा है और आज कम से कम पांच बड़े ब्रांड्स के विज्ञापनों में वो दिखाई दे रहे हैं.

हमने राजकुमार राव से खास बातचीत की.

आपकी फिल्म ‘फन्ने खां’ में पीहू ने एक ऐसे किरदार का रोल अदा किया है जो कि संगीत की दुनिया में अपना नाम रोशन करना चाहती है, क्या आपको पीहू का किरदार अपने व्यक्तिगत जीवन से जुड़ा हुआ नजर आता है?

एक तरह से कहूं तो हां, मैं उसके संघर्षों को अपने संघर्षों से जोड़कर देखा पाता हूं क्योंकि जब मैं मुंबई में बॉलीवुड में अपने लिए काम ढ़ूढ़ रहा था तो मुझे कहा जाता था कि मैं अलग अलग किरदार निभाने के लिए ऑडिशन दूं लेकिन लीड रोल निभाने वाले कलाकार के लिए मुझे ऑडिशन नहीं देने दिया जाता था.

वो इस संबंध में मेरे अनुरोध को नजरंदाज कर देते थे. हालांकि मुझे सीधे मना नहीं किया जाता था लेकिन मैं समझ जाता था कि वो क्या कहना चाहते थे. ठीक ‘फन्ने खां’ फिल्म की तरह ही, जिसका मुख्य संदेश ही महत्वाकांक्षा और सपना है, मैंने भी अपनी उम्मीदों अपने सपनों को विपरीत परिस्थितियों के बाद भी मरने नहीं दिया. मैंने हमेशा अपने आप से कहा कि मैं इसे कर सकता हूं और इसे पूरा कर के ही रहूंगा. मैंने इसे तब तक अपने साथ रखा जब तक कि मेरे सपने सच नहीं हो गए.

कंगना के साथ राजकुमार राव की फिल्म मेंटल है क्या आ रही है

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ऐसा समय कब आया जब आपको लगा कि संघर्षों की वजह से आप टूटने लगे हैं?

स्वाभाव से में आशावादी हूं. इसके अलावा मेरे परिवार का भी मेरी सफलता में बहुत योगदान है. आज मैं जिस स्थिति में भी हूं उसके पीछे मेरे परिवार का बहुत बड़ा हाथ है, खास करके मेरी मां का, जिन्हें हमेशा लगाता था कि मेरे जीवन में अच्छा होगा,चाहे अभी भले ही परिस्थितियां कैसी भी हो. मैंने अपने आप से कह रखा था कि यही एक चीज है जिसे करने के लिए मैं इस शहर में आया हूं और मुझे इसी काम से प्यार है. ऐसे में मैं नहीं चाहता था कि किसी और वजह से मेरी दिली ख्वाहिश दम तोड दे.

लोगों ने आपको ‘लव सेक्स और धोखा’ में देखा और आपके काम को सराहा भी, लेकिन इसके बावजूद भी आपको इस स्टेज पर पहुंचने में काफी वक्त लगा गया. ऐसा क्यों?

ये सही है, लेकिन ऐसा नहीं है कि इस फिल्म के बाद मेरे पास काम नहीं था और मैं घर बैठ गया था. उस दौरान भी मैं काम कर रहा था, हां उस समय मैं छोटे छोटे किरदार जरुर निभा रहा था लेकिन मैं इंडस्ट्री के बड़े और प्रतिभाशाली लोगों के साथ कम कर रहा था. मैंने अनुराग कश्यप के साथ ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ की, आमिर खान के साथ ‘तलाश’ की और वासन बाला के साथ एक कल्ट फिल्म ‘शैतान’ की थी. मैं इस बात से खुश था कि मैं हर तीन चार महीने में एक फिल्म में काम कर ले रहा था.

राजकुमार राव ने वेबसीरीज बोस डेड ऑर अलाइव में सुभाष चंद्र बोस की भूमिका निभाई है

राजकुमार राव ने वेबसीरीज बोस डेड ऑर अलाइव में सुभाष चंद्र बोस की भूमिका निभाई है

हालांकि मैं काम को लेकर थोड़ा लालची रहा हूं. मैं फिल्मों में बड़े रोल निभाने की ख्वाहिश रखता था और उस स्तर पर पहुंचने में मुझे थोड़ा समय लग गया. हालांकि मुझे इसको लेकर किसी तरह की कोई शिकायत नहीं है,क्योंकि मैं आखिर कुछ न कुछ तो कर ही रहा था. खाली नहीं बैठा हुआ था. मुझे मालूम था कि मुझे मेरी मंजिल एक दिन जरुर मिलेगी और किसी न किसी दिन मुझे ‘काई पो चे’ और ‘शाहिद’ जैसी फिल्में करने को जरुर मिलेगी. और ठीक ऐसा ही हुआ. ठीक दो साल बाद ‘काई पो चे’ और ‘शाहिद’ ने मेरा सबकुछ बदल कर रख दिया.

क्या एक कलाकार के लिए जरुरी है कि वो अपने करियर में अपने आप को हमेशा असुरक्षित महसूस करे जिससे कि उसको हमेशा अच्छा काम करने के लिए प्रेरणा मिलती रहे?

मैं अपने आप को जरा भी असुरक्षित महसूस नहीं करता. अगर आप किसी और कलाकार के लिए खुद को असुरक्षित महसूस करेंगे तो ये गलत होगा. पहले क्या होता था कि, फिल्मों के पहले मैं अपनी नई फिल्म और किरदारों को लेकर काफी नर्वस हो जाया करता था. अगर कोई दूसरे को लेकर असुरक्षित महसूस करे तो ये बात पूरे सेट के वातावरण को प्रभावित कर देती है और इससे आपका काम भी प्रभावित होता है. लेकिन कई लोग आपको लेकर असुरक्षित महसूस करते रहे हैं.

ऐसे कई वाकये हुए हैं जब असुरक्षा का माहौल रहा है. लेकिन इससे न तो किसी को फायदा मिला है और न ही किसी तरह की मदद मिली है. मैं भी इस तरह से काम करना पसंद नहीं करता हूं. अभिनय कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है ये केवल अपने सह कलाकार के सामने भावनाओं का प्रकटीकरण है. आपके पास जो है उसे आप पूरी तरह से देने की कोशिश करते है. ये कोई कुश्ती का मैच नहीं होता है कि जिसमें आप कहें कि ‘मैं दिखा दूंगा’ या ‘फाड़ दूंगा’. अभिनय विशुद्ध रुप से कला का एक नमूना है.

अनिल कपूर जैसे मंजे हुए कलाकार के साथ आपने दो फिल्में की हैं. उनके साथ काम करके आपको कैसा लगा?

बहुत शानदार रहा. करियर के इस मुकाम पर आकर अनिल कपूर जी जैसे शानदार कलाकार के साथ काम करने का अनुभव बेहतरीन रहा. उनके साथ ‘फन्ने खां’ और ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’ में काम करके उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला. उनकी काम करने की ऊर्जा किसी को भी प्रभावित कर सकती है.

ऐश्वर्या राय और अनिल कपूर के साथ राजकुमार राव की फिल्म फन्ने खान

ऐश्वर्या राय और अनिल कपूर के साथ राजकुमार राव की फिल्म फन्ने खान

अपने उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचने के बाद भी उनका अपने काम के प्रति लगाव और समर्पण देखने लायक है. अगर आप उनसे किसी भी शॉट को दोबारा देने का अनुरोध करेंगे तो खुशी खुशी उस शॉट को 50 बार तक देने के लिए तैयार हो जाएंगे जब तक कि वो शॉट बढ़िया से शूट न हो जाए. मैंने उनके साथ काम करने के दौरान कभी उनको थका हुआ नहीं देखा और न ही कभी आराम करते हुए देखा. हमेशा तैयार और ऊर्जा से भरपूर.

‘फन्ने खां’ फिल्म में आपका एक डॉयलाग है कि,आप ऐश्वर्या राय बच्चन के बहुत बड़े फैन हैं.क्या सच में ऐसा है?

मैं हमेशा से उनका बहुत बड़ा प्रशंसक रहा हूं. हम दिल दे चुके सनम और ताल के दिनों से मुझे उनका अभिनय काफी पसंद रहा है. मैं इस बात का शुक्रगुजार हूं कि मुझे उन जैसी बेहतरीन कलाकार के साथ काम करने का मौका मिला. सच कहूं तो मैं अपने आप को भाग्यशाली मानता हूं कि मुझे अनिल सर और ऐश्वर्या जी के साथ स्क्रीन स्पेस शेयर करने का मौका मिला.

क्या आप कभी डरते हैं?

नहीं, एक बार बस जैसे ही कैमरा शुरु हो जाता है वैसे ही में अपने आपको अपने किरदार में ढ़ाल लेता हूं. मैं अपने साथी कलाकारों को भी उसी नजरिए से देखता हूं.

कई सारे कलाकारों ने आपके साथ काम करने में दिलचस्पी दिखाई है. क्या कोई ऐसा कलाकार है जिसके साथ आप करना चाहते हैं?

मैं उन कलाकारों के साथ काम करना चाहता हूं जो कि अच्छा अभिनय करते हैं क्योंकि अच्छे कलाकारों के साथ काम करने से ही आप भी अच्छा काम सीखने और करने में सफल हो सकते हैंI हां, वैसे एक शख्स हैं जिनके साथ मुझे काम करने की बहुत इच्छा है. वो हैं महान एक्टर अमिताभ बच्चन जिनके साथ काम करने का मेरा सपना है.

आमिर खान, शाहरुख खान, मनोज वाजपेयी और अमिताभ बच्चन जैसे कलाकारों का अभिनय देख कर मैं बहुत प्रभावित हुआ था और उन्हीं की वजह से मेरा रुझान एक्टिंग की ओर बढ़ा. उनको देख कर मैं भी अपने आप को सिनेमा की दुनिया में दाखिल करवाना चाहता था.

सात सालों में आपने हिंदी सिनेमा में अपने लिए जगह बनायी है. आप उन लोगों को क्या संदेश देना चाहेंगे जो कि राजकुमार राव बनना चाहते हैं? मैं उनको कहना चाहूंगा कि वो राजकुमार राव बनने की कोशिश न करें वो वही बने रहें जो वो हैं. अपनी कला पर मेहनत करें और परिस्थितियों से कभी न हार मानें. आपका टैलेंट ही सब कुछ है और आपका टैलेंट ही आपको आगे ले जाएगा और आपको पहचान दिलाएगा बाकी कुछ और नहीं होता. किसी तरह का संपर्क,सोशल मीडिया, और पार्टियां आपको आपकी मंजिल तक नहीं ले जा सकती है केवल आपकी प्रतिभा ही आपको आगे बढ़ाने में मदद करेगी.

क्या आपको लगता है कि आप सही समय पर सिनेमा के क्षेत्र में हैं खास करके अब जब ये किरदारों पर आधारित हो गया है? हां, ये आप सही कह रहे हैं. यहां तक कि मनोज सर भी ये कहते हैं कि “तू बहुत लकी है कि अभी आया है,अगर मेरे समय आया होता तो बहुत पापड़ बेलने पड़ते” मैं फिल्म इंडस्ट्री में बिल्कुल सही समय पर हूं जहां अभी सभी के लिए जगह बनी हुई है. अलग अलग तरह की फिल्में बन रही हैं और डायरेक्टर्स नए नए प्रयोगों से साथ अपनी फिल्में बना रहे हैं. फिल्मों के लेखक भी अब नये नए तरीकों से कहानियां लिख रहे हैं और किरदारों के आधार पर भी कहानियां लिखी जा रही हैं.

राजकुमार राव की फिल्म न्यूटन भारत की तरफ से ऑस्कर के लिए भेजी गई थी

राजकुमार राव की फिल्म न्यूटन भारत की तरफ से ऑस्कर के लिए भेजी गई थी

इसलिए अब केवल बॉडी बिल्डिंग का जमाना नहीं है अब समय कलाकारों का है जो कि अलग अगल भूमिकाएं निभा सके. मैंने अलग अलग किरदारों को निभाने के लिए प्रशिक्षण लिया है और इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि वो किरदार कहानी का मुख्य लीड है या कि सपोर्टिंग किरदार. जब तक पर्दे पर मुझे अलग अलग किरदारों को निभाने का मौका मिलता रहेगा मैं खुश रहूंगा.

आपने कहा कि आप अपने आप को हीरो संबोधित किया जाना पसंद नहीं करते, ऐसा क्यों?

किसी ने मुझसे पूछा कि आप अपने आप को हीरो बन कर कैसा महसूस करते हैं. मैने उनको कहा कि, मुझे नहीं मालूम की हीरो कैसा सोचते हैं क्योंकि मैं हीरो नहीं हूं. हम लोग हीरो नहीं हैं, बल्कि हम लोग एक्टर्स और प्रोफेशनल्स हैं जिन्हें उनके काम के लिए मेहनताना मिलता है. हीरो तो कैलाश सत्यार्थी जैसे लोग हैं,जिन्होंने अपना पूरा जीवन ही समाज को बेहतर बनाने में लगा दिया. हम लोग केवल कलाकार है जो कि अपने आपको प्रोफेशनल्स की श्रेणी में रखते हैं न कि हीरो है. हीरो आप उनको कहकर संबोधित करते हैं जो कि देश के लिए समाज के लिए कुछ करते हैं जैसे सेना के जवान हम सब लोगों के लिए हीरो हैं जो हमारी रक्षा के लिए सीमा की सुरक्षा करते हैं.

भारतीय सिनेमा में आप महिलाओं को किस तरह से देखते हैं?

महिलाएं पुरुषों से ज्यादा श्रेष्ठतर हैं और पुरुषों की अपेक्षा वो इमोशनली ज्यादा मजबूत होती हैं. ये बात सुकूनदेह है कि आज कल महिलाओं को ध्यान में रख कर भी कहानियां लिखी जा रही हैं. चाहे वो ‘तुम्हारी सुलु’ हो,’लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ हो या ‘क्वीन’ सभी महिला प्रधान फिल्में हैं. मुझे वास्तव में बहुत खुशी होती है जब मैं इस तरह की फिल्में देखता हूं और इस बात की भी खुशी मिलती है कि इस तरह की फिल्मों को देखने वाले दर्शकों का एक बड़ा वर्ग भी उभरा है. ऐसी फिल्में बाक्स ऑफिस पर भी अच्छा कर रही हैं.

आपके लिए पैसे की कितनी अहमियत है?

मेरे पास इतना हो गया है जिससे सुविधायुक्त और आरामदेह जिंदगी आराम से जी जा सकती है. लालच का कोई अंत नहीं होता और आपके पास कितना भी पैसा हो जाए वो आपकी जरुरतों के लिए पूरा नहीं होता है. मैं अपने लिए एक अच्छी जिंदगी और अच्छी लाइफस्टाइल चाहता हूं जो कि पहले मेरे पास थी नहीं. अब मेरे पास पर्याप्त रुपया है जिससे की मैं खुद और अपने परिवार वालों की अच्छी लाइफ स्टाइल अफोर्ड कर सकता हूं. मेरी फैमिली भी अच्छा कर रही है और वो ये जानती है कि मैं यहां पर उनके लिए हूं. मैं अपनी भांजियों के लिए बेहतर जिंदगी चाहता हूं, और मैं चाहता हूं कि जो कुछ हम लोगों को नहीं मिल पाया वो उन्हें जरुर मिले.

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