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मैं खुद को एक एक्सीडेंटल गीतकार मानता हूं-राज शेखर

मुझे टेलीविजन ने बड़ा सहारा दिया. मैंने उनके लिए काफी स्क्रीनप्लेज और डायलॉग्स लिखे

Arbind Verma Updated On: Jun 07, 2018 04:52 PM IST

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मैं खुद को एक एक्सीडेंटल गीतकार मानता हूं-राज शेखर

राज शेखर...बॉलीवुड के एक उभरते हुए गीतकार जिन्होंने कभी ये नहीं सोचा था कि वो एक गीतकार के तौर पर अपनी पहचान इंडस्ट्री में बना पाएंगे लेकिन आज लोग उन्हें झुककर सलाम कर रहे हैं. ये उनकी मेहनत और अथक परिश्रम का फल है जिसके बूते वो लगातार सफलता की सीढ़ीयां चढ़ते जा रहे हैं. उनसे हुई बातचीत के कुछ अंश हम आपके साथ साझा कर रहे हैं.

वीरे दी वेडिंग में आपका एक गाना आया है, इसके बारे में हमें कुछ बताएं?

मैं बताना चाहूंगा कि ये गाना बहुत ही रियलिस्टीक है. जिसे लिखने से पहले मेकर्स ने कहा था कि ये गाना ड्रीम्स के बारे में होना चाहिए लेकिन रीयल भी लगे. तो मैंने उन्हीं के मापदंडों पर खरा उतरने की कोशिश की है जिससे कि वो सब कुछ इस गाने में आ पाए जो उन्होंने मुझे कहा है. ‘आ जाओ ना’ गाने को प्यार के बेशकीमती लफ्जों से पिरोया गया है. आपको बताना चाहूंगा कि इस गाने को आगे लाने में रिया कपूर का बहुत बड़ा हाथ रहा है. शाश्वत ने इस गाने का म्यूजिक दिया है जबकि अरिजीत सिंह ने इसे अपनी आवाज दी है.

 आपने अपने करियर की शुरुआत कैसे की?

पढ़ाई के दौरान मैं एक न्यूज चैनल में काम कर रहा था लेकिन न्यूज में मैं सहज नहीं था इसलिए फिर मैंने मुंबई का रूख किया लेकिन कुछ वक्त बाद मुझे मुंबई भी अच्छा नहीं लगा. फिर मैं वापस दिल्ली आ गया लेकिन मुंबई आना-जाना लगा रहा. फिर साल 2007 में मैंने डिसाइड किया कि अब मुंबई में ही रहना है. मैं कभी फिल्म का भक्त नहीं था. मैं छोटे से गांव से ताल्लुक रखता हूं. पहले दूरदर्शन पर जो भी फिल्में आती थीं, वही देखता था. मेरा गाने लिखने में रेडियो का बहुत बड़ा रोल रहा है और मैं रेडियो का बहुत शौकीन रहा हूं. मुंबई में डायरेक्टर के साथ असिस्टेंट का काम किया लेकिन बहुत ही बुरा असिस्टेंट था मैं. मैं इस दौरान कविताएं लिखता और लोगों को सुनाता रहता था फिर हिमांशु ने मुझसे कहा कि फिल्म के लिए लिखोगे? तो मैंने हां कह दिया. डमी लिरिक्स पर काम किया तो उन्हें पसंद आ गई. यहीं से मेरी शुरुआत हुई और फिर कई सारे गाने लिखता चला गया.

 आपको किन-किन मुश्किलों का सामना करना पड़ा?

मुझे काम मिलने में कभी दिक्कत नहीं हुई. लेकिन मैं कहना चाहूंगा कि हकीकत में मुझे नहीं पता था कि जिंदगी में क्या करना है? हां, मजा आता था कविताएं लिखने में. मैं खुद को एक एक्सीडेंटल लिरिसिस्ट मानता हूं. मुझे टेक्निकल प्रॉब्लम बहुत ज्यादा हुई. किरोड़ीमल कॉलेज में मैंने काफी नाटक किया था जिससे मुझे किरदार को समझने में दिक्कत नहीं होती. लेकिन आप अगर पूछें तो पहली फिल्म के बाद मुझे दिक्कत होनी शुरू हुई. कई जगह पर लोगों ने मेरे बारे में अच्छा कहा लेकिन मुझे नहीं पता था कि गाने किसे पिच करने हैं? कुछ फिल्में बनीं और कुछ तो अटकी हैं. मुझे टेलीविजन ने बड़ा सहारा दिया. मैंने उनके लिए काफी स्क्रीनप्लेज और डायलॉग्स लिखे. मैं बहुत शुक्रगुजार हूं टीवी का. 2013 में ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्स’ में काम मिला और फिर कारवां चल पड़ा.

 क्या आज आप अपने करियर को लेकर संतुष्ट हैं?

मैं संतुष्ट हूं भी और नहीं भी. दरअसल, मुझे एक बात का हमेशा डर रहता है. मुझे लगता है कि ये मेरा आखिरी गाना है इसके बाद मेरे पास कुछ नहीं होगा. मेरी गति तेज नहीं है. क्योंकि मैं ये सोचता हूं कि जल्दी पहुंचना जरूरी है या 5 मिनट देर से सही सलामत पहुंचना जरूरी है.

 मजनूं का टीलाक्या है? इसके बारे में भी हमें बताएं?

‘मजनूं का टीला’ बेसिकली एक कलेक्शन है, एक परफॉर्मेंस है, एक एक्सपीरियंस है जिसमें मेरी डायरी के कुछ पन्ने हैं. कई कविताएं जो मेरी प्यारी थीं, वो हैं. कई सारे अनयूज्ड लिरिक्स हैं जिन्हें मैंने ‘मजनू का टीला’ में इस्तेमाल किया. साथ ही इसमें बहुत सारी नहीं भेजी गई चिट्ठियां हैं, जो वास्तव में प्रेम पत्र थीं. कई झूठ हैं, जिन्हें सच करने की कोशिश की है मैंने. कई कहानियां हैं. एक लाइव गिटार है. कई वो चेहरे हैं जो मैं भूल जाता शायद. कुछ गाने हैं जो फिल्म के नहीं हैं.

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