S M L

रईस फिल्म रिव्यू: शाहरुख़ दमदार तो नवाज़ शानदार

ट्रेलर और पब्लिसिटी ने जो उम्मीदें जगाईं थीं, यह उनसे उन्नीस ही रह जाती है.

फ़र्स्टपोस्ट रेटिंग:

Updated On: Jan 25, 2017 03:43 PM IST

Ravindra Choudhary

0
रईस फिल्म रिव्यू: शाहरुख़ दमदार तो नवाज़ शानदार

‘रईस’ की शुरुआत में एक सीन है, जिसमें 10-12 साल का रईस अपनी कमजोर आंखों के लिये गांधी जी के स्टेच्यू से चश्मा उतार लेता है. शराबबंदी के नाम पर गुजरात में आज तक जो कुछ हो रहा है, यह सीन उस पूरे तंत्र पर एक टिप्पणी है.

तो जी खैर, विवादित कहानी, पाकिस्तानी कलाकार, मनसे की धमकी, ट्रेन में सफर, इतने सारे हो-हल्ले के बाद आखिरकार ‘रईस’ आ ही गया. लेकिन इस रईस को देखने के बाद मुंह से निकला- 'मियांभाई, जितने रईस दिखते हो उतने हो नहीं!'

90 के दशक की टिपिकल कहानी

‘रईस’ कहानी है अस्सी और नब्बे के दशक की, जिसमें रईस आलम (बेशक शाहरुख़! ये तो अब मंगल ग्रह वाले भी जान गये होंगे), अपनी मां के साथ बदहाल जिंदगी गुजार रहा है. वो बचपन से ही अवैध शराब के कारोबारी जयराज के लिये काम करने लगता है. इस काम में उसका दोस्त सादिक़ (मोहम्मद ज़ीशान अय्यूब) हर कदम पर उसके साथ है. धीरे-धीरे वो अवैध शराब के धंधे का बड़ा खिलाड़ी बन जाता है. इतना बड़ा कि चीफ मिनिस्टर के यहां भी उसकी सीधी पहुंच है.

Raees-Trailer

रईस और एसपी अंबालाल मजमूदार (नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी) के बीच चूहे-बिल्ली का खेल चलता रहता है. अपने गंदे धंधे के बावजूद रईस बस्ती वालों के लिये रॉबिनहुड है. जो बीच-बीच में अपने शराब के धंधे से समय निकालकर आसिया (माहिरा ख़ान) से इश्क भी लड़ाता रहता है.

ये भी पढ़ें: रईस शाहरुख खान पहुंचे दिल्ली, प्रशंसकों के हुजूम ने किया स्वागत

शाहरुख़ की मूवी में नवाज़ का दम

'रईस' पूरी तरह से शाहरुख़ की मूवी है. शाहरुख़ जो काम दशकों से करते आये हैं, वो काम उन्होंने बखूबी किया है, अपनी ‘वर्ल्ड-फ़ेमस’ एनर्जी के साथ.

उनके अलावा फिल्म की दूसरी खूबी हैं नवाज़ुद्दीन. नवाज़ ने अब वो मुकाम हासिल कर लिया है कि परदे पर उनकी एंट्री पर तालियां बजती है. फिल्म के सबसे अच्छे दृश्य वही हैं, जिनमें परदे पर नवाज़ मौजूद हैं.

ये भी पढ़ें: क्या शाहरुख़ बीजेपी के लिए सॉफ्ट टारगेट हैं?

माहिरा ने कुछ खास नहीं किया है, इसलिये उन्हें देखकर शक होता है कि शायद सिर्फ विवाद के लिए ही उन्हें इस फिल्म में लिया था. मोहम्मद ज़ीशान ने बढ़िया काम किया है. उनके रूप में हमें हीरो का एक परमानेंट दोस्त मिल गया है. नरेंद्र झा और अतुल कुलकर्णी भी अपने-अपने रोल में पूरी तरह फिट हैं.

raees

पैसा-वसूल लेकिन कुछ भी नया नहीं

कुल मिलाकर ‘रईस’ शाहरुख़ के फ़ैन्स के लिये एक पैसा-वसूल मूवी है. लेकिन यह एक आम गैंगस्टर/माफिया डॉन की मूवी बनकर रह जाती है, जो दर्शकों को कुछ भी नया नहीं परोसती.

ये भी पढ़ें: 'रईस' के नए गाने में ऊंची उड़ी शाहरुख की पतंग

इसकी कहानी तो नब्बे के दशक की है ही, प्रस्तुतीकरण भी नब्बे के दशक जैसा ही है. उतार-चढ़ावों से रहित एक सीधी-सपाट कहानी. इसके ट्रेलर और पब्लिसिटी ने जो उम्मीदें जगाईं थीं, यह उनसे उन्नीस ही रह जाती है. फिर भी शाहरुख़-नवाज़ की परफॉर्मेंस की वजह से ‘रईस’ को मिलते हैं पांच में से तीन स्टार!

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
KUMBH: IT's MORE THAN A MELA

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi