विधानसभा चुनाव | गुजरात | हिमाचल प्रदेश
S M L

Raabta Movie Review: पुनर्जन्म की फीकी कहानी में सुशांत-कृति की केमिस्ट्री का तड़का

सुशांत और कृति ने रूपहले पर्दे पर पहली बार एक साथ अभिनय किया है

फ़र्स्टपोस्ट रेटिंग:

Abhishek Srivastava Updated On: Jun 09, 2017 12:49 PM IST

0
Raabta Movie Review: पुनर्जन्म की फीकी कहानी में सुशांत-कृति की केमिस्ट्री का तड़का
निर्देशक: दिनेश विजन
कलाकार: सुशांत सिंह राजपूत, कृति सैनन, जिम सरभ और राजकुमार राव

राबता को देखने के बाद एक बात पूरी तरह से साफ हो जाती है- अब पुनर्जन्म की कहानी कहने के लिए फिल्मवालों को नए पैतरे ईजाद करने पड़ेंगे. जितनी उम्र पर्वतों की है शायद उतनी ही उम्र पुनर्जन्म की कहानियों की होगी.

हकीकत यही है कि इस फिल्म में कुछ भी नया नहीं है. पुनर्जन्म की प्रेम कहानी में अगर आपकी आंखों से एक बार आंसू तक न निकले तो वो प्रेम कहानी ही क्या है. इस फिल्म का निर्देशन करने वाले दिनेश विजन इसके पहले बदलापुर, कॉकटेल और हिंदी मीडियम सरीखी फिल्मों में बतौर निर्माता नजर आए थे लेकिन राबता देखने के बाद यही कहने का मन करता है कि बतौर निर्माता वो अच्छी फिल्में बनाते है, लेकिन यही बात मैं उनके निर्देशन के बारे में नही कह सकता हूं.

कहानी एक पंजाबी दिल फेंक मुंडा शिव यानी कि सुशांत सिंह राजपूत की है जिसे हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट मे एक बैंकर की नौकरी मिल जाती है. वहां पर उसकी मुलाकात आयशा यानी कृति सैनन से होती है और फिर चंद मुलाकात के बाद दोस्ती प्रेम में तब्दील हो जाती है. बाद में शराब के व्यापारी जाकिर मर्चेंट के रोल मे जिम सरभ की एंट्री होती है और उसके बाद चीजें बदलने लगती है. आयशा मर्चेंट की तरह खिंचती चली जाती है और जब एक सप्ताह के लिए शिव वियना मे बैंकर्स कांफ्रेंस के लिये जाता है तब उसकी जिंदगी पूरी तरह से बदल चुकी होती है. पुनर्जन्म की बात यही से शुरू होती है.

Raabta

अगर इस फिल्म में कुछ देखने लायक है तो वो है सुशांत और कृति की केमिस्ट्री. इन दोनों ने रूपहले पर्दे पर पहली बार एक साथ अभिनय किया है और दोनों बेहद सहज नजर आते है.

अभिनय के मामले मे भी सुशांत सभी से उन्नीस नजर आते है अलबत्ता इमोशनल सींस मे कृति की कमजोरी दिखाई देती है. जिम सरभ की शुरुआत तो बड़े ही शानदार तरीके से होती है लेकिन जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, वैसे-वैसे ही उनका किरदार स्टीरियोटाइप्ड होते चला जाता है. राजकुमार राव भी फिल्म में है और मुमकिन है कि उनके मेकअप की वजह से आपको उनको पहचान नहीं पाएं. वो एक बूढ़े के किरदार में नजर आते है लेकिन उनकी धार इस फिल्म में दिखाई नही देती.

फिल्म के पहले हाफ मे सुशांत और कृति के बीच की नोकझोक काफी मजेदार है लेकिन सच ये भी है कि एक कहानी को भी साथ में आगे बढ़ाना है. दिनेश इसके बाद लड़खड़ा जाते है और 154 मिनट की ये फिल्म बोर करने लगती है और इंतजार इसी बात का रहता है कि आखिर ये फिल्म खत्म कब होगी.

हद तब हो जाती है जब मध्यांतर के बाद पुनर्जन्म का सीक्वेंस शुरु होता है. इतिहास के किस युग में दिनेश हमको लेकर आए है ये आपको पता नहीं चल पाएगा. हां, एक बात पक्की है कि जमाना जो भी हो कबीले वालों की ड्रेसिंग सेंस कमाल की था.

RaabtaJim

फिल्म की सबसे बड़ी कमी ये है कि ये एक प्रेम कहानी है जिसमें थोक के भाव से इमोशन्स की गुंजाइश रहती है लेकिन ये सब कुछ फिल्म से नदारद है. फिल्म की शैली कुछ भी हो लेकिन जब तक किसी हुक के जरिए निर्देशक आपको फिल्म से जोड़ेगा नहीं तब तक फिल्म के प्रति आपका लगाव नहीं रहेगा. इस फिल्म मे वो हुक गायब है. जब तक फिल्म आज के जमाने में रहती है तब तक सुशांत का अभिनय इसे जिंदा रखता है लेकिन पुनर्जन्म में जाते ही इसको ऑक्सीजन की जरूरत पड़ जाती है.

पुनर्जन्म पर इसके पहले भी हम कई फिल्में देख चुके है. मैं सालों पहले बनी फिल्मों की बात नही करुंगा लेकिन यहां पर मैं 'ओम शांति ओम' की बात करूंगा. फराह खान ने 'ओम शांति ओम' को इतने मनोरंजक तरीके से बनाया था जिसकी वजह से लोगो ने इसे कई बार देखा. राबता में कहानी कहने का यही तरीका गायब है.

फिल्म के शानदार लोकेशन्स और गानों पर दिनेश की मेहनत नजर आती है लेकिन फिल्म को लिखने वालो सिद्धार्थ और गरिमा से वो काम नहीं निकाल पाए हैं. इस फिल्म में जो भी अच्छे पल हैं वो सुशांत और कृति के बीच मे है. इन दोनों के बीच जो डायलॉग है वो मजेदार है. इस फिल्म को देखने की वजह है सुशांत सिंह राजपूत इसके अलावा अगर आपने पहले से कुछ सोच रखा है तो वो रिस्क होगा.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi