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EXCLUSIVE : पद्मावती रिलीज नहीं हुई तो होगा 160 करोड़ के इश्योरेंस का भी नुकसान

'पद्मावती' के मेकर्स ने रिस्क को देखते हुए अलायंज कंपनी से 160 करोड़ रुपए का बीमा करवा रखा है

Updated On: Dec 09, 2017 08:15 AM IST

Bharti Dubey

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EXCLUSIVE : पद्मावती रिलीज नहीं हुई तो होगा 160 करोड़ के इश्योरेंस का भी नुकसान

'पद्मावती' न केवल एक रिस्की प्रोजेक्ट हो चुका है न सिर्फ फिल्ममेकर्स के लिए बल्कि उस बीमा कंपनी के लिए भी जिसने इस प्रोजेक्ट पर साथ में काम किया है.

अलायंस इंश्योरेंस के डायरेक्टर आतुर ठक्कर ने कहा कि, 'ये शुरुआत से ही बहुत मुश्किल प्रोजेक्ट था, आप सभी लोग तो जानते ही हैं कि फिल्म के सेट पर एक ग्रुप के जरिए अटैक किया गया था जिसके हमारे पास कुछ सिरीयस क्लेम भी थे.' हालांकि, आज जो ये फिल्म झेल रही है उसके सामने वो कुछ भी नहीं है.

शुरुआत से अलायंस 'पद्मावती' के साथ पूरी तरह से जुड़ चुका है और इस असोशिएशन के साथ बहुत सारे प्राइड हम ले रहे हैं. हमने न केवल प्रोडक्शन में रहते हुए इस फिल्म को इंश्योर्ड किया है बल्कि एक सेफ रिलीज तक के लिए कवर कर रहे हैं और फिल्म के रेवेन्यू को भी प्रोटेक्ट कर रहे हैं अगर रिलीज के वक्त भी कोई दिक्कत होती है तो.

बता दें कि 'पद्मावती' की रिलीज को न सिर्फ रोका गया है बल्कि इस फिल्म को सीबीएफसी से सर्टिफिकेट मिलने से पहले ही पांच प्रदेशों में बैन कर दिया गया है उनमें गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान हैं. ठक्कर ने कहा कि, 'प्रोड्यूसर्स के लिए ये सही नहीं है जिनके पास इस फिल्म के 160 करोड़ के रिस्क का जिम्मा है.' इससे फिल्म के टिकट सेल पर बहुत ही बुरा असर पड़ेगा.

अगर फिल्म को बैन कर दिया जाता है और सरकार इसकी रिलीज को सही नहीं ठहराती तो इस फिल्म का कोई प्रोटेक्शन नहीं है. हम उम्मीद कर रहे हैं कि सब कुछ ठीक हो जाए और फिल्म जल्द से जल्द रिलीज हो. साथ ही सबको ये लगे कि फिल्म बैन करने के लिए जिस मुद्दे के बारे में विवाद हो रहा है वो उसमें है ही नहीं.

यहां कुछ फिल्मों के लिस्ट है, जो राजनीति की वजह से रिलीज नहीं हो पाईं या फिर उनके लिए कॉन्ट्रोवर्सी में फंसना बड़ी सक्सेस की वजह बनी

गर्म हवा (1974)

8 महीनों के जद्दोजहद के बाद भी सीबीएफसी ने इस फिल्म को सेंसर नहीं किया था. लेकिन के ए अब्बास ने इस फिल्म को सिनेमा हॉल में लगाने से पहले सरकार के नेताओं और पत्रकारों को दिखाया था. इस फिल्म का प्रीमियर रीगल सिनेमा में किया गया था जबकि बाला साहेब ठाकरे ने उस वक्त ये धमकी दी थी कि अगर इस फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग की गई तो सिनेमा हॉल को जला दिया जाएगा.

प्लॉट: ये फिल्म इस्मत चुगतई के शॉर्ट फिल्म पर आधारित थी और नॉर्थ इंडियन मुस्लिम परिवारों के बंटवारे और तकरीबन महात्मा गांधी की हत्या के समय की चीजों का जिक्र इसमें किया गया था.

आंधी (1975)

ये फिल्म एक पॉलिटिकल ड्रामा थी जो कि उस वक्त की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके पति फिरोज गांधी की रियल लाइफ से इंस्पायर्ड थी. ये फिल्म उस वक्त रिलीज नहीं पाई थी क्योंकि इंदिरा गांधी सत्ता में थीं और उसके बाद इमरजेंसी लगा दी गई थी. लेकिन 1977 में कांग्रेस के हारने और जनता पार्टी के सत्ता में आने के बाद इस फिल्म को बाकायदा रिलीज मिली नेशनल टेलीविजन पर. ये फिल्म अवॉर्ड भी जीती थी.

शहंशाह (1988)

इस फिल्म की रिलीज से पहले कोर्ट ने कई एलिगेशन लगाए गए थे, कि अमिताभ बच्चन का नाम बोफोर्स घोटाले में शामिल है. दर्शक उनकी फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे क्योंकि अमिताभ की फिल्म दो सालों के लंबे इंतजार के बाद आ रही थी. फिल्म रिलीज हुई जिसे काफी प्रोटेस्ट के बावजूद भी बहुत ही अच्छा रिस्पॉन्स मिला. ट्रेड पंडितों ने कहा कि इस फिल्म की बॉक्स ऑफिस पर मदद इस प्रोटेस्ट ने कर दी.

खलनायक (1993)

संजय दत्त की ये फिल्म 1993 में हुए बॉम्ब ब्लास्ट में आए नाम की वजह से सुर्खियों में रही और इसकी रिलीज के वक्त दिक्कत हुई. लेकिन इसी कॉन्ट्रोवर्सी ने इस फिल्म को सफल बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की.

फायर (1996)

ये फिल्म एक लेस्बियन के रिश्तों पर आधारित थी जिसका हिंदुओं के एक गुट ने विरोध किया था. महेश भट्ट, दिलीप कुमार और जावेद अख्तर ने उस वक्त एक पीआईएल फाइल किया था और फिल्म को क्लियर भी करवा लिया लेकिन फिल्म के एक्जिबिटर्स ने मुंबई में सिनेमा हॉल से फिल्म हटा ली क्योंकि वो डरे हुए थे. उस वक्त इस फिल्म को कॉन्ट्रोवर्सी का फायदा नहीं मिल पाया और फिल्म बुरी तरह पिट गई.

फना (2006)

नर्मदा बचाओ आंदोलन को सपोर्ट करते हुए आमिर खान ने एक स्टेटमेंट दिया था जिसके बाद वो मुसीबत में आ गए. उस वक्त नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे. उस वक्त ये फिल्म रिलीज नहीं हो पाई और लोगों ने एक्टर्स का पुतला भी जलाया. लेकिन कॉन्ट्रोवर्सी की वजह से इस फिल्म को बड़ी मदद मिली और ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही.

जो बोले सो निहाल (2005)

जो बोले सो निहाल में फिल्माए गए दृश्यों से सिखों की भावना आहत हुई थी. बहुत बड़े तादाद में लोगों ने इस फिल्म का जालंधर और पंजाब के दूसरे शहरों में विरोध किया था. सिक्ख संगठनों ने सीबीएफसी को ये धमकी भी दी थी कि इस फिल्म का बहुत बड़े पैमाने पर फिर से प्रोटेस्ट किया जाएगा लेकिन बावजूद इसके ये फिल्म रिलीज हुई. इन प्रदर्शनों की वजह से कई सिनेमा हॉल से फिल्म को हटा लिया गया जिसकी वजह से फिल्म के प्रोड्यूसर को करोड़ों का नुकसान हुआ.

वॉटर (2005)

हिंदू संगठनों ने इस फिल्म की शूटिंग के दरम्यान प्रदर्शन किया. फिल्म के सेट भी तोड़ दिए गए. 31 जनवरी 2000 को उत्तर प्रदेश सरकार ने ये फैसला लिया कि इस फिल्म की शूटिंग को रोक दिया जाए. जिसके बाद इस फिल्म को श्रीलंका शिफ्ट कर दिया गया. उस वक्त शिवसेना अध्यक्ष बाला साहेब ठाकरे ने कहा था कि वो दीपा मेहता से बहुत ज्यादा नफरत करते हैं. इस फिल्म की डीवीडी को शिव सैनिकों ने जला दिया था. ये फिल्म 2007 में भारत में रिलीज हो पाई थी.

माय नेम इज खान (2010)

माय नेम इज खान की रिलीज से पहले शाहरुख खान पर ये आरोप लगाए गए थे कि उन्होंने आईपीएल की टीम में पाकिस्तानी क्रिकेटर्स को खेलने का मौका दिया. हालांकि शिवसेना के प्रोटेस्ट के बावजूद माय नेम इज खान रिलीज की गई. ये फिल्म थियेटर तक पहुंचने में कामयाब रही. इस फिल्म की रिलीज के लिए काफी भारी संख्या में पुलिस प्रोटेक्शन दी गई थी. फिल्म के वक्त बॉक्स ऑफिस को तोड़ने की भी कोशि की गई लेकिन इतने प्रदर्शन के बाद भी फिल्म बहुत बड़ी हिट साबित हुई और अवॉर्ड भी जीता.

बॉम्बे (1995)

बॉम्बे के दंगों पर बनी मणिरत्नम की ये फिल्म एक इंटर-रिलिजन लव स्टोरी थी. इस फिल्म को हिंदू और मुस्लिम नेताओं ने बंद कराया. मुस्लिम नेताओं ने कहा कि, 'इस फिल्म में मुंबई दंगों को गलत तरीके से पेश किया गया है जिसके बाद इस फिल्म को शिवसेना अध्यक्ष बाला साहेब ठाकरे को दिखाया गया और तब जाकर इस फिल्म को महाराष्ट्र में रिलीज किया गया.'

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