S M L

पद्मावत विवाद: 10 साल पहले ऐसा ही विवाद सुलगाकर ‘यशराज’ को चोट दी गई थी

माधुरी दीक्षित की कमबैक फिल्म के साथ भी कुछ वैसा ही हुआ था, जो आज पद्मावत फिल्म के साथ हो रहा है

Updated On: Jan 18, 2018 07:17 PM IST

Vivek Anand Vivek Anand
सीनियर न्यूज एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

0
पद्मावत विवाद: 10 साल पहले ऐसा ही विवाद सुलगाकर ‘यशराज’ को चोट दी गई थी
Loading...

2007 में बड़े धूम धड़ाके से माधुरी दीक्षित की कमबैक फिल्म आजा नच ले आने वाली थी. माधुरी दीक्षित के फिल्मी करियर के लिए ये बड़ी फिल्म थी. नब्बे के दशक के आखिर में माधुरी दीक्षित बॉलीवुड की अपनी पहली कामयाब पारी के बाद शादी कर चुकी थी. 2002 में संजय लीला भंसाली की ही फिल्म देवदास में चंद्रमुखी के यादगार रोल के साथ वो अमेरिका जा बसी थी.

बॉलीवुड में माधुरी का दौर खत्म हो चुका था. लेकिन 2007 में यशराज की फिल्म आजा नच ले के अपने मनमुताबिक स्क्रिप्ट और रोल में पूरी धमक के साथ अपने दूसरे दौर का दस्तक देने को तैयार थीं. बॉलीवुड में यशराज बैनर की साख और माधुरी के कमबैक की धाक ने फिल्म को पहले ही अच्छी खासी पब्लिसिटी दे रखी थी. रिलीज के पहले फिल्म के गाने पॉपुलर हो रहे थे. एक कामयाब फिल्म का माहौल करीब-करीब तैयार था कि तभी एक छोटी सा विवाद उठ खड़ा हुआ. बल्कि यूं कहें कि विवाद खड़ा किया गया.

यह भी पढ़ें: मैक्स मामला: परिजनों ने सीएम केजरीवाल से की मुलाकात

फिल्म के टाइटल सॉन्ग में एक शब्द को लेकर आपत्ति जाहिर की गई. दिल्ली के एक दलित नेता ने इस पर आपत्ति जताते हुए किसी न्यूज चैनल को ये बाइट दे दी कि गाने के बोल एक समुदाय विशेष का अपमान है. वो इस फिल्म का विरोध करेंगे. दिल्ली के एक कम चर्चित दलित नेता का बयान न्यूज चैनलों की बड़ी-बड़ी बेक्रिंग पट्टियों में चलने लगा. तकरीबन सभी न्यूज चैनल्स देखादेखी इस बिकाऊ खबर पर टूट पड़े.

न्यूज चैनल के स्क्रीन पर टू विंडो फॉर्मेट में एक विंडो में माधुरी का वो गाना बजता और दूसरे विंडो में दलित नेता का बयान. पहले पहल लगा कि हो सकता है कि ये फिल्म के प्रोड्यूसर्स का ही पब्लिसिटी स्टंट हो. ऐसे कामचलाऊ नुस्खे अपनाकर फिल्म को एक्स्ट्रा फुटेज दिलाने का चलन पहले से ही था. लेकिन मामला देखते ही देखते काफी बड़ा बन गया.

madhuri dixit aaja nach le

जिस तेजी से इस खबर को दूसरे न्यूज चैनलों ने लपका था उसी रफ्तार से टाइटल सॉन्ग के उस एक आपत्तिजनक शब्द का हवाला देकर विरोध करने वाले दूसरे दलित नेता सामने आ रहे थे. दलित राजनीति करने वाला ऐसा कोई बड़ा नेता नहीं बचा, जिसने दलित अपमान के इस मसले पर अपनी राय जाहिर कर फिल्म के विरोध में अपनी आवाज बुलंद नहीं की. मामला कुछ यूं हो गया था कि फलां दलित नेता ने बयान जारी कर विरोध जता दिया तो वो क्यों न करें. दलित राजनीति की आपसी प्रतिद्वंद्विता ने एक मसला जो राई था, उसे पहाड़ बना दिया.

मामला इतना उछला कि इसकी गूंज संसद तक में सुनाई दी. रामदास अठावले की रिपब्लिकन पार्टी ने एक शब्द पर आपत्ति की भरपाई पूरे देश में इसे बैन करके वसूलने की मांग की. राष्ट्रीय अनुसूचित आयोग ने गाने के गायक और गीतकार दोनों को तलब कर दिया. जगह-जगह पर फिल्म के खिलाफ प्रदर्शन होने लगे. फिल्म के पोस्टर और माधुरी के कटआउट जलाए जाने लगे. बयान जारी हुए कि जिस थियेटर में ये फिल्म दिखाई जाएगी उसे फूंक दिया जाएगा. यूपी की तत्कालीन मायावती सरकार ने अपने राज्य में फिल्म के रिलीज पर रोक लगा दी. रिलीज पर रोक की सुगबुगाहट दूसरे राज्यों में भी होने लगी.

फिल्म निर्माता के करोड़ों रुपए दांव पर लगे थे. माधुरी दीक्षित के कमबैक का सपना अटका पड़ा था. यशराज बैनर की साख पर बट्टा लगने के हालात थे और बवाल सिर्फ एक शब्द को लेकर था. आखिरकार यशराज बैनर को झुकना पड़ा. पहले तो यशराज बैनर्स ने बिना शर्त माफी मांगी.

कंपनी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि ‘इस महान देश के किसी भी व्यक्ति या समुदाय की भावनाओं को चोट पहुंचाने की हमारी कोई मंशा नहीं थी. अगर जाने-अनजाने इससे किसी की भावना आहत हुई है तो कंपनी इसके लिए माफी मांगती है. यशराज फिल्म्स भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार करने वाली पारिवारिक फिल्में बनाती है. वह कभी ऐसा कुछ नहीं करेगी, जिससे भारतीय आवाम के किसी भी हिस्से की भावनाएं आहत हों’.

यह भी पढ़ें: भारतीय रेल के 166 साल: ये सफर बहुत है कठिन मगर....

इस प्रेस नोट के साथ ही फिल्म के गाने से उस आपत्तिजनक शब्द को हटाकर दूसरा चलताऊ शब्द डाला गया. लेकिन तब तक मामला इतना आगे बढ़ चुका था कि इसका कोई खास फायदा नहीं हुआ. फिल्म का जितना नुकसान होना था वो हो चुका था. फिल्म नहीं चली. यशराज बैनर्स की साख को धक्का लगा ही माधुरी दीक्षित की कामयाब कमबैक का सपना भी टूट गया.

यशराज बैनर्स के माफी मांगने और आपत्तिजनक शब्द हटा लेने के बाद यूपी में लगी रिलीज पर रोक भी हटा ली गई थी लेकिन फिल्म नहीं चली. अब तकरीबन यही हालात फिल्म पद्मावत के हैं. फिल्म के निर्माता ने बार-बार सफाई दी है. बार-बार ये कहा गया है कि फिल्म में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसका विरोध किया जाए.

638924-padmavati-1-deepika123

निर्माता ने कहा है कि विरोध करने वाले पहले फिल्म तो देख लें उसके बाद ये तय करें कि उनका विरोध जायज है या नाजायज. विवाद को खत्म करने की गरज से सेंसर बोर्ड के आदेश पर फिल्म का नाम तक बदल दिया गया. लेकिन इन सबका कोई फायदा होता नहीं दिख रहा. अब बात अब फिल्म की कथावस्तु की नहीं रह गई है. बात है कि फिल्म को रिलीज नहीं होने देंगे तो नहीं होने देंगे.

इस सामुदायिक और सामूहिक जिद के आगे कोई संभावना नहीं दिख रही. इसी सामुदायिक और सामूहिक जिद के आगे राज्य सरकारों ने सरेंडर किया. गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों ने फिल्म के रिलीज पर रोक लगा दी. सुप्रीम कोर्ट ने नोटिफिकेशन जारी करके राज्यों के लगाए रिलीज पर रोक को खारिज कर दिया है. लेकिन विरोध करने वाले अब भी अड़े हुए हैं. रिलीज पर रोक हट भी गई तो तोड़फोड़ के डर से कौन थियेटर इसे अपने यहां रिलीज करेगा? पद्मावत का विवाद इतना आगे बढ़ गया है कि अब इससे हुए नुकसान की भरपाई संभव नहीं है.

0
Loading...

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
फिल्म Bazaar और Kaashi का Filmy Postmortem

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi