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ऑस्कर अवॉर्ड्स के लिए कल का दिन चुनौतियों से भरा होने वाला है

ऑस्कर अवॉर्ड्स की हो चुकी है शुरूआत

Abhishek Srivastava Updated On: Mar 04, 2018 03:42 PM IST

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ऑस्कर अवॉर्ड्स के लिए कल का दिन चुनौतियों से भरा होने वाला है

पिछले साल ऑस्कर समारोह के दौरान जब वॉरेन बेट्टी और फे डनवे ने सर्वश्रेष्ठ फिल्म के नाम की घोषणा की थी तब किसी को भी इस बात का अंदेशा नहीं था की समारोह के आखिर में ऑस्कर के 89 साल के इतिहास में सबसे बड़ी भूल होने वाली है. फिल्म ‘मून लाइट’ के बदले भूल से ‘ला ला लैंड’ को कुछ समय के लिए विजेता घोषित कर दिया गया था. लेकिन शायद ये गलती एक तरह से ऑस्कर के लिए खतरे की घंटी भी थी और उसके बाद से ऑस्कर के लिए परेशानियों का सिलसिला यहीं से शुरू हो गया था. मीटू कैंपेन, टाइम इज अप कैंपेन और और हार्वे वाइंस्टीन के बाद हॉलीवुड का स्वरूप अब पूरी तरह से बदल चुका है. इस बात में कोई शक नहीं है कि जब ऑस्कर के 90वें संस्करण की शुरुआत होगी तब सभी की निगाहें इसी बात पर टिकी होगी कि इन सबका का कितना असर ऑस्कर पर हुआ है. बहरहाल ऑस्कर के लिए चुनौती की सबसे कठिन घड़ी की शुरुआत उस वक्त ही हो गई थी जब ‘ऑस्कर सो वाइट कैंपेन’ का रूप वृहद हो गया था. कुछ समय पहले हुए गोल्डन ग्लोब्स अवॉर्ड ने इन सभी चुनौतियों को एक तरह से गले लगाया था लिहाजा कहने की जरुरत नहीं है कि दुनिया भर के लोग इसके सीधे प्रसारण के दौरान इसी बात को ढूंढने की कोशिश करेंगे कि ऑस्कर ने इन सभी चुनौतियो को गले लगाया या नहीं. अगर गोल्डन ग्लोब्स में ओप्रा विनफ्रे ने मी टू कैंपेन को गले लगाकर एक सन्देश दिया था तो वहीं दूसरी तरफ मशहूर अभिनेत्री नैतली पोर्टमैन ने भी सर्वश्रेष्ठ निर्देशकों की कैटेगरी पर तंज मारा था.

मी टू और टाइम इज अप कैंपेन की अहमियत

ऑस्कर हमेशा से ही रूढ़िवादी परम्पराओं पर विश्वास करता आ रहा है. ऐसे मौके बहुत ही कम देखने को मिले हैं जब ऑस्कर लीक से हटकर चला हो. ये सुनकर थोड़ा आश्चर्य होता है कि जब तिब्बत की स्वतंत्रता की बात रिचर्ड गियर ने अपने स्पीच में 1992 के ऑस्कर के दौरान उठाई थी तब ऑस्कर ने उनका बहिष्कार कर दिया था. अगले साल भी कुछ वैसा ही हुआ था जब पति-पत्नी की जोड़ी टिम रॉबिंस और सुजन सैरंडोन ने हैती के उन अवैध घुसपैठियों की बात उठाई जो एड्स बीमारी से पीड़ित थे. उनको भी इसकी सजा मिली थी. इससे इसी बात का अंदाजा हुआ था कि शो के ऑर्गेनाइजर्स का पलड़ा कुछ ज्यादा ही भारी था. लेकिन अब लगता है कि मी टू और टाइम इज अप कैंपेन के बाद चीजें थोड़ी बहुत बदली हैं और अब यही लगता है कि ऑर्गेनाइजर्स की ज्यादा कुछ चलने वाली नहीं है इस साल के ऑस्कर समारोह में. कईयों ने हार्वे वाइंस्टीन के साथ खुद को अलग कर लिया है लेकिन फिर भी हार्वे वाइंस्टीन की छाया से ऑस्कर को अलग रखना खुद में एक चुनौती होगी. एक ऐसे प्रोड्यूसर जिसकी फिल्मों को लगभग 300 बार ऑस्कर अवार्ड के लिए नामांकित किया गया है और स्टीवन स्पीलबर्ग और भगवान् के बाद एक ऐसा शख्स है जिसे लोगों ने अपनी स्पीच में धन्यवाद दिया है तो जाहिर सी बात है इससे अलग कर पाना अपने आप में एक पहाड़ चढ़ने वाली बात होगी.

महिला निर्देशकों को कब तक अलग-थलग रखा जाएगा

गोल्डन ग्लोब्स और बाफ्टा के दौरान ये चीज देखी गई थी लेकिन समय रहते ऑस्कर ने अपनी गलती सुधार ली. ग्रेटा गर्विग जो अपनी फिल्म लेडी बर्ड को लेकर सुर्खियों में है. उनको गोल्डन ग्लोब्स और बाफ्टा ने नजरअंदाज कर दिया था लेकिन ऑस्कर ने ये गलती सुधार ली जब इसके खिलाफ स्वर उठने लगे थे. नैतली पोर्टमैन ने इसको लेकर कटाक्ष भी किया था गोल्डन ग्लोब्स के दौरान लेकिन जब द शेप ऑफ वाटर के निर्देशक गुलिरमो देल टोरो ने अपने स्पीच में इसके बारे में कोई जिक्र नहीं किया तब ये उससे भी बड़ी अफसोस की बात थी. लेकिन ऑस्कर को इसके लिए आप शाबाशी नहीं दे सकते हैं बल्कि यही कह सकते हैं कि चलो इस बार ऑस्कर ने लाज तो रख ली और इसकी वजह ये है कि बीते साल तीन महिला डायरेक्टर्स की फिल्मों ने धूम मचाई थी लेकिन उसके बावजूद दो को नजरअंदाज कर दिया गया था नॉमिनेशंस के दौरान. ये दो डायरेक्टर्स वंडर वुमेन की निर्देशिका पैटी जेन्किन्स और मड बाउंड बनाने वाली डी रीस थी. ये शायद सुनने में बड़ा ही अजीब लगे लेकिन 89 साल के इतिहास में महज चार महिला निर्देशकों को बेस्ट निर्देशन कैटेगरी मे नामांकित होने का मौका मिला है और ट्रॉफी जीतने का मौका महज एक को जब सन 2008 में कैथरीन बिगेलो को फिल्म द हर्ट लॉकर के लिए अवार्ड मिला था. निगाहें इस बार इस केटेगरी पर जरूर होंगी क्योंकि ग्रेटा गेर्विग की मजबूत दावेदारी है. अगर ऑस्कर ग्रेटा को मिल जाता है तो इसका सीधा फायदा ऑस्कर के ब्रैंड इमेज को होगा.

विविधता को लेकर भी ऑस्कर के सामने बड़ी चुनौती है

87वें संस्करण में जब गोरो के हत्थे सारे अवॉर्ड चले गए थे तब धीरे-धीरे अवॉर्ड में डाइवर्सिटी की बात उठने लगी जो 88वें संस्करण में काफी बुलंद हो चुका था. इसका नतीजा ये था कि ऑस्कर को अपनी मेम्बरशिप बढ़ानी पड़ी और इसमें उन लोगों को शामिल किया गया जिनकी वजह से डाइवर्सिटी के सवाल उठाने वाले लोगों का मुंह बंद किया जा सके. इसका असर ऑस्कर के नॉमिनेशंस पर इस साल दिखा है. गेट आउट, मड बाउंड, रोमन जे इसरेल इस्क कुछ ऐसी फिल्में हैं जो डाइवर्सिटी के नाम पर ऑस्कर का जवाब है. अब देखना यही है कि इन फिल्मों से जो चेहरे अवार्ड्स के लिए नामांकित किए गए हैं, कितनों को मौका मिल पाता है ऑस्कर स्पीच देने का.

कुछ नामचीन लोगों की कुर्सियां खाली रहेंगी मी टू कैंपेन की वजह से

ऑस्कर समारोह के दौरान आगे की कुछ सीटें खाली रहेंगी. जी हां मी टू कैंपेन के बाद जो स्वर उठे थे उसकी आंधी में हॉलीवुड के कुछ एक नामचीन हस्तियां जिसमें डस्टिन हॉफमैन, केविन स्पेसी, जेम्स फ्रैंको, ब्रेट रैटनर और हार्वे वाइंस्टीन जैसे नाम शामिल थे ये सभी फना हो गए. ये कुछ एक ऐसे नाम थे जिनका ऑस्कर अवार्ड के ऑर्गेनाईजर्स के साथ सालों का गहरा नाता था. जेम्स फ्रैंको अपनी फिल्म द डिजास्टर आर्टिस्ट के लिए बेस्ट एक्टर कैटेगरी के लिए एक मजबूत दावेदार थे उनका नाम तक शामिल नहीं किया ऑस्कर ने अपने नॉमिनेशंस में. ये अपने आप में ऑस्कर की ओर से एक सन्देश था मी टू कैंपेन के लिए अपने समर्थन को लेकर. इन नामचीन लोगों की भरपाई ऑस्कर कैसे करता है इसको देखना अपने आप में दिलचस्प रहेगा.

क्या अतीत का भूत ऑस्कर को परेशान करेगा?

पिछले साल के बेस्ट एक्टर के विजेता को लेकर शायद ऑस्कर ने अपनी परेशानी जाहिर न की हो लेकिन उनकी परेशानी पर खुद पिछले साल के विजेता के सी अफ्लेक ने विराम लगा दिया था कुछ हफ्ते पहले. केसी ने इस बात की घोषणा कर दी थी कि वो ऑस्कर के दौरान बेस्ट एक्ट्रेस की ट्रॉफी के लिए मौजूद नहीं रहेंगे. इसकी पूरी कहानी कुछ यूं है कि जब पिछले साल केसी को बेस्ट एक्टर का खिताब मिला था तब उनको लेकर यौन उत्पीड़न की खबरें बाहर निकल कर आई थी. इस बार भी शायद कुछ ऐसा हो सकता है. इस बार बेस्ट एक्टर के लिए सबसे मजबूत दावेदारी गैरी ओल्डमैन की तरफ से है जिनकी फिल्म डार्केस्ट ऑवर में उनके विंस्टन चर्चिल के किरदार की चर्चा खूब हो रही है. कुछ साल पहले उनके यहूदी विरोधी यानि एंटी सेमिटिज्म टिपप्णी को लेकर उनकी काफी किरकिरी हुई थी. इसके अलावा उनकी पूर्व पत्नी ने भी उनके खिलाफ मारपीट के आरोप लगाए थे. अगर ऑस्कर को अपनी साख बचानी है तो मुमकिन है कि शायद इस साल गैरी ओल्डमैन अपने ट्रॉफी से हाथ धो बैठें.

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