S M L

17 साल से ऑस्कर्स में नहीं पहुंची है भारतीय फिल्म, आखिर क्यों

एक देश से सिर्फ एक ही फिल्म भेजी जा सकती है ऑस्कर्स में

FP Staff Updated On: Jan 30, 2018 07:03 PM IST

0
17 साल से ऑस्कर्स में नहीं पहुंची है भारतीय फिल्म, आखिर क्यों

हर साल जब भी ऑस्कर अवॉर्ड की बात होती है. भारत से सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा में भेजी जाने वाली फिल्म की बात होती है. हर साल सिर्फ एक फिल्म ही भेजी जाती है. दुनिया में सबसे ज्यादा फिल्में बनाने वाले बॉलीवुड से अभी तक कुल तीन फिल्में नॉमिनेट हुई हैं. इनमें अवॉर्ड एक को भी नहीं मिला है. हालांकि भारतीय परिपेक्ष्य में बनीं गांधी और स्लम डॉग जैसी कुछ फिल्मों के चलते रहमान, भानु अथैया और गुलज़ार जैसे कलाकारों को ऑस्कर मिल चुका है. क्षेत्रीय सिनेमा तो ऑस्कर्स की चर्चा से लगभग बाहर है. जान लीजिए वो नियम कायदे जिनके चलते हमारी फिल्में ऑस्कर्स से बाहर हैं.

साल 1957 के 20वें ऑस्कर्स अवॉर्ड्स समारोह में सर्वश्रेष्ठ विदेशी फिल्म कैटेगिरी की शुरुआत हुई. जिसके बाद दुनिया भर से इस समारोह में फिल्में आने लगी. एक देश से सिर्फ एक ही फिल्म भेजी जा सकती है. वैसे एक फिल्म को ऑस्कर के फाइनल नॉमिनेशन तक पहुंचने से पहले कई चरणों से गुजरना पड़ता है.

इन नियमों में सबसे मुख्य नियम फिल्म की क्वालिटी से जुड़े होते हैं. दरअसल ऑस्कर अवॉर्ड की इसी कारण से काफी आलोचना भी हुई है कि यह तकनीकी पहलुओं पर ज्यादा ध्यान देते हैं.

हर विदेशी फिल्म में इंग्लिश के सबटाइटल होना अनिवार्य है. इनके बिना फिल्म ऑस्कर ज्यूरी के सामने नहीं दिखाई जाती.

फिल्म को नॉमिनेट होने के लिए एक फीचर लेंथ में होना भी जरूरी है.

फिल्में दो प्रकार की होती हैं फीचर फिल्म और डॉक्यूमेंट्री फिल्म. इनकी कैटेगिरी के हिसाब से अलग-अलग लेंथ निर्धारित की गई हैं. फीचर फिल्म की लेंथ कम से कम 40 मिनट होनी चाहिए.

फिल्म को नॉमिनेट होने के लिए 35 एमएम या 70 एमएम के प्रिंट पर होना चाहिए. फिल्म का 24 एफपीएस या 48 एफपीएस डिजिटल सिनेमा फॉर्मेट में होना भी जरूरी है. साथ ही फिल्म का रेजोल्यूशन भी 2048x1080 से कम नहीं होना चाहिए.

इन सब तकनीकी पहलुओं पर खरा उतरने के बाद फिल्म को भेजा जाता है ऑस्कर ज्यूरी के सामने जहां लगभग 6,000 जज फिल्म का निरीक्षण करते हैं. इनमें से सबको ये फिल्म दिखाना एक बहुत बड़ा और खर्चीला काम है. लगान के लिए आमिर खान और आशुतोष गोवारिकर ने काफी समय अमेरिका में गुज़ारा था. अक्सर फिल्में सभी ज्यूरी के न देखे जाने के चलते बाहर हो जाती हैं. फाइनल नॉमिनेशन में दुनिया भर से आई इन फिल्मों में से पांच फिल्में चयनित होती हैं.

भारत की ओर से पहली बार फिल्म मदर इंडिया ऑस्कर के लिए नॉमिनेट हुई थी, लेकिन अफसोस के फिल्म जीत न सकी. 1957 में नॉमिनेट हुई फिल्म मदर इंडिया के बाद, 1988 में सलाम बॉम्बे नॉमिनेट हुई और साल 2001 में लगान नॉमिनेट हुई. 17 साल से भारत में बनी कोई फिल्म ऑस्कर्स तक नहीं पहुंच पाई है. ये इंतजार कब तक जारी रहेगा पता नही.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
गोल्डन गर्ल मनिका बत्रा और उनके कोच संदीप से खास बातचीत

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi