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Exclusive - बहुत जल्द ऑफ बीट फिल्में 'मेन स्ट्रीम' होने वाली हैं : पंकज त्रिपाठी

पंकज त्रिपाठी के जन्मदिन पर पढ़िए उनकी जिंदगी की कुछ अनसुनी दास्तान

Updated On: Sep 28, 2017 05:04 PM IST

Hemant R Sharma Hemant R Sharma
कंसल्टेंट एंटरटेनमेंट एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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Exclusive - बहुत जल्द ऑफ बीट फिल्में 'मेन स्ट्रीम' होने वाली हैं : पंकज त्रिपाठी

पंकज त्रिपाठी का आज जन्मदिन है और ये जन्मदिन उनके लिए बेहद खास बन गया है क्योंकि उनकी फिल्म न्यूटन इस साल भारत की तरफ से फॉरिन लैंग्वेज कैटेगरी में आधिकारिक तौर पर नॉमिनेटेड हुई है. इस मौके पर हमने एक्सक्लूसिवली बातचीत की इस फिल्म में आत्मा सिंह का रोल निभा रहे पंकज त्रिपाठी से

कितनी खास है न्यूटन आपके लिए ?

बहुत खास है, क्योंकि इस फिल्म में मुझे जो स्क्रीन टाइम मिला है वो मेरी अब तक की सभी फिल्मों में सबसे ज्यादा है. मेरी एंट्री 12-13 मिनट से होती है और क्लाइमैक्स से न्यूटन और मैं दो किरदार मुख्य रूप से खड़े हैं. उनके विचारों की लड़ाई चल रही है. न्यूटन और आत्मा सिंह दोनों सरकार के आदमी हैं लेकिन दो अलग-अलग आइडियोलॉजी हैं. 2017 में अगर आप आज न्यूटन को ढूंढेंगे तो नहीं मिलेंगे. जैसे सिस्टम में लोग होने चाहिए वो है न्यूटन और जो होते हैं वो हैं आत्मा सिंह, जो मेरा किरदार है. क्रिटिक्स और जनता दोनों ने फिल्म की तारीफ की है. बिजनेस भी ये फिल्म अच्छा कर रही है. हमारी फिल्मों की क्रिटिक्स तारीफ खूब कर देते हैं लेकिन देखता कोई नहीं है. मसान हमारी ऐसी ही फिल्म थी. तरीफ खूब हुई लेकिन देखी किसी ने नहीं. अगर इस तरह की फिल्में चलेंगी तभी प्रड्यूसर्स इस तरह की फिल्मों में पैसे लगा पाएंगे. इसलिए इन फिल्मों का कमर्शियली चलना भी बहुत जरूरी है. न्यूटन के ऑस्कर में जाने और बॉक्स ऑफिस पर चल जाने दोनों की मुझे बेहद खुशी है.

Pankaj Tripathi 2 आपको ये फिल्म कैसे मिली? रीयल लाइफ में आपका लुक इस फिल्म के आत्मा सिंह के किरदार से मैच नहीं होता है.

आत्मा सिंह के रोल के लिए डायरेक्टर अमित मसुरकर पहले किसी और को लेना चाहते. कुछ लोगों के साथ उन्होंने इसका लुक टेस्ट भी किया था. फिर उन्होंने मुझे बुलाया और ये स्क्रिप्ट दे दी. बताया भी नहीं कि किस रोल के लिए दी है. मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी और जो रोल संजय मिश्रा का है वो मुझे अपना रोल लगा. लेकिन उन्होंने मुझे बताया कि वो मुझे सिक्यूरिटी फोर्स वाले आत्मा सिंह का रोल देना चाहते हैं. वो वापस आया फिर सिर्फ आत्मा सिंह के सीन पढ़ने लगा. मुझे रोल पसंद आ गया. सब ओके हो गया और हम छत्तीसगढ़ के जंगलों में चले गए. कम सुविधाओं में कुछ टैलेंटेड लोगों एक फिल्म बनाई जो आपके सामने है.

बर्लिन में न्यूटन को अवॉर्ड मिला था उसका क्या एक्सपीरियंस रहा?

वो कहानी तो और भी मजेदार है हम सब बर्लिन गए. वहां हमारी फिल्म की 5 जगह स्क्रीनिंग हुई, उसके बाद हम सब अपने-अपने कामों से चले गए. बाद में हमें पता चला कि हमारी फिल्म को अवॉर्ड मिल गया. तो हमारी फिल्म की वहां जो इंडियन रिप्रजेंटेटिव थीं उन्होंने अवॉर्ड लिया और उन्होंने सबको बताया और ट्वीट किया. हमने नहीं सोचा थी कि ये फिल्म ऑस्कर में जाएगी, बर्लिन में अवॉर्ड मिल जाएगा. दृश्यम फिल्म्स बाद में आए. इरास बाद में आया. लोग देखते गए और जुड़ते गए.

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जिस तरह से बड़े बजट की मसाला फिल्में बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो रही हैं और छोटे बजट की फिल्में अच्छा कर रही हैं, उससे ऑफ बीट सिनेमा का आप किस तरह का भविष्य देखते हैं?

जब से नेटफ्लिक्स और अमेजॉन इंडिया में आए हैं तब से आप ये मान लीजिए कि अच्छे कॉन्टेंट के अच्छे दिन आ गए हैं, अब वो दिन दूर नहीं हैं जब ऑफ बीट फिल्मों से ऑफ हटने वाला है और ये अब मेन स्ट्रीम फिल्म्स बनने वाली हैं.

अभी भी इन फिल्मों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार हो रहा है?

हां, अभी भी हो रहा है. मुझे बड़ा खराब लगता है जब लोग साइड एक्टर, सपोर्टिंग एक्टर ये सब लिखते हैं. अरे हम सब एक्टर्स हैं. मसाले को कभी हम कहते हैं किचिन में कि ये साइड मसाला है, सपोर्टिंग मसाला है. अरे मसाला-मसाला होता है वैसे ही एक्टर- एक्टर. अब इस अच्छे कॉन्टेंट को कोई भी चीट नहीं कर सकता है. अगर अब फिल्म अच्छी नहीं है तो तुरंत थिएटर से ही रिव्यू हो जाता है कि फिल्म अच्छी नहीं है. ये इन फिल्मों के लिए बड़ा अच्छा वक्त है. ये कॉन्टेंट की जीत है.

अपनी फिल्म जर्नी के बारे में बताइए?

मैं बिहार से हूं. 12 वीं की पढ़ाई करने पटना आया था. छात्र नेता रहा. जेल भी गया. बहुत सारे काम किए हैं. भारत में सभी नदियों के किनारे गया हूं. पटना में रियल एस्टेट ब्रोकर का भी काम किया है. जमीन बेचने की कोशिश की लेकिन वो हमसे बिकी नहीं बिक जाती तो पटना में बिल्डर बना गया होता. लेकिन वो नहीं बिकी. इसलिए जो होता है अच्छे के लिए होता है. फिर एक्टिंग करनी थी तो दिल्ली में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाखिला ले लिया. रंगमंच से जुड़ गए और ये सब करते-करते आज यहां तक की यात्रा पूरी हो गई.

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आप रजनीकांत की फिल्म काला में भी रोल कर रहे हैं.

मैं रजनीकांत का फैन हूं वो हिंदुस्तान के अकेले सुपरस्टार हैं वो जैसे दिखते हैं आम जिंदगी में वैसे ही रहते हैं. लोग अपनी आइडैंटिटी को छुपाने के लिए काला चश्मा पहनकर घूमते हैं. इन लोगों को में एक भय है. ये उनकी शून्यता का प्रतीक है. हम एक्टर क्यों बने क्योंकि लोग हमें पहचानें लेकिन जब लोग हमें पहचानने लगे तो हम काला चश्मा पहन लें. इसलिए मैं रजनीकांत को पसंद करता हूं और जब मुझे उनकी फिल्म का ऑफर आया तो मैं तुरंत राजी हो गया.

अपनी आने वाली फिल्मों के बारे में बताएं?

आप मुझे फुकरे रिटर्न्स में देखेंगे. जूली 2 में मेरा बड़ा इंपोर्टेंट रोल है. उस फिल्म को ग्लैमर के सहारे बेचा जा रहा है लेकिन उसमें वैसा कुछ भी नहीं है.

ऑस्कर की क्या तैयारी है?

जी पूरी तैयारी है. फिल्म के प्रड्यूसर मनीष मूंदड़ा पूरी तैयारी में हैं. उन्होंने प्लान बनाया है कि वो तीन महीने पहले ही वहां चले जाएंगे और अपनी फिल्म को ज्यादा से ज्यादा लोगों को दिखाएंगे. बड़ी लॉबींग होती है वहां. ये विशुद्ध भारतीय फिल्म है. अब न्यूटन पूरे भारत की फिल्म है. इसलिए हमें सभी की दुआएं भी चाहिए.

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