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क्या आप शूल, सरफरोश और देव डी के नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी को जानते हैं?

सिनेमा के पर्दे पर नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी की मौजूदगी और कठिन मेहनत दर्शकों के दिल पर अपनी छाप छोड़ती है

Updated On: May 20, 2017 06:31 PM IST

Shenjit Basu

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क्या आप शूल, सरफरोश और देव डी के नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी को जानते हैं?

बदले की आग में जलता गैंगलॉर्ड फैजल खान, दिमागी फितूर का शिकार सीरियल किलर रमन राघव और अपने संकल्प में किसी पत्थर की तरह सख्त जान माउंटेन मैन दशरथ मांझी, हम उन्हें इन फिल्मी किरदारों के रूप में पहचानते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि मुन्नाभाई एमबीबीएस में उन्होंने एक पॉकेटमार और सरफरोश में एक आतंकवादी की भूमिका निभाई है?

सो आइए जरा गुजरे सालों की ओर नजर डालते हैं और देखते हैं कि भरपूर काबिलियत और बहुमुखी प्रतिभा के धनी सितारे नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी का फिल्मी सफर किन किरदारों के साथ शुरु हुआ. नीचे गुजरे बरसों के कुछ फिल्मी किरदारों का जिक्र किया जा रहा है. बहुत कम लोग जानते हैं कि ये किरदार भी नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने निभाये हैं:

वेटर- शूल (1999)

वासेपुर की गलियों में अपनी मौजूदगी से हड़कंप मचाने से बहुत पहले नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी रामगोपाल वर्मा की फिल्म शूल में वेटर की भूमिका में नजर आए थे. इस फिल्म ने नेशनल अवॉर्ड जीता.

हालांकि नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी का किरदार इस फिल्म में बहुत छोटा था लेकिन उस वक्त उन्हें शायद ही पता होगा कि जो आदमी (मनोज वाजपेयी) उन्हें आर्डर दे रहा है वही 13 साल बाद गैंग्स ऑफ वासेपुर में फिल्मी पर्दे पर उनके पिता की भूमिका निभाएगा!

आतंकवादी- सरफरोश (1999)

आमिर खान की मुख्य भूमिका वाली एक्शन फिल्म सरफरोश में नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने एक छोटी सी भूमिका निभाई, इतनी छोटी कि इधर आपकी आंख जरा सी झपकी और उधर पर्दे पर से किरदार गायब.

नवाज़ुद्दीन ने इस फिल्म में एक सजायाफ्ता आतंकवादी की भूमिका निभाई थी जिससे आमिर खान अपने सहयोगियों के साथ पूछताछ करते हैं. हालांकि इस किरदार में पर्दे पर नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी को बड़ा कम समय मिला लेकिन चंद सेकेंडों की इस मौजूदगी में भी वो दर्शकों को अपनी अभिनय-प्रतिभा का कायल बना लेते हैं.

असगर मुकदम- ब्लैक फ्राइडे (2007)

निर्देशक अनुराग कश्यप और नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने बीते सालों में कई दफे साथ-साथ काम किया है. दोनों ने साथ शुरुआत की अनुराग कश्यप की ही विवादित फिल्म ब्लैक फ्राइडे से. यह अनुराग कश्यप की बतौर डायरेक्टर शुरुआती फिल्म थी.

इस फिल्म में भी उन्होंने आतंकवादी की भूमिका निभाई लेकिन एक अल्पसंख्यक रुप में मुसलमानों की बेचारगी को लेकर पर्दे पर जो एकालाप (मोनोलॉग) दिखाया गया है वह नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी की अभिनय-प्रतिभा का लोहा मनवाने के लिहाज से काफी है.

पॉकेटमार – मुन्नाभाई एमबीबीएस (2003)

अपनी बाकी किरदारों से तनिक हटकर मुन्नाभाई एमबीबीएस में नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने पॉकेटमार की भूमिका निभाई जो एक स्टेशन पर सुनील दत्त का बटुआ (वॉलेट) चुरा लेता है. भीड़ के हाथों पिटाई होने पर चेहरे पर बेचारगी के भाव, गुनाहों की माफी हो गई. यह सोचकर चेहरे पर कृतज्ञता के भाव और आखिर को यह जानकर कि छलिया मुन्नाभाई डाक्टर बन गया है. सूरत पर हैरानी- नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी के हाव-भाव कमाल की तेजी से बदलते हैं.

नवाज़ुद्दीन का यह किरदार उनकी बहुमुखी अभिनय प्रतिभा का एक सबूत है. इस किरदार को देखकर आपको यह भी लगेगा कि पर्दे पर मिले थोड़े से समय का भी नवाज़ुद्दीन किस बखूबी से इस्तेमाल करते हैं.

वेडिंग सिंगर – देव डी (2009)

इस फिल्म में भी उनका किरदार अनूठा था. देव डी में नवाज़ुद्दीन के किरदार कोई संवाद अदायगी नहीं करता. उसे गीत गाना है लेकिन शादी के मौके पर दर्शकों के सामने एक गवैये के रुप में ‘इमोशनल अत्याचार’ सरीखा लोकप्रिय गीत गाने की इस भूमिका में भी उन्होंने दर्शकों का दिल जीत लिया. एक बार फिर साबित हुआ कि अनुराग कश्यप और नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी साथ-साथ हों तो यह जोड़ी कमाल करती है.

बेशक हम यह अफसोस पाल सकते हैं कि नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी को अपनी अभिनय प्रतिभा दिखाने का मौका देर से मिला लेकिन हमें इस बात का शुक्रगुजार होना चाहिए कि उनकी कोशिशें कामयाब हुईं.

किसी फिल्म में नवाज़ुद्दीन चाहे कैमियो (मेहमान) रोल में हों या कोई भरा-पूरा किरदार निभा रहे हों, पर्दे पर उनकी मौजूदगी और कठिन मेहनत दर्शकों के दिलों पर अपनी छाप छोड़ती ही है. इस मामले में फिल्म इंडस्ट्री में उनका कोई सानी नहीं है.

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