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‘मंटो’ का पहला गाना ‘मंटोइयत’ हुआ रिलीज, विवादों को दे सकता है जन्म

मंटो एक जगह पर कहते हैं कि जब हम गुलाम थे तो आजादी का ख्वाब देखते थे, अब जब आजाद हो गए तो कौन सा ख्वाब देखें

Updated On: Sep 14, 2018 11:40 AM IST

Arbind Verma

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‘मंटो’ का पहला गाना ‘मंटोइयत’ हुआ रिलीज, विवादों को दे सकता है जन्म

उर्दू के जाने-माने कहानीकार सआदत हसन मंटो की कहानी को अब रैप से जोड़ दिया गया है. इस रैप के जरिए ही उनके विचारों को सामने लाने की कोशिश की गई है. ‘मंटोइयत’ नाम का ये रैप इस फिल्म का पहला गाना है, जिसे दो दिन पहले ही रिलीज कर दिया गया है. लेकिन इस गाने की वजह से विवाद खड़ा हो सकता है.

मंटो का गाना मंटोइयत हुआ रिलीज

सआदत हसन मंटो पर आधारित फिल्म ‘मंटो’ का पहला गाना जो कि रैप वर्जन में है, उसे रिलीज कर दिया गया है. इस गाने के जरिए मंटो के विषयों को अलग अंदाज में पेश करने की कोशिश की गई है. साथ ही इसमें कई ऐसे शब्दों का भी इस्तेमाल किया गया है जिसकी वजह से साहित्य जगत में विवाद खड़ा हो सकता है. इस रैप को गाया है रफ्तार ने. रैप के बोल कई सामाजिक मुद्दों से जुड़े हुए हैं. इस गाने में नवाजुद्दीन कहते नजर आ रहे हैं ‘मैं भी एक इंसान हूं’.

नवाजुद्दीन ने किया है बेहतरीन काम

इस फिल्म के ट्रेलर में नवाजुद्दीन के संवाद और उनका अभिनय काफी प्रभाव डालता है. वो मंटो के समय के सच को बयां करते हुए दिखाई दे रहे हैं. मंटो एक जगह पर कहते हैं कि जब हम गुलाम थे तो आजादी का ख्वाब देखते थे, अब जब आजाद हो गए तो कौन सा ख्वाब देखें.

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