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कॉमेडी शो मुझे वाहियात लगते हैं: नाना पाटेकर

कॉमेडी शो में जाकर अपनी फिल्में प्रमोट करने का शौक नहीं

Updated On: Feb 24, 2017 07:57 AM IST

Runa Ashish

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कॉमेडी शो मुझे वाहियात लगते हैं: नाना पाटेकर

मुझे कॉमेडी शो हास्य नहीं बल्कि विभत्स लगते हैं. ऐसे प्रोग्राम में जाकर अपनी फिल्म का प्रमोशन करूं! इससे बेहतर यही होगा कि मेरी फिल्में न चलें.

जिस तरीके से ये बेहूदा हो जाते हैं मुझे बहुत गंदा लगता है. नाना पाटेकर हमेशा ही अपने संजीदा लुक और दमदार ऐक्टिंग के लिए जाने जाते हैं.

लेकिन इस बार लगभग दो साल के ब्रेक के बाद नाना वेडिंग एनिवर्सरी में माही गिल के साथ दिखाई देने वाले हैं.

फिल्म में शादीशुदा रिश्तों की गहराई समझाई गई है. फिल्मों में 45 साल वक्त बिताने के बाद नाना का कहना है, 'जब से मैं इस नाम फाउंडेशन से जुड़ा हूं फिल्मों से रुचि मेरी कम हो गई है.'

अगर मैं फिल्में ना भी करूं तो भी मुझे फर्क नहीं पड़ता. जो मेरे आस-पास गुजर रहा है उसे देख कर घुटन हो जाती है.

नाम फाउंडेशन के जरिए नाना और अभिनेता मकरंद अनासपुरे किसानों की माली हालत में मदद करते हैं. वे फंड जुटाकर किसानों की आत्महत्या रोकने का प्रयास करते हैं.

नाना ने कहा, 'वैसे तो ये देश में पिछले 70 सालों से हो रहा है लेकिन ये वारदातें होनी ही नहीं चाहिए. राजनेताओं का किसानों के प्रति रवैया मुझे ठीक नहीं लगता है.' हालांकि इस साल केंद्र और राज्य सरकार ने किसानों की मदद की है.

फिल्म वेडिंग एनिवर्सरी में नाना एक अजनबी की तरह से माही के घर में कुछ समय रुकते हैं. इस फिल्म के बारे में नाना कहते हैं, 'आजकल हम अपने आप से भी बात नहीं करते तो क्या किसी पड़ोसी से खुल कर बात करेंगे और रिश्ते बनाएंगे. पहले 50 लोगों का परिवार एक साथ रहता था और आज घर में मैं, मेरी पत्नि और दो बच्चे रहते हैं.'

स्क्वेयर फीट में फंसी जिंदगी

हम स्क्वेयर फीट में जीते हैं. हम खुल कर सांस भी नहीं ले रहे हैं. हमें मालूम ही नहीं कि जीना क्या है.

उन्होंने कहा, 'मैं हमेशा कहता हूं कि घरों की छप्पर रहने दो बस दिवारें गिरा दो, फिर पता चलेगा कि बगल में कौन रहता है.

इंडस्ट्री में नाना के 45 साल हो गए हैं. अपनी किसी पसंदीदा फिल्म के रीमेक बनाने के बारे में नाना कहते हैं ली गई सांस को मैं वापस नहीं ले सकता हूं.

रीमेक के खिलाफ हैं नाना

अगर मैं अपनी फिल्म प्रहार की बात करूं तो वो मेरे दिल के बहुत ही करीब है. क्योंकि मैंने ही इसे लिखा और निर्देशित किया है. हालांकि उसमें कई लोग जुड़े हुए थे. मैं रीमेक के खिलाफ हूं.

एक पुराना जो जेहन में रहता है वो रहता ही है. वैसे भी मां कभी रीमेक नहीं होती है.

यह पूछे जाने पर कि क्या ऐसा कोई रोल है जो आप करना चाहेंगे. नाना पाटेकर ने कहा, 'मैं विक्रम गोखले के एक नाटक 'बैरिस्टर' में एक्टिंग करना चाहूंगा.'

विजया मेहता ने 1985 में एक फिल्म भी बनाई थी. उस फिल्म का नाम राव साहेब था. तो वो नाटक मैं करना चाहूंगा. मैं वो किरदार करना चाहूंगा. हालांकि उसके लिए मुझे खूबसूरत दिखना जरूरी है. लेकिन नाटक में तो दूर से मुझे स्टेज पर देखेंगे तो मैं इतना बदसूरत नहीं दिखूंगा.

उन्होंने कहा, 'मैं भगत सिंह का किरदार करना चाहूंगा. वो मेरे दिल के बहुत करीब हैं. लेकिन अब मेरी वो उमर नहीं रही है. मेरा कोई हीरो है तो वो भगत सिंह हैं. मुझे संत ज्ञानेश्वर भी बहुत अच्छे लगते हैं.

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