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मीना कुमारी पुण्यतिथि विशेष: तुम क्या करोगे सुनकर, मुझसे मेरी कहानी

31 मार्च के ही दिन मीना कुमारी दुनिया से रुखसत हुई थीं

Updated On: Mar 31, 2017 09:44 AM IST

Nazim Naqvi

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मीना कुमारी पुण्यतिथि विशेष: तुम क्या करोगे सुनकर, मुझसे मेरी कहानी

बड़ी बेचारी है मीना कुमारी जिसको लगी है दिल की बीमारी - मीना कुमारी

मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री के बारे में बात करना अलग है, इंडस्ट्री के हीरो-हीरोइनों के बारे में बात करना अलग बात है और मीना कुमारी के बारे में बात करना एकदम अलग बात है.

बीते दिनों की इस अभिनेत्री का खयाल आते ही किसी की भी स्मृति में जो तस्वीर उभरती है वह लगभग एक सी है- एक भोला-भाला मगर दुखी चेहरा, खूबसूरत आंखें मगर भीगी हुई, होठों पे कांपती मुस्कराहट, आवाज में दर्द की शिद्दत.

मीना कुमारी सिर्फ 39 वर्ष की उम्र में चल बसीं. मौत की सामान्य वजह हद से ज्यादा शराबनोशी बताई जाती है. लेकिन 6 बरस की उम्र से फिल्मों में अदाकारी करने वाली और करीब 20-25 बरस तक अपनी शोहरत का सिक्का जमाने वाली इस अभिनेत्री को कौन से हालात शराब तक लेकर आए और उसके लिए जहर बन गए.

निदा फाजली का ही एक शेर बेसाख्ता याद आ रहा है-

उसके खो जाने का एहसास तो कम बाकी है जो हुआ, वो न हुआ होता, ये गम बाकी है

अचानक एक सवाल और उभर रहा है. मीना कुमारी की जिंदगी में जो लोग आए उनमें से वो कौन है जो इस शेर के ज्यादा करीब खड़ा हुआ मिलता है.

महजबीन को नहीं मिली किसी मोहब्बत  

महजबीन, जी हां...फिल्मी नाम से पहले यही नाम था मीना कुमारी का. मीना कुमारी की जिंदगी में कमाल अमरोही (जो उन्हें बचपन से जानते थे और जब वो 20 की हो गईं तब उनसे शादी की), धर्मेंद्र और गुलजार की बड़ी भूमिका थी.

सवाल हो कि इनमें सबसे ज्यादा मीना कुमारी के आखिरी वक्त तक कौन करीब रहा तो मीना कुमारी को जानने वाले इसके जवाब में गुलजार का नाम लेंगे. वही गुलजार जिन्हें वो अपना सबसे कीमती सरमाया... अपनी डायरियां, वसीयत में सौंपकर गईं.

धर्मेंद्र के साथ मीना कुमारी

ऐसा कहा जाता है कि धर्मेंद्र और मीना कुमारी के बीच काफी करीबी संबंध थे

धर्मेंद्र के साथ मीना कुमारी के संबंध फिल्म इंडस्ट्री के सबसे चर्चित संबंधों में से एक है. मीना कुमारी की जीवनी लिखने वाले मशहूर पत्रकार विनोद मेहता एक जगह लिखते हैं, 'बहुत से लोगों ने मीना कुमारी का शोषण किया. ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने आर्थिक रूप से उसका शोषण किया. और भी बुरे वह लोग हैं जिन्होंने उसका शारीरिक शोषण और संवेदनाओं का शोषण किया. उनके दिल पर न मिटने वाले जख्मों के निशां हमेशा के लिए छोड़ गए.'

धर्मेंद्र के बारे में विनोद मेहता लिखते हैं, 'उनके जीवन में कई मर्द थे, जिनमें धर्मेंद्र नंबर एक पर थे. ऐसा महसूस होता है उन्होंने भी खुद को प्रोड्यूसर्स की निगाहों में चढ़ाने के लिए मीना कुमारी का प्रयोग किया और जब यह काम पूरा हो गया तो उन्हें छोड़ दिया.'

तीसरे नंबर पर आता है कमाल अमरोही का नाम. महजबीन की जिंदगी में ये पहला मर्द था जिसे उसने बचपन से देखा था. पढ़ा-लिखा, तमीज और तहजीब का इंसान लेकिन ठेठ पुरुष, जिसमें मीना कुमारी ने अपनी दुनिया देखी. 20 साल की उम्र में जब वो एक मशहूर अदाकारा बन चुकी थी, तब उन्होंने कमाल अमरोही को अपने पति के रूप में चुना.

कमाल अमरोही से शादी मीना कुमारी की सबसे बड़ी गलती 

कमाल अमरोही के साथ मीना कुमारी

अच्छे दिनों में कमाल अमरोही के साथ ताश खेलते हुए मीना कुमारी

शायद यही मीना कुमारी की जिंदगी की सबसे बड़ी गलती साबित हुई. कई जबानों को जानने वाली, खुद एक शायर का दिल रखने वाली मीना कुमारी को एक पुराने खयालातों का शौहर मिला.

अमरोही ने उन पर पहरे बैठाने शुरू किए. सन 61 में मीना कुमारी ने कमाल का घर छोड़ दिया लेकिन 12 साल जिस प्रताड़ना को उन्होंने झेला, उसने इस अभिनेत्री को तोड़ कर रख दिया.

मीनाकुमारी की बहन खुर्शीद कहती हैं, 'मीना कुमारी कभी अपनी निजी जिंदगी उजागर करने में यकीन नहीं रखती थी. उन्होंने हमेशा कमाल को ‘कमाल साहब’ कहा. लेकिन लोगों ने उनके चेहरे पर चोट के निशान भी देखे और फीकी मुस्कराहट के साथ उस दर्द को छुपाने की उसकी कोशिश को भी देखा.'

विनोद अपनी किताब में ये भी जिक्र करते हैं, 'मीना कुमारी को बच्चों से बड़ा लगाव था. एक जगह जिक्र ये भी आता है कि किस तरह वह अपनी दोस्त नर्गिस के बच्चों का खयाल रखती थीं. मीना कुमारी को कमाल अमरोही से बच्चा न मिलने का बड़ा रंज था. दो ऐसी घटनाएं भी मिलती हैं जब उन्हें गर्भपात करवाना पड़ा.'

विनोद मेहता इस सच्चाई की छानबीन करते हुए इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि मीना कुमारी को अपने बच्चे की मां के रूप में देखना कमाल अमरोही को पसंद नहीं था. वो शिया वर्ग की उच्च ‘सैयद’ जाति से आते थे और मीना कुमारी एक डांसर की बेटी थी. ये फर्क उनकी मुहब्बत से बड़ा था शायद.

अमरोही की अय्याशी बनी शादी टूटने की वजह 

meena kumari

मीना कुमारी पर्दे पर बेहद खूबसूरत नजर आती थीं

लेकिन कमाल अमरोही का चरित्र कैसा था, इसके लिए चलिए निदा फाजली से गुफ्तुगू करते हैं. जो अपनी किताब ‘दीवारों से बहार’ में कमाल अमरोही का जिक्र कुछ यूं करते हैं.

निदा घड़ी के हिसाब से उनसे मिलने कमालिस्तान पहुंचते हैं और बराबर आधा घंटा उनके जागने का इंतजार करते हैं. वह लिखते हैं, 'कमाल दोपहर के खाने के बाद एक घंटे आराम के आदी थे. इस नींद से जागने के बाद वह फौरन किसी से मिलना पसंद नहीं करते थे.'

वे आगे लिखते हैं, 'आंख खुलते ही पहले वह अपने गुंबदनुमा कमरे में बिस्तर के सामने की कुर्सी पर किसी हसीना की मुस्कराहट का दीदार फरमाते थे फिर इंतजार करने वालों को अंदर बुलाते थे. यह हसीना और मुस्कराहट बारी-बारी अपना चेहरा और लिबास बदलती रहती थी.'

इसके पीछे जो वजह कमाल ने निदा को बताई वो भी अद्भुत तर्क था. निदा लिखते हैं, 'हर तीसरे-चौथे दिन चेहरों की तब्दीली के पीछे उनके आपने तर्क थे, 'साहब, एक चेहरे को बार-बार लगातार देखने से एक तो हुस्न की कशिश कम होती है. दूसरे, देखने वाले की बीनाई (दृष्टि) भी कमजोर होती है. एकरूपता को खुदा भी पसंद नहीं करता. इसलिए हर दौर में दुनिया पहले से जुदा दिखाई देती है.'

निदा आगे लिखते हैं, 'दोपहर की इस अल्पकालिक सौंदर्य-उपासना के लिए चार अच्छे चेहरे-मोहरे की कम उम्र की लड़कियों का वेतन डायरेक्शन के खर्चों में शामिल था.'

मुहब्बत बनी ताकत और कमजोरी  

meena kumari

ऐसे व्यक्ति के दिल में मीना कुमारी कितने दिन रह सकती थी. फिल्म इंडस्ट्री की सबसे कामयाब अदाकारा के लिए शराब मौत का बहाना बन गई. लेकिन 'साहब बीवी और गुलाम' की छोटी बहू शराब तक कैसे पहुंची, ये सच हर वो शख्स समझ सकता है जिसके अंदर संवेदनाएं हैं.

मीना कुमारी खुद एक जगह कहती हैं, 'मुहब्बत मेरी सबसे बड़ी कमजोरी है, और सबसे बड़ी ताकत भी, मैं मुहब्बत से मुहब्बत करती हूं...'

मुझे खुद अपना एक शेर याद आ गया जिसे मैं इस मिसाली औरत को समर्पित करने में फख्र महसूस कर रहा हूं.

हर एक शय से मोहब्बत है इसलिए मुझको मैं नफरतों के तसव्वुर (कल्पना) से बचना चाहता हूं...

ये लेख एक बेहतरीन अदाकारा, एक बेइंतहा संवेदनशील कवियत्री और फरिश्तों जैसी एक औरत को विनम्र श्रद्धांजलि है.

विनोद मेहता ने मीना कुमारी पर एक अद्भुत किताब लिखकर, जिसे ‘हार्पर कॉलिन्स' ने प्रकाशित किया है उनके प्रशंसकों को उनके कई रूपों से रुबरू कराया.

विनोद मेहता ने एक वादा निभाया. जो उन्होंने दस साल तक मीना कुमारी का मेकअप करने वाले मेकअप मैन से विदा लेते समय किया था, जिसने हाथ जोड़कर और आंखों में आंसू भरकर विनोद मेहता से कहा था, 'उनके बारे में अच्छी किताब लिखिएगा.'

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