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बॉलीवुड के गानों में पड़ा ‘क्रिएटिविटी’ का अकाल?

एक के बाद एक पुराने गानों का ‘रीक्रिएशन’ साबित नहीं हो रहा फायदे का सौदा

Updated On: Dec 22, 2016 12:56 PM IST

Hemant R Sharma Hemant R Sharma
कंसल्टेंट एंटरटेनमेंट एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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बॉलीवुड के गानों में पड़ा ‘क्रिएटिविटी’ का अकाल?

शाहरुख़ की लैला आ गई है. ‘रईस’ के कल लॉन्च हुए गाने के बोल पुराने हैं, अदाकारा नई हैं. सनी लियोनी ‘रईस’ की लैला बनकर अपनी अदाओं से सबको दीवाना बनाने निकल पड़ी हैं.

शाहरुख़ ‘रईस’ को सुपरहिट बनाने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं, लैला का ये ‘रिक्रिएशन’ शाहरुख़ की इन्हीं कोशिशों मे से एक है. सनी लियोनी जॉन अब्राहम की फिल्म ‘शूटआउट एट वडाला’ में भी लैला बन चुकी हैं लेकिन शाहरुख़ के लिए एक बार और लैला बनना भी पड़े तो सनी के लिए फायदे का ही सौदा समझिए.

रईस की लैला

आप 1980 में आई फिल्म ‘कुर्बानी’ की लैला को भी देख लीजिए फिर एक नए सवाल की तरफ बढ़ेंगे.

बॉलीवुड की फिल्मी कहानियों में क्रिएटिविटी का अभाव कई सालों से चलता आ रहा है पर अब साबित हो चला है कि गानों में भी अब रचनात्मकता का अकाल हो चला है...

कुछ दिन पहले श्रद्धा कपूर की फिल्म ‘ओके जानू’ का गाना हम्मा-हम्मा रिलीज हुआ, जिसका मुखड़ा तो पूरी तरह से 1995 में आई फिल्म ‘बॉम्बे’ की कॉपी है..

ओके जानू का हम्मा-हम्मा

बॉम्बे का हम्मा-हम्मा

पिछले हफ्ते रिलीज हुई है फिल्म ‘वजह तुम हो’. इस फ्लॉप फिल्म की बात करने की वजह उसकी स्टोरी या बॉक्स ऑफिस नंबर्स नहीं हैं, उसमें भी एक नहीं दो-दो मशहूर गानों का ‘रीक्रिएशन’ इस्तेमाल किया गया है

माही वे

2002 की कांटे का माही वे...

दिल में छुपा लूंगा

1977 में आई डार्लिंग डार्लिंग का गाना

शाहरुख़ ने अपनी फिल्म ‘रईस’ में रीक्रिएशन लैला से किया है तो उनको इसी दिन बॉक्स ऑफिस पर टक्कर देने आ रहे ऋतिक रोशन कौन से कम हैं...वो अपनी फिल्म ‘काबिल’ में उर्वशी रौतेला को ले आए हैं. लेकिन अफसोस कि बोल इस गाने के भी पुराने गाने से उठा लिए हैं.

हसीनों का दीवाना

1981 की याराना का सारा जमाना

अभी हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘तुम बिन 2’ में भी एक ऐसा ही प्रयोग किया गया था. लेकिन इसमें जगजीत सिंह की ऑरिजिनल आवाज का इस्तेमाल किया गया.

2016 रहा बिजनेस के लिए बुरा

साल 2016 बॉलीवुड के बिजनेस के लिए कुछ खास अच्छा नहीं गया. इसके कई कारण गिनाए जा सकते हैं लेकिन इनमें से सबसे बड़ी वजह ये भी है कि अब बॉलीवुड फिल्मों में देखने के लिए कुछ ज्यादा बचा भी नहीं है. बहुत कम फिल्में क्रिएटिविटी और अच्छी कहानी की कसौटी पर खरी उतरती हैं.

संगीत बॉलीवुड फिल्मों की सबसे बड़ी जान है. साल में 1-2 फिल्में म्यूजिकल हिट भी हो जाया करती थीं लेकिन ‘रीक्रिएशन’ के इस दौर में ऐसी उम्मीद रखना भी बेकार है.

बंद हो रहे हैं बड़े फिल्म प्रोडक्शन हाउस

क्रिएटिविटी का असर बिजनेस पर पड़ रहा है. इसलिए कई बड़े कॉरपोरेट प्रोडक्शन हाउस या तो बंद हो चुके हैं या फिर अपनी दुकान समेटने की तैयारी में हैं.

बिजनेस में घाटा क्यों हुआ कुछ लोग इसकी बड़ी-बड़ी रिपोर्ट्स बनाएंगे, ढेरों वजह भी गिना देंगे. लेकिन क्रिएटिविटी के अकाल का मुख्य मुद्दा वहां से भी गायब रहेगा. सक्सेस के लिए शॉर्टकट ढूंढ़ने वालों की नजर ऐसे काम के शब्दों पर आखिर क्यों पड़ेगी?

हम बॉलीवुड गानों में पड़ चुके क्रिएटिविटी के अकाल के इस बड़े सवाल को इंडस्ट्री तक लेकर भी जाएंगे और आपको बताएंगे कि इंडस्ट्री के बड़े दिग्गज इस बारे में क्या सोचते हैं. तब तक आप चाहें ‘रिक्रिएशन’ से मन बहलाएं या फिर इनके ऑरिजनल गानों को सुनें, बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा.

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