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आखिर क्यों कंगना न बोले तो ही अच्छा है?

करण ने ये भी कहा कि ये कंगना इतना बोलती क्यों है

Updated On: Jul 19, 2017 01:00 PM IST

Nidhi Nidhi

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आखिर क्यों कंगना न बोले तो ही अच्छा है?

करण जौहर और कंगना रनौत के बीच ‘नेपोटिज्म’ पर शुरू हुई बहस ऐसा लग रहा था शायद खत्म हो चुकी है. लेकिन इस बार न्यूयॉर्क में आईफा अवॉर्ड के मंच पर करण जौहर, सैफ अली खान और वरुण धवन ने कंगना रनौत का मजाक उड़ाया.

इस अवॉर्ड फंक्शन को करण जौहर और सैफ होस्ट कर रहे थे और तभी वरुण धवन स्टेज पर बेस्ट एक्टर कॉमिक रोल का अवॉर्ड लेने कि लिए पहुंचे. सैफ अली खान ने ‘नेपोटिज्म’ यानी भाई भतीजावाद या परिवारवाद की बात छेड़ते हुए कहा- 'आज तुम जो भी हो सिर्फ अपने पिता की वजह से हो'.

इस पर वरुण धवन ने सैफ को जवाब दिया 'और आप जो भी हैं अपनी मां शर्मीला टैगोर की वजह से हैं'. बात यहीं नहीं थमी, फिर करण जौहर ने कहा 'मैं इस इंडस्ट्री में अपने पिता की बदौलत हूं'. और फिर तीनों ने जोर से कहा 'नेपोटिस्म रॉक्स' सैफ और वरुण ने करण जौहर की फिल्म 'कभी खुशी कभी गम' का गाना गाते हुए कहा 'बोले चूड़ियां बोले कंगना' जिस पर करण जौहर ने तपाक से कहा 'कंगना ना ही बोले तो अच्छा है'.

Karan host IIFA

क्यों नहीं बोलें कंगना?

साथ ही करण ने ये भी कहा कि ये कंगना इतना बोलती क्यों है?

करण जौहर की इस बात से सवाल उठता है कि इतने दिनों पहले अभिनेत्री कंगना रनौत की बॉलीवुड में नेपोटिज्म को लेकर कही गई बात आजतक करण भूल नहीं पाए? या फिर वाकई बॉलीवुड में नेपोटिज्म पर पहली बार सवाल उठाने वाली अभिनेत्री से करण डर गए?

आखिर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के भीतर चाहे जितना भी भाई-भतीजावाद फैला हो लेकिन कंगना से पहले किसी ने इसपर बात करने की हिम्मत तो नहीं की. किसी अभिनेत्री ने तो कम-से-कम कभी नहीं.

चुकी कंगना हिंदी सिनेमा में आउटसाइडर की तरह आईं और फिल्मों में अपनी मेहनत की बदौलत ‘क्वीन’ कही जाने लगी इसमें तो जरा भी शक नहीं है. हिंदी सिनेमा के महानायक कहे जानेवाले अमिताभ बच्चन से लेकर आमिर खान तक ने कंगना की अदाकारी का लोहा माना है.

ताज्जुब तो तब होता है जब करण और सैफ के साथ वरुण धवन जिन्होंने अभी-अभी बॉलीवुड में पैर रखे हैं वो भी कंगना का मजाक उड़ा रहे हैं. जबकि वरुण के लुक पर चाहे उनके जितने भी फैन्स फिदा हों लेकिन वे अभी तक अपनी पहचान अपने एक्टिंग के दम पर तो नहीं बना सके. हालांकि ये बात वरुण को भी जल्द ही समझ आ गई और उन्होंने इसके लिए कंगना से माफी भी मांगी है.

ये भी पढ़ें: IIFA 2017: नेपोटिज्म पर कंगना का मजाक उड़ाने के लिए वरुण ने मांगी माफी

शायद सैफ की आखिरी फिल्म 'रंगून' भी कंगना के साथ आई थी. सैफ का एक के बाद एक फ्लॉप फिल्में देने के बावजूद इंडस्ट्री में टिके रहना आखिर किस तरफ इशारा करता है. विशाल भारद्वाज की फिल्म 'ओमकारा' से पहले शायद ही सैफ अपनी एक्टिंग की वजह से खुद की पहचान बना पाए हों.

हिंदी सिनेमा में अभिनेता और अभिनेत्रियों के बीच हो रहे भेदभाव पर तो कभी किसी ने सवाल उठाया ही नहीं फिर 'नेपोटिज्म' पर बोलने की तो बात ही दूर की है.

Kangana ranaut

आउटसाइडर के लिए रास्ते आसान नहीं होते

ये बहस तब शुरू हुई थी जब करण के ही शो 'कॉफी विद करण' पर कंगना ने उन्हें खुल कर कह दिया था कि आप 'आउटसाइडर' को मौका नहीं देते. करण जौहर ने कंगना रनौत पर टिप्पणी की थी उन्हें बॉलीवुड छोड़ देना चाहिए. और उन्हें विमेन कार्ड खेलना भी छोड़ देना चाहिए.

कंगना की उंगली पूरी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के ऊपर उठी थी इसलिए जाहिर सी बात है ये मामला सिर्फ करण और उनके बीच का नहीं रह जाता. इसके बाद कई फिल्मी सितारों ने इस पर अपनी राय रखी.

लेकिन कंगना ने नेपोटिज्म पर क्या कहा था ये एक बार ध्यान से सुनने की जरूरत है. कंगना ने ये भी साफ किया था कि 'भाई-भतीजावाद' से मतलब ये नहीं था कि किसी का बेटा या भतीजा. उनके अनुसार 'नेपोटिज्म' का मतलब अपनी पहचान के लोगों को भी मौका देना था.

कंगना से एक इवेंट में बॉलीवुड में नेपोटिज्म पर सवाल पूछे जाने पर उनका जवाब कुछ इस तरह था, 'its not an objection. if you are talking about nepotism its an observation...कंगना ने कहा, उन्होंने बॉलीवुड में नेपोटिज्म को लेकर इसलिए टिप्पणी की क्योंकि एक आउटसाइडर होने के नाते उन्होंने इसे महसूस किया है.

उन्होंने कहा, 'मैं देखती हूं आज अगर फिल्म इंडस्ट्री में डेमोक्रेटिक माहौल है तो वो हम जैसे लोगों के ही आगे आने की वजह से है. मैं देखती हूं आज न्यूकमर बड़े आराम से कहते हैं, ‘भई मैं इंग्लिश में नहीं बात कर सकता मैं हिंदी में ठीक हूं’ ये सब इसलिए कि जो रास्ते फिल्म इंडस्ट्री में बंद थे वो खुले हैं हमारी वजह से.'

इसके बाद कंगना ने ये भी कहा कि नेपोटिज्म पर भट्ट साहब क्या कहते हैं ये उनका नजरिया हो सकता है और हर किसी का अपना. मैं वो कह रही हूं जो मैंने महसूस किया है. कंगना ने कहा, आउटसाइडर क्या होता है और क्या है? हम सब एक ही जगह हैं और एक पर्पस के लिए काम कर रहे हैं. सिनेमा को बेहतर बनाने के लिए.

कंगना की इन बातों से उनका एक बेहतर नजरिया दिखता है. आप अपने विचार रखने के लिए आजाद हैं लेकिन तरीका हमेशा बेहतर चुनना होता है. किसी के व्यक्तिगत विचार पर उसका मजाक उड़ाने का मतलब यही है कि आप तर्कों से भाग रहे हैं.

Varun with award

ह्यूमर के नाम पर किसी के नजरिए की बेइज्जती

ऐसा नहीं है कि ये अभिनेता बॉलीवुड में सिर्फ 'नेपोटिज्म' की बदौलत टिके हैं, ज्यादा समय तक  बिना अच्छी एक्टिंग के अपनी पहचान बनाना मुश्किल ही होता है. हिंदी सिनेमा में आलिया भट्ट के आते ही उनका ठीक-ठाक मजाक बना था लेकिन वक्त के साथ आलिया की मेहनत उनकी फिल्मों में नजर आने लगी. ये शायद वो उदाहरण है जो नेपोटिज्म के धब्बे को कहीं पीछे छोड़ता है.

लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि इनके फिल्मों तक पहुंचने के रास्ते जरूर आसान हो जाते हैं. और आउटसाइडर को एक फिल्म में रोल मिलने के लिए कई पापड़ बेलने पड़ते हैं.

खैर नेपोटिज्म पर बात करें तो बहुत दूर तक जाएगी. बात किसी भी टॉपिक पर हो, हेल्दी डिबेट होने की जरूरत है. ह्यूमर के नाम पर तीन लोग जमा हो जाएं और अपनी ही इंडस्ट्री से किसी का मजाक उड़ाएं, इससे तो वही दिखता है जो करण, सैफ और वरुण आपस में एक-दूसरे को कहते हुए हंस रहे थे. 'नेपोटिज्म रॉक्स'.

आइफा अवार्ड में होस्ट करते हुए ये फिल्मी सितारे एक दूसरे का पहले भी मजाक उड़ाते रहे हैं. लेकिन उनका आपस में एक दूसरे की फिल्मों को लेकर होता था. आइफा को होस्ट करते हुए शाहरुख ने कहा था कि वो शादियों में नाच कर पैसे कमाते हैं.' इससे भी कहीं ज्यादा ह्यूमर और मजाक चलता रहा है. लेकिन तब टारगेट हमेशा ऑडियंस होती थीं.

लोगों को इंटरटेन करना और खुद इंटरटेन होने के लिए किसी का व्यक्तिगत रूप से और वो भी उसके विचार का मजाक उड़ाना ह्यूमर तो नहीं कहलाएगा. रही बात सैफ की तो वे अपनी बेटी सारा अली खान को लॉन्च करने जा रहे हैं.

सारा की फिल्मों में आने से पहले की पहचान सिर्फ यही है कि वो सैफ की बेटी हैं. ऐसा नहीं कहा जाएगा कि किसी छोटे शहर की कोई न्यूकमर लड़की फिल्म में आ रही है. और उन्होंने अगर अपनी फिल्म में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया तो आगे मौका मिलेगा भी या नहीं. तो इस परिवारवाद को लेकर सैफ तो कुछ नहीं कह सकते.

kangana ranaut

कंगना ने हमेशा खुद को साबित किया है

अब होंगे करण बड़े डायरेक्टर और प्रड्यूसर या फिर सैफ बड़े फिल्मी सितारे लेकिन इस तरह किसी के आउटसाइडर होने के संघर्ष को वे नकार तो नहीं सकते.

एक महिला एक्टर होने के नाते फिल्मी जगत में खुद को साबित करना बड़ी चुनौती बन जाती है. कंगना रनौत एक ऐसी ही अभिनेत्री हैं जिनका विवादों से पीछा नहीं छूटता है लेकिन हर कॉन्ट्रोवर्सी के बाद कंगना अपने शानदार अंदाज में वापसी करती हैं. कंगना के साथ एक और सबसे अच्छी बात है कि उन से जुड़ी कॉन्ट्रोवर्सी हो या फिर उनका किसी और पर लगाया गया आरोप, वो कभी किसी बात को अधूरा नहीं छोड़तीं. वो हमेशा खुल कर अपने विचार रखती हैं.

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