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Open Letter : नेपोटिज्म पर कंगना का सैफ को करारा जवाब

नेपोटिज्म पर कंगना का सैफ को खुला पत्र

Akash Jaiswal Updated On: Jul 22, 2017 02:14 PM IST

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Open Letter : नेपोटिज्म पर कंगना का सैफ को करारा जवाब

नेपोटिज्म को लेकर विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. आईफा अवार्ड्स में नेपोटिज्म को लेकर कंगना पर किए गए मजाक के लिए करण जौहर, वरुण धवन और सैफ अली खान ने माफी मांगी थी. अपनी गलती को कबूल करने के साथ ही सैफ ने नेपोटिज्म को लेकर कई सवाल खड़े किए.

इस पर अब कंगना ने भी एक ओपन लैटर लिखकर पब्लिकली सैफ को अपना जवाब दिया है. मिड-डे में छपे इस लैटर में कंगना न कहा है, 'नेपोटिज्म' बहुत बार निष्पक्षता और तर्क को अनदेखा कर देता है.

कंगना ने 'विवेकानंद', 'आइंस्टाइन', 'शेक्सपियर' जैसे विख्यात हस्तियों का भी उदाहरण दिया है.

नेपोटिज्म को लेकर सैफ के कमेंट्स से कंगना बहुत ही दुखी है. उनका मानना है कि इससे पहले जब करण ने नेपोटिज्म पर ब्लॉग लिखा था तभी भी वो काफी परेशान हुई थी.

कंगना के लैटर का रूपांतरण

भाई-भक्तिवाद पर चर्चा करना बहुत कठिन है, लेकिन स्वस्थ है. हालांकि इस विषय पर कुछ दृष्टिकोण मुझे अच्छे लगे पर वहीं कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने मुझे कुछ परेशान कर दिया. सैफ द्वारा लिखा ओपन लैटर को पढ़कर मेरी सुबह की शुरुआत हुई.

kangana with saif

इससे पहले करण जौहर ने नेपोटिज्म पर ब्लॉग लिखा था जिससे मैं बेहद परेशान हुई थी. उन्होंने अपने ब्लॉग में ये तक डिक्लेयर कर दिया कि इंडस्ट्री में सफलता हासिल करने के लिए सिर्फ टैलेंट ही नहीं बल्कि और भी कई क्राइटेरिया हैं.

यह बिल्कुल अजीब है, श्री दिलीप कुमार, श्री के आसिफ, बिमल रॉय, सत्यजीत रे, श्री गुरु दत्त और कई अन्य लोगों की पसंद को बदनाम करने के लिए, मुझे नहीं पता कि उन्हें गलत कहें या नहीं. लेकिन, उनकी प्रतिभा और असाधारण क्षमता हमारे समकालीन फिल्म व्यावसाय की रीढ़ की हड्डी बन चुकी है.

यहां तक कि आज के समय में, बहुत सारे उदाहरण हैं जहां यह बार-बार साबित हुआ है कि ब्रांडेड कपड़े, पोलिश्ड एक्सेंट, और एक अच्छी अपब्रिंगिंग के अलावा, धैर्य, कड़ी मेहनत, परिश्रम, सीखने की उत्सुकता और ह्यूमन स्पिरिट की विशाल शक्ति का दुनिया भर में कई उदाहरण हर क्षेत्र में, इस बात की एक गवाही है.

मेरे प्रिय मित्र सैफ ने इस विषय पर एक पत्र लिखा है और मैं अपना दृष्टिकोण साझा करना चाहती हूं. मेरा अनुरोध है कि लोगों को इसे गलत तरीके से नहीं समझना चाहिए और हमें एक दूसरे के खिलाफ खड़ा नहीं करना चाहिए.

ये दो व्यक्तियों के बीच विचारों का लेन-देन है ना कि दो लोगों के बीच कोई संघर्ष.

सैफ आपने अपने पत्र में कहा था, "मैंने कंगना से माफी मांगी, और मुझे कोई भी स्पष्टीकरण नहीं देना है, और यह मुद्दा खत्म हो गया है" लेकिन यह मेरी अकेले की समस्या ही नहीं है.

नेपोटिज्म एक ऐसी प्रक्टिस है जहां लोग किसी की बुद्धिमत्ता को नजर अंदाज करके भावनाओं से काम लेते है.

ह्यूमन इमोशन्स पर चल रहा बिजनेस किसी भी अच्छे वैल्यू सिस्टम का नहीं कहलाएगा. फिर भले ही उससे कितना भी मुनाफा हो जाए.

वो तो असल में प्रोडक्टिव भी नहीं हो सकते हैं और 1.3 अरब से अधिक लोगों के राष्ट्र की वास्तविक क्षमता को टैप नहीं कर सकते हैं.

नेपोटिज्म कई स्तरों पर, निष्पक्षता और तर्क की परीक्षा में असफल रहा है. मैंने इन वैल्यूज को उन लोगों से प्राप्त कर लिया है जिन्होंने बड़ी सफलता पाई है और एक उच्च सत्य की खोज की है, ये मान सार्वजनिक डोमेन में हैं, और उनके पास कोई भी कॉपीराइट नहीं है.

विवेकानंद, आइंस्टीन और शेक्सपियर जैसे ग्रेट्स कुछ चुनिंदा लोगों में ही नहीं थे. वे पूरी मानवता से संबंधित थे और उनके काम ने हमारे भविष्य को आकार दिया है. अब हमारा काम, आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को आकार देगा.

आज, मैं इन वैल्यूज के लिए खड़े रखने के लिए इच्छाशक्ति अफोर्ड कर सकती हूं, लेकिन कल शायद मैं अपने अपने बच्चों के स्टारडम का पूरा करने में मदद कर सकती हूं.

लेकिन ऐसे में मुझे इस बात का अंदाजा होगा कि मैं एक व्यक्ति के रूप में असफल हुई हूं. पर वो वैल्यूज कभी भी विफल नहीं होंगे और वे इसी तरह मजबूती से खड़े रहेंगे, भले ही हम चले गए होंगे.

जैसे मैंने कहा,  हम उन लोगों हैं जो आगामी पीढ़ियों के भविष्य को आकार देंगे. इसलिए, हमें उन सभी को स्पष्टीकरण देना जरुरी है जो इन वैल्यूज को सीखना चाहते हैं.

आपके पत्र के दूसरे भाग में, आप जेनेटिक्स और स्टार बच्चों के बीच के रिश्ते के बारे में बात करते हैं, जहां आपने भाई-भतीजावाद पर जोर दिया. आपने कहा कि नेपोटिज्म एक इन्वेस्टमेंट है ट्राइड और टेस्टेड जीन

पर. मैंने अपनी जिंदगी का एक बड़ा हिसा जेनेटिक्स की पढाई में बिताया है और मैं हैरान हूं कि आप आर्टिस्ट्स की तुलना जेनेटिककली हाइब्रिड रेसहॉर्सेज से कैसे कर सकते हैं.

क्या आप ये कह रहे हैं कि कलात्मक कौशल, कठोर परिश्रम, अनुभव, एकाग्रता, उत्साह, उत्सुकता, अनुशासन और प्यार, परिवार जीन के जरिए विरासत में प्राप्त किया जा सकता है? अगर ऐसा है तो मुझे एक किसान की तरह घर वापस चले जान चाहिए. मुझे आश्चर्य है कि मेरे जीन-पूल से कौन सी जीन ने मुझमें ये उत्सुकता दी है कि मैं मेरे पर्यावरण को ओब्सर्व करू और लगन के साथ अपने इंटरेस्ट को पूरा करने पर काम करू.

kangana ranaut

आप यूजीनिक्स के बारे में भी बात करते थे - जिसका अर्थ है मानव जाति के प्रजनन को नियंत्रित करना. अब तक, मुझे विश्वास है कि मानव जाती ने डीएनए नहीं पाया है जो महानता और उत्कृष्टता को पास करे.

यदि ऐसा होता है, तो हम आइंस्टीन, दा विंची, शेक्सपियर, विवेकानंद, स्टीफन हॉकिंग, टेरेंस ताओ, डैनियल डे-लुईस, या गेरहार्ड रिक्टर की महानता को दोहराना पसंद करेंगे.

आपने यह भी कहा कि मीडिया को दोषी ठहराया जाना है, क्योंकि यह भाई-भक्तिवाद का असली झंडावाहक है. यह एक अपराध की तरह लग रहा है, जो सत्य से बहुत दूर है.

नेपोटिज्म ह्यूमन नेचर की एक कमजोरी है. ये हमारे आंतरिक प्रकृति से ऊपर उठने के लिए इच्छा शक्ति और ताकत के लिए एक चैलेंज है जिसमें हम कभी-कभी सफल हो जाते हैं और कभी नहीं भी होते है.

कोई किसी के भी सिर पर बंदूक रख कर ऐसे टैलेंट को हायर करने नहीं कह रहा जिसपर उसे विश्वास ना हो. इसलिए आपको डिफेंसिव होने की जरुरत नहीं है.

वास्तव में, इस विषय पर मेरी सभी बातों का सबटेक्स्ट ये है की मैं बाहरी लोगों को ऐसे रास्ते चुनने के लिए प्रोत्साहित करू जिसे बहुत ही कम लोगों ने चुना है. धमकाना, ईर्ष्या, पारिवारिकता और क्षेत्रीय मानव प्रवृत्तियों ये सब मनोरंजन उद्योग का हिस्सा हैं, जो किसी भी अन्य फिल्ड की तरह है.

यदि आपको इस फिल्ड में स्वीकृति नहीं मिलती है, तो ऑफ बीट चले जाइए-एक काम को करने के कई तरीके हैं.

मुझे लगता है कि जो कम प्रिविलेजवाले लोग हैं उनपर इस चर्चा में सबसे कम इल्जाम लगाना चाहिए. क्योंकि वो एक ऐसे सिस्टम का पार्ट हैं जो चैन रिएक्शन पर चलता है. बदलाव तो वो ही ला सकते है जिसे बदलाव चाहिए. ये उस पर निर्भर करता है कि अपने सपनों को पूरा करने के लिए वो कमान उठाता है या नहीं.

आप बिल्कुल सही हैं - समृद्ध और प्रसिद्ध लोगों के जीवन के लिए सभी और से बहुत उत्साह और प्रशंसा है. लेकिन साथ ही, हमारे रचनात्मक उद्योग को हमारे देशवासियों से प्यार मिलता है, क्योंकि हम उनके प्रति आभारी हैं.

चाहे वो फिल्म ‘ओमकारा’ से लंगड़ा त्यागी हो या फिल्म ‘क्वीन’ से रानी. हम साधारण से चीजों को असाधारण करीके से दर्शाने के लिए जाने जाते हैं.

तो, क्या हमें भाई-भक्ति के साथ शांति बनाए रखना चाहिए? जो लोग सोचते हैं कि यह उनके लिए काम करता है, वो इसके साथ शांति बना सकते है.

मेरी राय में, यह तीसरी दुनिया के लिए एक अत्यंत निराशावादी एटीट्यूड है जहां कई लोगों को भोजन, आश्रय, वस्त्र और शिक्षा तक की पहुंच नहीं है.

दुनिया एक आदर्श स्थान नहीं है, और यह कभी नहीं हो सकती. यही कारण है कि हमारे पास कला का उद्योग है. एक तरह से, हम आशा के ध्वजवाहक हैं.

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