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Birthday special : कैलाश खेर - छोटे परों से बड़ी उड़ान

कैलाश खेर अपने जन्मदिन पर 'भोले चले पार्ट 2' रिलीज कर रहे हैं

Updated On: Jul 07, 2017 12:44 PM IST

Sunita Pandey

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Birthday special : कैलाश खेर - छोटे परों से बड़ी उड़ान

बकौल कैलाश खेर, "अल्लाह हुनर सबको देता है, लेकिन मौका बनाना पड़ता है. जब तक हुनर और मौके का संयोग नहीं होता, तब तक इंसान गुमनाम ही रहता है."

शायद कैलाश खेर उन खुशनसीबों में से थे जो मौके और हुनर का तालमेल बिठाने में कामयाब रहे और केवल हुनर के सहारे कामयाबी के शिखर पर चढ़ गए. बतौर गायक कैलाश खेर बॉलीवुड में अपने किस्म के अकेले गायक हैं.

गायिकी से लेकर सोच तक उनका किसी से कोई मुकाबला ही नहीं है. मसलन जब कड़े संघर्ष के बाद उन्होंने फिल्म संगीत में अपनी जगह बना ली, तो उन्होंने अचानक फिल्म संगीत से मुंह मोड़ लिया और अल्बम की दुनिया में लौट आये.

उनका तर्क है कि वो वही गाना चाहते हैं जो उनका दिल कहता है. बॉलीवुड में सूफी गायिकी के झंडाबरदार माने जाने वाले कैलाश आज भी अपने इस उसूल से पीछे हटने को तैयार नहीं. बहरहाल...

अपने तरीके से मनाते हैं जन्मदिन

7 जुलाई, 1973 को जन्मे कैलाश खेर आज भी अपना जन्मदिन अपने ही तरीके से मना रहे हैं. अमूमन सितारों के जन्मदिन पर बड़ी-बड़ी पार्टियां रखी जाती हैं, लेकिन कैलाश इस मौके पर अपने अल्बम 'भोले चले पार्ट-2 ' रिलीज कर रहे हैं.

कैलाश खेर के मुताबिक, "वो अपना जन्मदिन इस अल्बम के साथ प्रशंसकों के बीच मनाना चाहते हैं." कैलाश का कहना है कि, "उनका जन्म श्रावण मास में इसलिए हुआ ताकि शिव की कृपा हमेशा उन पर बनी रहे.

इस मौके पर अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कैलाश कहते हैं कि, "कामयाबी का मजा तो संघर्ष के बाद ही आता है.. बिना घिसे मेंहदी में रंग कहाँ आता है..?"

छोटा कद बना मजाक का पात्र

कैलाश खेर के संघर्ष की बात करें तो जब कैलाश खेर दिल्ली से मुंबई काम की तलाश में आए तो सबसे पहले अपने छोटे कद के कारण ही दोस्तों के बीच मजाक का पात्र बन गए. लेकिन कैलाश का कहना था कि सपने आंखों से देखे जाते कद से नहीं.

'अल्लाह के बंदे' से मिली कामयाबी

लंबे संघर्ष के बाद संगीतकार राम संपत ने उन्हें नक्षत्र डायमंड के विज्ञापन में एक जिंगल में गाने का मौका दिया. हालांकि ये जिंगल चला नहीं, लेकिन विज्ञापनों में उनकी आवाज सुनाई देने लगी. फिल्मों में पहली बार गाने का मौका उन्हें राज कंवर की फिल्म 'अंदाज' से मिला.

अक्षय कुमार और प्रियंका चोपड़ा स्टारर ये फिल्म हिट रही और कैलाश का गाना 'रब्बा इश्क ना होवे' भी हिट रहा, लेकिन इसका ज्यादा फायदा उन्हें नहीं मिला. कैलाश को बड़ी कामयाबी तब मिली जब फिल्म 'वैसा भी होता है' का गाना 'अल्लाह के बंदे' हिट हुआ.

इस गाने के बाद कैलाश के लिए दौलत और शोहरत का रास्ता खुल गया. इसके बाद उन्होंने दर्जनों फिल्मों में गाने गाए लेकिन इन गानों की एकरसता से वो जल्दी ही ऊब गए और अल्बम की दुनिया में रम गए.

अल्बम की ओर बढ़ाया कदम

साल 2004 में कैलाश खेर ने अपने दोस्त नरेश और परेश कामत के साथ मिलकर 'कैलाशा' बैंड बनाया और अपना पहला अल्बम इसी नाम से रिलीज किया. इस अल्बम के 'तेरी दीवानी 'सहित सभी गाने  जबरदस्त हिट साबित हुए.

कुछ अलग करने की चाह

कैलाश खेर अपने हर जन्मदिन पर अपना नया अल्बम जारी करते हैं. अल्बम के अलावा फिल्मों में भी वो सक्रिय हैं. कैलाश खेर की मानें तो उनका जन्म ही कुछ अलग करने के लिए हुआ है. वो अलग क्या है..? इसे वो आज भी तलाश रहे हैं.

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