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ये जॉली थोड़ा कम ‘जॉली’ है पर अच्छा है

इस मजेदार मुलाकात के बदले हम जॉली को देते हैं साढ़े तीन स्टार.

Ravindra Choudhary Updated On: Feb 11, 2017 05:38 PM IST

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ये जॉली थोड़ा कम ‘जॉली’ है पर अच्छा है

शुक्र है! बॉम्बे हाईकोर्ट ने जॉली एलएलबी-2 के 4 आपत्तिजनक दृश्य हटाने के बाद रिलीज करने की मंजूरी दे दी और अब फिल्म आपके सामने है. कोर्ट ने इन चार दृश्यों को वकीलों और जजों की छवि खराब करने वाला बताया था.

वैसे, अपने लखनऊ और इलाहाबाद में कैसे जज और वकील होते हैं, यह जानने के लिए सुप्रीम कोर्ट की यह एक टिप्पणी ही काफी है.

कहानी

अपने कनपुरिया भैय्या जगदीश्वर मिश्रा उर्फ जॉली (अक्षय कुमार) लखनऊ में वकालत करते हैं और एक मशहूर वकील के 15वें फालतू से असिस्टेंट हैं.

बड़ा वकील बनने के लिये जॉली को अपना चैंबर चाहिये और इसके लिए वो गर्भवती विधवा हिना सिद्दीकी (सयानी गुप्ता) से केस लड़ने के नाम पर 2 लाख रुपए ठग लेता है. धोखाधड़ी का पता चलने पर हिना खुदकुशी कर लेती है.

बस, यहीं से जॉली की जिंदगी बदल जाती है. उसे आत्मग्लानि होती है और वो हिना के पति इकबाल सिद्दीकी (मानव कौल) की फर्जी एनकाउंटर में हुई हत्या की सच्चाई सामने लाने का बीड़ा उठा लेता है.

इस सफर में जॉली की घाघ वकील प्रमोद माथुर (अन्नू कपूर) और पुलिस इंसपेक्टर सूर्यवीर सिंह (कुमुद मिश्रा) से भिड़ंत होती है और कई चौंकाने वाले खुलासे होते हैं.

एक्टिंग

अक्षय ने बहुत बढ़िया काम किया है और अरशद वारसी से हटकर इस जॉली को अपना टच दिया है. अन्नू कपूर भी हमेशा की तरह शानदार हैं. लेकिन सबसे ज्यादा तालियां बटोर ले जाते हैं जज बने सौरभ शुक्ला, जो पिछले जॉली से इस जॉली का नाता जोड़ने वाली एकमात्र कड़ी भी हैं.

जॉली की पत्नी पुष्पा पांडे की भूमिका में हुमा कुरैशी बस कामचलाऊ हैं. और हां! फिल्म में आप रामगोपाल बजाज और वीएम बडोला जैसे पुराने रंगमंच कलाकारों को भी पाएंगे, जो अपने-अपने रोल में फिट हैं.

पता नहीं डायरेक्टर सुभाष कपूर की क्या मजबूरी थी कि उन्होंने इतनी अच्छी फिल्म में एक वाहियात 'होली सॉन्ग' डाल दिया, जो फिल्म की कहानी पर ब्रेक लगाने का काम करता है.

असल में, इस फिल्म में किसी भी गाने की कोई जरूरत ही नहीं थी. देशभक्ति पर लेक्चरबाजी भी कुछ ज्यादा लगती है और कोर्ट रूम के दृश्यों की ड्रामेबाजी भी! जॉली के बनियान पर डॉलर बिग बॉस का विज्ञापन दिखाना भी शर्मनाक लगता है.

कुल मिलाकर, अगर हम इन थोड़े से झोल-झालों को नजरअंदाज कर दें तो फिल्म अच्छी है और शुरु से अंत तक आपको बांधे रखती है. सुभाष कपूर ने इस विषय पर काफी रिसर्च और मेहनत की है और दर्शकों की तालियों के रूप में उन्हें उस मेहनत का फल भी मिला है.

फिल्म में वकील माथुर का डायलॉग है- ‘मुस्कुराइए आप लखनऊ में हैं’, और हम आप से कहते हैं कि ‘मुस्कुराइए आप जॉली एलएलबी से मिल रहे हैं!’

इस मजेदार मुलाकात के बदले हम जॉली को देते हैं साढ़े तीन स्टार.

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