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Review: डरने का अगर आप शौक रखते हैं तो ‘लुप्त’ इस हफ्ते जरूर आजमाइए

आमतौर पर बॉलीवुड के फिल्म मेकर्स जनता जनार्दन को डराने के हथकंडे इस्तेमाल करते हैं

फ़र्स्टपोस्ट रेटिंग:

Updated On: Oct 05, 2018 11:34 AM IST

Abhishek Srivastava

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Review: डरने का अगर आप शौक रखते हैं तो ‘लुप्त’ इस हफ्ते जरूर आजमाइए
निर्देशक: प्रभुराज
कलाकार: जावेद जाफरी, विजय राज, करन आनंद, निकी वालिया

 

ऐसा कम ही देखने में आता है जब हिंदी में बनी एक हॉरर फिल्म लोगों को डराने में कामयाब हो जाती है. देखकर खुशी होती है कि ‘लुप्त’ भूतिया हिंदी फिल्मों से जुड़े मिथ को तोड़ती है क्योंकि हिंदी भूतिया फिल्में डराती कम हैं और हंसाती ज्यादा हैं. तेज रफ्तार से भागती इस फिल्म को देखने में डर की अनुभूति होती है यानि कि दूसरे शब्दों में मजा आता है. ‘लुप्त’ की कहानी एक सफल व्यापारी हर्ष टंडन (जावेद जाफरी) के बारे में है जिसके लिए उसका कारोबार ही सब कुछ है और वो इसे अपने परिवार से भी ऊपर रखता है. जब हर्ष क्रोनिक इन्सोमनिया का शिकार हो जाता है तब उसे वो लोग नजर आने लगते हैं जो वाकई में होते नहीं है. हर्ष के डॉक्टर उसे इसी बात की सलाह देते हैं कि वो कुछ दिनों के लिए अपने काम से ब्रेक ले लें और कहीं छुट्टी पर निकल जाएं. अपने परिवार के साथ जब वो शिमला की ओर रुख करता है तब हर्ष और उसके परिवार के साथ अजीबो गरीब घटनाएं घटित होने लगती हैं और ये सभी घटनाएं भूतिया होती हैं. एक दुर्घटना की वजह से हर्ष को एक अलग रास्ता लेना पड़ता है और सफर के दौरान उनकी मुलाकात एक अभद्र किस्म के अजनबी से होती है जिसकी गाड़ी रास्ते में खराब होने की वजह से वो सड़क के बीचों बीच फंसा हुआ है. मदद मांगने के बावजूद हर्ष उसको अपनी गाड़ी में लिफ्ट देने से मना कर देता है. लेकिन कुछ दूर जाने के बाद हर्ष की मुलाकात उसी अभद्र अजनबी से होती है जिसको उसने लिफ्ट देने से मना कर दिया था. गाड़ी खराब होने की वजह से और कोई दूसरा उपाय ना होने की वजह से हर्ष को रात बीताने के लिए उसी अजनबी के घर में आसरा लेना पड़ता है. और उसी के बाद भूतिया घटनाएं होनी शुरू हो जाती हैं और आगे चल कर हर्ष के परिवारजनों की हत्या एक के बाद एक शुरू हो जाती है. इस बीच इसके पीछे के रहस्य की गुत्थी सुलझाने में हर्ष लग जाता है.

लुप्त डराने के मिशन मे पूरी तरह से कामयाब रहती है

लुप्त की कहानी सुपरनैचुरल है और इसकी बुनियाद इसी बात पर टिकी है कि कर्म का आपके जीवन में काफी महत्व होता है. जिस तरह के कर्म इंसान करता है वही वो उसी जीवन में भरता भी है. ‘लुप्त’ की कहानी में ट्विस्ट और टर्न्स काफी मात्रा में आपको मिलेंगे जिस वजह से फिल्म के क्लाईमेक्स तक रुचि बनी रहती है. आपको इस फिल्म में एक कहानी देखने को मिलेगी जो आपको कहीं ना कहीं खुद की सीट से बांध कर रखेगी. हिंदी फिल्मों में आमतौर पर जो हम भूतिया फिल्में देखते हैं उसको देखते वक्त लोगों को डर काम और हास्य रस ज्यादा मिलता है लेकिन ‘लुप्त’ से आप इस बात की शिकायत नही कर पाएंगे. इस फिल्म को देखते वक्त आपको सिहरन जरुर लगेगी. फिल्म के निर्देशक प्रभुराज की ये कोशिश काबिले तारीफ है और पूरी फिल्म में उन्होंने अपनी पकड़ बनाकर रखी है.

जावेद जाफरी का सटीक अभिनय

जावेद जाफरी फिल्म जगत के उन कलाकारों में हैं जिनके अभिनय कौशल को फिल्म जगत पूरी तरह से भुनाने में नाकामयाब रहा है. इस फिल्म में उनकी भूमिका पूरी तरह से सधी हुई नजर आती है. अपने रोल में जावेद जाफरी ओवर द टॉप जा सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं किया है और फिल्म के मूड के हिसाब से अपने अभिनय का संतुलन बनाए रखा है. विजय राज को देखकर मायूसी होती है कि फिल्म में उनकी उपस्थिति कम समय के लिए है लेकिन हर बार की तरह इस छोटी भूमिका में भी उन्होंने जान डाल दी है.

हिंदी भूतिया फिल्मों के लिए लुप्त के नया आयाम हैं

इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यही है कि आमतौर पर बॉलीवुड के फिल्म मेकर्स जनता जनार्दन को डराने के हथकंडे इस्तेमाल करते हैं, लेकिन प्रभुराज ने अपनी फिल्म में इन हथकंडों का इस्तेमाल नहीं किया है और उनसे दूर ही रहे हैं. और शायद यही वजह है कि एक पल के लिए भी आप फिल्म में बोर नहीं होते हैं. कई नई तरह की चीजों के दीदार आपको इस फिल्म में होंगे. इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यही है कि आपको इसकी कहानी के अंत की गुत्थी सुलझाने में उतनी आसानी नहीं होगी जितनी आसानी से लोग बाकी भूतिया फिल्मों की गुत्थी सुलझा लेते हैं. कम बजट में बनी इस फिल्म को काफी हद तक वर्ड ऑफ माउथ पर भरोसा करना पड़ेगा क्योंकि इस फिल्म का प्रमोशन ना के बराबर हुआ है. मुमकिन है कि इस हफ्ते रिलीज हो रही दो बड़ी फिल्मों के बीच ये दब कर रह जाए. लेकिन अगर इस फिल्म के दीदार आपको पास के सिनेमा घर में हो जाते हैं तो इसको आप एक बार आजमा जरूर लीजिएगा. ऐसा कम ही होता है कि हिंदी भाषा में कोई अच्छी हॉरर फिल्म आती है. एक मौका मिला है आजमा लीजिए, आपको निराशा हाथ नहीं लगेगी.

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