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मूवी रिव्यू जब हैरी मेट सेजल: एक बेतुकी और पकाऊ फिल्म

स्टार्स की केमिस्ट्री को छोड़कर इस फिल्म में नथिंग यानी कुछ भी नहीं है

Anna MM Vetticad Updated On: Aug 05, 2017 03:46 PM IST

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मूवी रिव्यू जब हैरी मेट सेजल: एक बेतुकी और पकाऊ फिल्म

जब हैरी मेट सेजल, व्हेन हैरी मेट सैली नहीं है. बाद वाली फिल्म हॉलीवुड की सबसे बेहतरीन रोमांस मूवीज में से एक है. लेकिन, इम्तियाज अली की जब हैरी मेट सेजल का टाइटल यह दिखाता है कि यह फिल्म केवल रोमांस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्यार, अट्रैक्शन के अर्थ के बारे में बातचीत है.

इसकी बजाय अली को इस फिल्म का नाम 'मच एडो अबाउट हैरी एंड सेजल' रखना चाहिए था जो कि विलियम शेक्सपीयर की मशहूर कॉमेडी मच एडो अबाउट नथिंग से बना हुआ है. खैर हम शेक्सपीयर से इसके लिए माफी मांगना चाहेंगे. स्टार्स की केमिस्ट्री को छोड़कर इस फिल्म में नथिंग यानी कुछ भी नहीं है. यह ‘नथिंग’ जो कि ‘काफी बवाल’ से जुड़ा हुआ है, शेक्सपीयर के सबसे मशहूर कामों में से एक है.

बेहतर लोकशन पर बेजान कहानी 

शाहरुख खान ने हैरी यानी हरिंदर सिंह नेहरा का किरदार निभाया है. हैरी पंजाब में पैदा हुआ कनाडाई पासपोर्ट धारक यूरोप में एक टूर गाइड है. हैरी को मजबूरी में सेजल जावेरी (अनुष्का शर्मा) के साथ एक पूरे महाद्वीप में सेजल की खोई हुई इंगेजमेंट रिंग को ढूंढ़ने में जुटना पड़ता है.

हैरी को उनके ग्रुप के साथ लगाया गया था, जिसमें सेजल का परिवार और दोस्त शामिल थे. ये लोग एक महीने के पूरे यूरोप के टूर पर गए थे, तभी उनके बॉयफ्रेंड रूपेन ने उन्हें शादी के लिए प्रपोज किया और उनकी उंगली में अंगूठी पहना दी. सेजल से यह अंगूठी खो जाती है. रूपेन उनकी इस लापरवाही को कमिटमेंट की कमी के तौर पर देखता है, ऐसे में वह वहीं रुककर इस अंगूठी को ढूंढने की ठान लेती हैं ताकि वह यह बता सकें कि वह रूपेन से कितना प्यार करती हैं.

निश्चित तौर पर, इससे अली को यह मौका मिला कि वह अपने दो पसंदीदा सिनेमेटिक जॉनर को मिला सकें. इसमें एक है रोड मूवी और दूसरा है रोमांस. एम्सटर्डम, प्राग, बुडापेस्ट, लिस्बन और फ्रैंकफर्ट जैसी लोकेशंस बेशक बेहद खूबसूरत हैं. सिनेमैटोग्राफर के यू मोहनन ने इन विजुअल्स को फिल्म में बखूबी उतारा है. लेकिन, यह चीज अली के अपने कैरेक्टर्स के मोटिवेंशस को लिखे जाने के मामले में उतनी दमदार नहीं है.

 

बोरिंग फिल्म

Jab harry met sejal

जब हैरी मेट सेजल अपनी मूल भावना को खो बैठी फिल्म है. सेजल का यूरोप में रुक जाने का फैसला, उनका व्यवहार, हैरी की बैक स्टोरी, सेजल की सुनसान गलियों और अंधेरे नाइटक्लब्स को अचरज भरे तरीके से देखने की लापरवाही, ये कुछ भी न तो वास्तविक लगते हैं और न ही इनमें कोई जान है. न तो अनुष्का शर्मा और न ही शाहरुख खान इस बात को लेकर निश्चिंत दिखाई देते हैं कि वे जो कर रहे हैं वह क्यों कर रहे हैं.

सेजल लगातार इस बात पर जोर देती रहती है कि वह रूपेन को लेकर पूरी तरह कमिटेड है, इसके बावजूद वह हैरी को यह मनवाने में जुटी रहती है कि वह ‘लायक’ या ‘माल’ हैं. इस तरह की फिल्म आगे बढ़ रही है इसके लिए सबसे जरूरी सवाल होना चाहिए कि क्या अंत में ये एक हो पाएंगे. हकीकत यह है कि हैरी-सेजल के रनिंग टाइम के 30 मिनट में भी इसका कुछ अता-पता नहीं चलता.

यह मानना मुश्किल है कि एक शख्स जिसने जब वी मेट या तमाशा जैसी सोचने वाली फिल्में बनाईं, वह इस तरह की बोरिंग फिल्म कैसे बना सकता है. इससे भी बेकार चीज सेजल के टीज करने वाले तरीके, उसकी बेवकूफी भरी हरकतें और हैरी की एक्स-गर्लफ्रेंड क्लैरा के साथ फ्रैंकफर्ट में की गई परेशानी भरी बातचीत है.

ऐसा लगता है कि अली ने सहमति के साथ सेक्स संबंधों के अर्थ को लेकर एक गलत तर्क दिया है. इसमें महिलाएं जो इसकी मांग करती हैं, वे ऐसी महिलाएं हैं जो कि इसके लिए बाद में रेप का दुखड़ा रोती हैं, जैसी बातें हैं.

शायद यह कोई सरप्राइज नहीं है क्योंकि उनकी कुछ हीरोइन्स मजबूत महिलाएं रही हैं, अली ने रॉकस्टार में पुरुष-महिला के बीच के एक बेहद जटिल संबंध को दिखाया और जब वी मेट और रॉकस्टार दोनों में चलते-फिरते रेप जोक्स भी डाले.

शाहरुख और अनुष्का की बेहतर केमिस्ट्री 

Jab Harry Met Sejal

जैसे-जैसे हैरी और सेजल निहायत बेमतलब के कामों के जरिए खुद को ढूंढने की कोशिश करते हैं, उसको ढूंढना जिसके साथ रहने के लिए आप बने हैं. लेकिन जब हैरी मेट सेजल तो यह कहानी हर गुजरते मिनट के साथ उतनी ही तंग करने वाली साबित होती है. इसे एक ही चीज से जाहिर किया जा सकता है और वह है ‘पकाऊ’.

मैं ईमानदारी से चाहती थी कि फिल्म 45 मिनट में ही खत्म हो जाए. लेकिन, ऐसा नहीं हुआ. यह 99 मिनट तक चली. इतनी लंबी. बेतुकेपन के बीच में एसआरके और शर्मा की केमिस्ट्री एकमात्र ऐसी चीज है जिसने फिल्म के दूसरे हाफ में मुझे सोने से बचाए रखा.

हालांकि, शर्मा शाहरुख की बेटी की भूमिका निभा सकती हैं. (सीरियसली एसआरके, आप ऐसा क्यों कर रहे हैं?), लेकिन, ऐसे माहौल में जहां पुरुष कलाकार अपने से आधी उम्र की लड़कियों के साथ काम कर रहे हैं, मुझे लगता है कि ये दोनों एकसाथ ज्यादा अच्छे लगते हैं, बजाय कि शाहरुख किन्हीं अन्य 20-30 साल की लड़की के साथ अदाकारी करते दिखाई दें.

शाहरुख उम्र के साथ और ज्यादा हॉट लगते हैं, शर्मा भी जबरदस्त हैं और दोनों की जोड़ी बेहद अच्छी लगती है. वैसे तो फिल्म पकाऊ है लेकिन शर्मा-खान की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री इतनी जबरदस्त है कि मुझे याद नहीं इससे पहले कब मैंने यह चाहा होगा कि किसी फिल्म में मैं कपल सेक्स देखूं.

तो क्या ऐसा होता है? अगर आप इस चीज का जवाब चाहते हैं तो आपको अली के दिमाग को समझना होगा, तभी आप इसका जवाब समझ पाएंगे.

जब हैरी मेट सेजल की कुछ और पॉजिटिव चीजों में से एक हितेश सोनिक का शानदार बैकग्राउंड स्कोर और प्रीतम के सॉन्ग में पिज्जाज है. खासतौर पर मैं बनूं तेरी राधा बेहतरीन है. लेकिन, यह भी काफी नहीं लगता, ऐसा जान पड़ता है कि फिल्म में जबरदस्ती गाने ठूंसे गए हैं.

जब हैरी मेट सेजल एक चलताऊ फनी फिल्म है, लेकिन यह उतनी फनी और मजेदार बन नहीं पाई है. शाहरुख खान और अनुष्का शर्मा की तारीफ करनी होगी जिन्होंने इस पकाऊ फिल्म में जान डालने की भरपूर कोशिश की.

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