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Film review: ‘डेडपूल 2’ का एक्शन और मजाक और रणवीर सिंह की डबिंग यानी कि डबल मजा

इस फिल्म में अमेरिकी सभ्यता की कुछ चीजों को बिल्कुल भारतीय परिवेश में रणवीर सिंह अपनी डबिंग से बदल देते हैं

फ़र्स्टपोस्ट रेटिंग:

Updated On: May 19, 2018 10:19 AM IST

Abhishek Srivastava

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Film review: ‘डेडपूल 2’ का एक्शन और मजाक और रणवीर सिंह की डबिंग यानी कि डबल मजा
निर्देशक: डेविड लेइच
कलाकार: रायन रेनॉल्ड्स, जोश ब्रोलिन, मोरेना बक्करेन, जुलियन डेन्नीसन

 

पहली ‘डेडपूल’ के दीदार हमें दो साल पहले हुए थे और उस वक्त यही अहसास हुआ था कि सुपर हीरो की भीड़ में वेड विल्सन की शख्सियत कुछ ज्यादा ही अलग है. गालियां देने में माहिर, हाजिर जवाबी में उस्ताद और कटाक्ष हर बात पर. यही सब चीजें थीं जिसने ‘डेडपूल’ को सुपर हीरो की भीड़ में एक अलग पहचान दिलाई. इन सभी चीजों के साथ-साथ एक अनोखी कहानी भी देखने को हमें मिली थी जिसे दर्शकों का भरपूर प्यार मिला था बॉक्स ऑफिस पर. ‘डेडपूल 2’ उसी फिल्म की सीक्वल है और कहने की जरुरत नहीं कि जहां पर चीजें खत्म हुई थीं शुरुआत वहीं से होती है जिसका सीधा मतलब ये है कि ‘डेडपूल 2’ भी उसी तरह से आपको लुभाएगी जिस तरह से पहली ‘डेडपूल’ आपके दिल मे उतर गई थी. ये फिल्म मनोरंजन की गॉरन्टी है और सबसे अहम बात ये है कि हिंदी डेडपूल में फिल्म के मुख्य किरदार के लिए रणवीर सिंह ने अपनी आवाज दी है जो बिलकुल सोने पर सोहागा का काम करता है. इस हफ्ते अगर आप सिनेमाघर की ओर रुख करने वाले हैं तो फिल्म के चुनाव के मामले में आपको ज्यादा परेशानी नहीं होने वाली है. आप अपनी आंखों को मूंदकर ‘डेडपूल 2’ का टिकट खरीद सकते हैं.

शानदार कहानी, स्क्रीनप्ले और अभिनय का अद्भुत संगम है डेडपूल 2’

फिल्म की शुरुआत होती है गालियों के शौकीन वेड विल्सन यानि कि ‘डेडपूल’ से जिसके परखच्चे उड़ जाते हैं एक हादसे में लेकिन कॉलॉसस की वजह से उसकी जान बच जाती है. कॉलॉसस का यही मिशन है कि ‘डेडपूल’ को प्रोफेसर चार्ल्स जेवियर की टीम में कैसे भी शामिल कर लिया जाए यानि कि दूसरे शब्दों में ‘एक्स मेन’ की टीम में वो भी शामिल हो जाएं. लेकिन जब एक म्यूटेंट बच्चे रसेल को बचाने की बात आती है तब ‘डेडपूल’ अपनी हरकतों की वजह से चीजों को शुरू में ही गड़बड़ कर देता है. शुरुआती झगड़े के बाद ‘डेडपूल’ को रसेल यानि की फायर फेस्ट के साथ आइस बॉक्स भेज दिया जाता है. उसी दौरान भविष्य के एक योद्धा केबल (जोश ब्रोलिन) का टाइम ट्रेवल के जरिए धरती पर आगमन होता है. केबल का यही मकसद है कि वो रसेल का खत्म कर दे ताकि वो अपने भविष्य को सुनिश्चित कर सके. इसके बाद ‘डेडपूल’ का काम शुरू होता है रसेल को केबल से बचाने का. ‘डेडपूल’ अपनी गर्लफ़्रेंड की प्रेरणा से एक एक्स फोर्स का गठन करता है ताकि वो बच्चे को बचा सके.

ये फिल्म रायन रेनॉल्ड्स के करियर को एक बार फिर से एक अलग मुकाम पर ले जाएगी

‘डेडपूल 2’ देखने से पहले आप खुद से यही सवाल करेंगे कि क्या ये फिल्म पहली ‘डेडपूल’ से बेहतर होगी? इसका जवाब आपको फिल्म के आधे घंटे में ही मिल जाएगा. ये फिल्म पहली ‘डेडपूल’ से बेहतर नहीं है लेकिन ये भी सच है कि ये उसके बिलकुल बराबर खड़ी होती है. और इसके पीछे की वजह है फिल्म का शानदार स्क्रीनप्ले और इसकी सीट से बांधने वाली कहानी. निर्देशक डेविड लेइच ने दर्शकों की नब्ज पूरी तरह से फिल्म मे पकड़ी हुई है और कहीं भी उसे छूटने का मौका नहीं दिया है. सुपर हीरो की फिल्मों की असली जान उसके एक्शन के अलावा उसके हंसी मजाक यानि की फिल्म के ह्यूमर में छुपी होती है और यहां पर ‘डेडपूल 2’ को शत प्रतिशत नंबर मिलने चाहिए. कुछ जगहों पर दर्शकों को परेशानी हो सकती है क्योंकि पॉप कल्चर के संदर्भ फिल्म में कई जगह पर आपको मिलेंगे. अगर पुरानी फिल्मों के रेफरेन्सेज को आप पकड़ नहीं पाए तो शायद कुछ चीजों का मजा आप नहीं उठा पाएंगे.

डेडपूल 2’ की जान इसके एक्शन और हंसी-मजाक मे रची बसी है

पहली ‘डेडपूल’ ने फिल्म के नायक रायन रेनॉल्ड्स के फिल्मी करियर को एक अलग मुकाम पर पहुंचा दिया था. ‘डेडपूल 2’ देखने के बाद आप किसी और अभिनेता को ‘डेडपूल’ के रूप में सोच नहीं पाएंगे और यही रायन रेनॉल्ड्स की सबसे बड़ी जीत है. किरदार के अंदर पूरी तरह से वो समा गए हैं. शुरू से आखिरी तक रायन फिल्म को अपने कंधे पर अकेले लेकर चलते हैं. केबल के रूप में जोश ब्रोलिन हैं जो कुछ दिनों पहले ही अवेंजर्स-इनफिनिटी वॉर में मुख्य विलेन के किरदार में नजर आए थे. यहां भी जोश ब्रोलिन ने दिखा दिया है कि जब खूंखार बनने की बारी होती है तो उनका कोई सानी नहीं है. ब्रोलिन, केबल के किरदार को जीवंत करने में सफल रहे हैं. अलबत्ता फिल्म में किसी का किरदार ठीक से स्क्रीन पर उभर कर नहीं आ पाया है तो वो है वनीसा यानि की मोरेंना बक्करेन का. ‘डेडपूल’ की गर्लफ्रेंड की भूमिका में जितना साधा हुआ रोल उनका पहले ‘डेडपूल’ में था इस फिल्म में वैसा कुछ भी नहीं है और ये दर्शकों के लिए निराशा की बात है. कहने की जरुरत नहीं है कि इस फिल्म की जान इसके एक्शन सीन्स और कॉमेडी के अंदर रची बसी है और ये दोनों ही टॉप क्लास हैं. इस फिल्म के विजुअल इफेक्ट्स आपको एक नई दुनिया के दर्शन कराएंगे. इस फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर भी फिल्म की कहानी से पूरी तरह से मेल खाता है जिससे फिल्म देखने का मजा दोगुना हो जाता है. इस फिल्म का साउंड ट्रैक फिल्म में आगे क्या होने वाला है इससे आपका परिचय करा देते हैं.

रणवीर सिंह की डबिंग फिल्म मे सोने पर सोहोगा का काम करती है

इस समीक्षा में डेडपूल की आवाज बने रणवीर सिंह के बारे में कुछ बातें जरूर कहनी पड़ेंगी. उनकी मजेदार डबिंग आपको पूरी फिल्म में गुदगुदाती रहेगी. कमाल की बात तब होती है जब अमेरिकी सभ्यता की कुछ चीजों को बिल्कुल भारतीय परिवेश में रणवीर सिंह अपनी डबिंग से बदल देते हैं और ये बेहद ही रोचक है. जरा सोचिए इस फिल्म में आपको दंगल, सुलतान, बाहुबली का भी जिक्र होते हुए मिलेगा. कुल मिलाकर भारतीय दर्शकों को ‘डेडपूल’ से एक अपनेपन का अहसास होगा और इसमें रणवीर सिंह की आवाज का बहुत भारी योगदान है. अंग्रेजी भाषा की ‘डेडपूल’ में गालियों की भरमार है लेकिन हिंदी ‘डेडपूल’ को भारतीय सभ्यता की चासनी में डूबोने के बाद ही इसे दर्शकों के सामने परोसा गया है. रणवीर सिंह की शानदार डबिंग सारे इमोशंस को साथ में लेकर चलती है. अगर ये आपको कभी गुदगुदायेगी तो कभी अपने अश्लील अंदाज में आपको झेंपने पर भी मजबूर करेगी. अगर आपको एक फिल्म के अंदर वन लाइनर्स, कमाल के एक्शन सीन्स और कुछ टेढ़े मेढ़े मजाक देखने हैं तो ‘डेडपूल’ से बढ़िया ऑप्शन आपके पास इस हफ्ते नहीं हो सकता है.

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