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REVIEW : आपका दिल जीतने आ गई है ऑनलाइन फिल्म ‘लव पर स्क्वायर फुट’

नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई ये फिल्म भारत में सिनेमा की बदलती तस्वीर की शुरुआत है

Updated On: Feb 20, 2018 09:30 PM IST

Abhishek Srivastava

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REVIEW : आपका दिल जीतने आ गई है ऑनलाइन फिल्म ‘लव पर स्क्वायर फुट’
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फिल्मों की जंग अब सिनेमाहॉल से बाहर निकलकर आपके घरों में पहुंच चुकी है और लव पर स्क्वायर फुट उसी की पहली कड़ी है. जीहां, लव पर स्क्वायर फुट के दर्शन आपको अपने नजदीकी सिनेमा हॉल में नहीं होंगे बल्कि इसके लिए आपको नेटफ्लिक्स के स्ट्रीम सर्विस का सहारा लेना पड़ेगा और इसका लुत्फ आप अपने घर के ड्राइंग रूम में उठा सकेंगे.

कहने की जरुरत नहीं कि रॉनी स्क्रूवाला निर्मित ये फिल्म फिल्मों की दुनिया में एक क्रांतिकारी कदम है. आने वाले समय में फिल्मों की जंग बॉक्स ऑफ़िस से निकल कर स्ट्रीमिंग सर्विसेज पर होने वाली है और इसका बिगुल इस फिल्म से बज चुका है.

अगर आनंद तिवारी की इस फिल्म के बारे में बात करें तो नेटफ्लिक्स की यह पहली कोशिश एक ताजी हवा के झोंके के समान है जिसको देखने में खासा मज़ा आता है. इस फिल्म को वैलेंटाइन डे के दिन नेटफ्लिक्स के प्लेटफार्म पर रिलीज़ किया गया है.

मुंबई खुद एक किरदार है 

फिल्म की कहानी पूरी तरह से मुंबई महानगरी के परिप्रेक्ष्य में है जहां पर फिल्म के मुख्य किरदार संजय चतुर्वेदी (विक्की कौशल) और करीना डीसूज़ा (अंगीरा धर) रहते हैं और उनका सपना है महानगरी में खुद का घर लें. संजय के पिता के रोल में है रघुवीर यादव और वो रेलवे की नौकरी से जल्दी ही रिटायर होने वाले हैं. उनका सपना था एक गायक बनने का लेकिन जिंदगी की हकीकतों की वजह से नौकरी की शरण उनको लेनी पड़ती है. संजय की मां के रोल में हैं सुप्रिया पाठक और यह पूरा परिवार दादर के निहायत ही छोटे फ्लैट में रहता है और इन्हीं सब की वजह से संजय सफलता की तलाश में है और अपने आज के अस्तित्व से बाहर निकलना चाहता है.

वहीं दूसरी तरफ करीना का परिवार एक सभ्रांत परिवार है जो बांद्रा इलाके में रहता है. करीना की सगाई एक अमीर लड़के जिसका किरदार फिल्म में कुणाल रॉय कपूर ने निभाया है जल्द ही होने वाली है. कुणाल की यही मंशा है कि शादी के बाद उसकी पत्नी घर पर रह कर घर का काम संभाले जो करीना को पसंद नहीं है. करीना भी अपने सपने को साकार करना चाहती है जिसमें उसका खुद का घर शामिल है और उसकी मंशा यही है कि वो अपने पार्टनर से हर चीज़ में बराबर की भागीदार बने. संजय और करीना एक ही दफ्तर में काम करते हैं और जब दोनों खुद के घर पाने की चाहत में एक हाउसिंग स्कीम में मिल कर अपना आवेदन करते हैं तब उनकी जिंदगी की दिशा किसी और दिशा में बढ़ जाती है.

शानदार अभिनय से सजी फिल्म 

इस डिजिटल फिल्म में कुछ अच्छे कलाकारों की भीड़ है और मानना पड़ेगा की फिल्म देखते वक़्त सभी में एक तरह से होड़ लगी है की कौन कितना बेहतर काम करता है. विक्की कौशल और अंगीरा धार दोनों का ही अभिनय शानदार है और इनकी केमिस्ट्री बेजोड़ है. परिवार वालो के रोल में है सुप्रिया पाठक, रघुवीर यादव और रत्ना पाठक शाह. इन्होने ये बात एक बार फिर से साबित कर दिया है की इनको शानदार अभिनेता का दर्जा क्यों मिला हुआ है.

अलंकृता सहाय फिल्म में विक्की के बॉस के रोल में हैं और उनका भी काम अच्छा है. गजराज राव और बृजेन्द्र काला फिल्म में काम समय के लिए दिखाई देते हैं लेकिन उन चंद सीन्स में भी अपनी छाप छोड़कर निकल जाते हैं. रत्ना पाठक शाह और अंगीरा के बीच जो मां बेटी की केमिस्ट्री फिल्म के निर्देशक ने निकाली है वो काफी शानदार है.

सधा हुआ निर्देशन 

इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी है फिल्म में आनंद तिवारी का निर्देशन. इस फिल्म में मुंबई एक किरदार की तरह नज़र आता है जो किसी बॉलीवुड की फिल्म में एक लम्बे अरसे  के बाद देखने को मिली है. चाहे संजय का मुंबई में लोकल ट्रेन की सवारी की बात हो या फिर करीना के घर का माहौल जो हमे अक्सर बांद्रा में देखने को मिल जाता है, यह सभी चीज़ें फिल्म को और जीवंत बनती है. इस फिल्म की क्या भाषा है यह आपको फिल्म के ओपनिंग क्रेडिट को देखकर पता चल जाएगा.

आनंद तिवारी ने अपनी शुरुआत बतौर एक्टर की थी और ब्योमकेश बक्शी और गोवा गान जैसी फिल्मों में अपने अभिनय के हुनर का परिचय भी दिया था लेकिन इस फिल्म को देखकर साफ़ लगता है की उनके अंदर का निर्देशक उनके अभिनय क्षमता पर ज्यादा भारी है.

यह फिल्म पहले सिनेमा हॉल के लिए बनी थी और डिजिटल रिलीज़ का निर्णय बाद में लिया गया था. फिल्म देखते वक़्त जब गाने आते हैं तब इस बात का पता चलता है और उसी वक़्त फिल्म की गति थोड़ी माध्यम हो जाती है. डिजिटल प्लेटफार्म के लिए जो कंटेंट बनाया जाता है वह पर ये चीज़ देखने को नहीं मिलती है और उनमें एक ज़बरदस्त पेस होता है.

लेकिन इन मामूली रोड ब्लॉक्स के बावजूद फिल्म को देखने में किसी तरह का विघ्न नहीं होता है. फिल्म के कलाकारों के शानदार अभिनय और आनंद तिवारी के कुशल निर्देशन की वजह से इस फिल्म को देखने में मज़ा आता है. अंत में यह फिल्म ये भी सोचने पर मजबूर करती है की एक सधी हुई फिल्म होने के बावजूद फिल्म से जुड़े लोगों ने इसको एक डिजिटल प्लेटफार्म पर रिलीज़ करने की क्यों सोची.

बहरहाल, इसको लेकर हम ज्यादा माथा पच्ची नहीं कर सकते. सच्चाई यही है की इस हल्की फुल्की फिल्म का आनंद आप अपने घर के चारदीवारी के बीच में ले सकते है. नेटफ्लिक्स की अगर पहली कोशिश इस तरह की है तो हिंदुस्तान में इस डिजिटल प्लेटफार्म से भविष्य के लिए हम आशाएं रख सकते हैं.

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