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REVIEW SUI-DHAAGA : मौजी की दुनिया में परेशानियां हैं लेकिन फिर भी ‘सब बढ़िया है’

वरुण धवन ने अक्टूबर के बाद कुछ हटकर करने की कोशिश की है जिसमें वो बेहद सफल नजर आए हैं

फ़र्स्टपोस्ट रेटिंग:

Updated On: Sep 28, 2018 04:44 PM IST

Hemant R Sharma Hemant R Sharma
कंसल्टेंट एंटरटेनमेंट एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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REVIEW SUI-DHAAGA : मौजी की दुनिया में परेशानियां हैं लेकिन फिर भी ‘सब बढ़िया है’
निर्देशक: शरत कटारिया
कलाकार: वरुण धवन, अनुष्का शर्मा

फिल्मों की दुनिया में अंडरडॉग किरदार शायद अकेला फॉर्मूला है जो फिल्म के निर्माताओं को एक तरह का साहस देता है कि शायद उनकी फिल्म बाक्स ऑफिस पर कामयाब हो जाए. इसकी वजह ये है कि दर्शक एक समय के बाद उनकी दुनिया से जुड़ जाता है और मन ही मन प्रार्थना करने लगता है कि आखिर में जीत उसी की हो.

जब ऐसे किरदारों के साथ आपका एक पर्सनल कनेक्ट हो जाता है तब ये निर्देशक के लिए पौ बारह होने वाली ही बात है. सुई धागा में वरुण धवन का किरदार कुछ ऐसा ही है लेकिन स्क्रिप्ट की खामियां वरुण की मेहनत को ठगा साबित करती हैं. एक अच्छी फिल्म होने के बावजूद फिल्म में कमियां नज़र आती हैं. सुई धागा एक अच्छी कोशिश है जिसने एक रिलेवेंट बात कहने का प्रयास किया है.

अपनी खामियों के बावजूद सुई धागा आपका मनोरंजन करेगी और इस हफ्ते आप इस फिल्म का लुत्फ सिनेमाघरों में जाकर उठा सकते हैं.

पति-पत्नी के ठोस इरादों की कहानी

सुई धागा की कहानी मौजी और ममता की है जो शादीशुदा हैं और एक छोटे शहर में रहते हैं. दिन भर के कामकाज और चूल्हे चौके की वजह से ममता और मौजी को एक दूसरे के साथ ज्यादा समय बिताने का मौका नहीं मिल पाता है. व्यस्तता का आलम इतना है कि शादी के बाद शुरू में इन दोनों को एक साथ खाने का मौका भी नसीब नहीं हो पाता है. मौजी एक सिलाई मशीन बेचने वाली दुकान में काम करता है जहां पर दुकान के मालिक के बेटे के हाथों उससे कई बार शर्मसार होना पड़ता है.

इन्तेहा तब हो जाती है जब दुकान के मालिक के बेटे की शादी के दौरान मौजी को अपनी पत्नी और अपने घरवालों के सामने बुरी तरह से शर्मिंदा होना पडता है. ममता अपने पति से पहली बार बातचीत तब कर पाती है जब किसी मुद्दे पर वो अपने पति का पक्ष उसके माता पिता के सामने लेती है. वहीं पर खुद के टेलरिंग दुकान खोलने का बीज वो मौजी के अंदर बोती है. सुई धागा की आगे की कहानी उनके परिश्रम और जीवन में आगे बढने को लेकर है.

फिल्म अक्टूबर के बाद वरुण का जानदार प्रयास

अभिनय की दृष्टि से चाहे वो वरुण धवन हो या फिर अनुष्का शर्मा या रघुवीर यादव  - इन सभी का काम फिल्म में बेहद शानदार है. एक गृहिणी की भूमिका में अनुष्का शर्मा जो आगे चलकर अपने घर का नक्शा बदल देती है, ने शानदार अभिनय किया है. वरुण धवन इस फिल्म में बेहद कंट्रोल्ड हैं और देखकर अच्छा लगता है कि अक्टूबर के बाद उन्होंने एक बार फिर से कुछ नया करने की कोशिश की है. वरुण के पिता की भूमिका में रघुवीर यादव हैं और इस बार भी उन्होंने अपने बेजोड़ अभिनय का नमूना एक बार फिर से दिखाया है.

रघुवीर यादव की इमेज एक सीरियस अभिनेता की है लेकिन उनको देखकर लगता है कि लोगो से हंसी बाहर निकलवाना उनके बाएं हाथ का खेल है. वरुण और अनुष्का की मेहनत फिल्म के हर फ्रेम मे नजर आती है.

खामियों को भूलकर फिल्म देखिए

फिल्म में खामियां भी हैं. फिल्म के दूसरे हाफ में सुई धागा किसी तरह का कारीगरों का मूवमेंट बनने को कोशिश करती है जिसको देखकर अटपटा लगता है. मौजी के अंदर सिलाई की कुशलता है लेकिन टेलर से डिज़ाइनर बनने का जो पूरा सफर है उसको ठीक से दिखाने में निर्देशक शरत कटारिया सक्षम नहीं रहे हैं. फिल्म के दूसरे हाफ में सुई धागा अपनी रफ़्तार पकड़ती है लेकिन रफ़्तार पकड़ने के चक्कर में कई चीज़ें शरत से छूट भी जाती हैं. कई चीजों को उन्होंने बताने की जहमत नहीं उठाई है. लेकिन शरत की मुश्किलें यहीं तक हैं कि एक सक्षम कप्तान की तरह वो मैदान पर टिके रहते हैं और कुछ एक जीवनदान मिलने के बाद एक शानदार पारी खेलते हैं.

शरत कटारिया की कोशिश बेहद सराहनीय है 

शरत की पिछली फिल्म दम लगा के हईशा को दर्शकों ने एक छोटे शहर की नब्ज़ पकड़ने के लिए बेहद पसंद किया था. इस बार भी उनकी कोशिश कुछ वैसी ही है. भले ही वो अपनी पिछली फिल्म की बराबरी ना कर पाए हों लेकिन उनकी ये कोशिश बेहद सराहनीय है.

उनकी कलम से एक ऐसी कहानी निकली है जो दिल के तार को कई बार झकझोरती है. फिल्म में ऐसे कई मोमेंट्स है जो आपको दुनिया के करीब ले जाएंगे. इस फिल्म का बिल्ड अप शरत ने बेहद ही अच्छे तरीके से किया है जहां पर वो फिल्म के किरदारों को खूबसूरती के साथ दर्शकों से रूबरू कराते हैं. ह्यूमर भी आपको अच्छी मात्रा में देखने को मिलेगा. फिल्म का जो सेंट्रल आइडिया है वो इतना शानदार है कि आप इसकी वजह से बाकी चीजों को भुला देंगे. सुई धागा की कहानी को शरत ने बड़े ही प्यार से पिरोया है और जो कुछ भी पिरोने के बाद निकलता है वह आपका दिल जरूर छू लेगा.

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