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REVIEW पटाखा : फिल्म का धमाका बड़ा न हो लेकिन एक्टिंग की 'धमक' दूर तक सुनाई देगी

शानदार अभिनय का नमूना है फिल्म पटाखा लेकिन बहनों की बेतुकी लड़ाई आपको बोर करेगी

फ़र्स्टपोस्ट रेटिंग:

Updated On: Sep 28, 2018 01:29 PM IST

Abhishek Srivastava

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REVIEW पटाखा : फिल्म का धमाका बड़ा न हो लेकिन एक्टिंग की 'धमक' दूर तक सुनाई देगी
निर्देशक: विशाल भारद्वाज
कलाकार: विजय राज़, सुनील ग्रोवर, सान्या मल्होत्रा, राधिका मदान

पटाखा में आपको इसके कलाकारों की बेहतरीन अदाकारी देखने को मिलेगी, आप कुछ समय के लिए गांव की दुनिया में खुद को पाएंगे जो आपको पूरी तरह से लुभाएगा, फिल्म में आपको कुछ किरदार ऐसे भी मिलेंगे जिनसे आपका पाला शायद पहले पड़ा होगा. लेकिन पटाखा की खूबसूरती महज यहीं तक है.

इन सभी चीजों के बावजूद पटाखा आपका मनोरंजन पूरी तरह से नहीं कर पाती है. फिल्म दो बहनों के बारे में है और एक दूसरे से लड़ना उनका शौक है. अब ये दोनों बहनें एक दूसरे से क्यों लड़ती है इस बात को विशाल भारद्वाज अपनी फिल्म में बताते नहीं है.

लड़ने के कई सीक्वेंसेस है इस फिल्म में और जब दूसरी बार दोनों बहनों के बीच लड़ाई शुरु होती है तब आप यही कहते हैं कि बस करो. बस करो आप इसलिए कहते हैं क्योंकि उनकी इस लड़ाई के पीछे कोई ठोस वजह नहीं है और ये बेतुकी लगती है.

लगभग सवा दो घंटे की ये फिल्म लेखक चरण सिंह की लघु कथा दो बहनों पर आधारित है और इस बात का एहसास पूरी तरह से आता है कि एक लघु कथा को दो घंटे से ऊपर की फिल्म का रूप क्यों दे दिया गया है. कहानी एक हद के बाद रबड़ की तरह खींची गई लगती है.

लड़ने वाली दो बहनों की कहानी

पटाखा की कहानी दो बहनों के बारे में है. गेंदा कुमारी (सान्या मल्होत्रा) और चंपा कुमारी (राधिका मदान) का शौक है एक दूसरे से लड़ाई करना और बीड़ी पीना. उनका पिता (विजय राज) उनकी इस हरकत से बुरी तरह से परेशान है. जवानी के जोश में ये बहनें भी प्रेम जाल के चक्कर में फंस जाती है और घर से भाग कर शादी कर लेती है. कहानी में ट्विस्ट उस वक्त आता है जब इस बात का खुलासा होता है कि इन दोनों बहनों के पति वाकई में सगे भाई होते हैं.

किस्मत का पहिया इन दोनों बहनों को एक बार फिर से खींच कर एक दूसरे के पास ले आता है. डिपर (सुनील ग्रोवर) उन दोनों बहनों का दोस्त है और मौका मिलते ही दोनों के बीच में लड़ाई करवाने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देता है लेकिन वहीं दूसरी तरफ वो इन दोनों बहनों से बेइन्तेहां प्यार भी करता है.

एक ऐसा मौका भी आता है जब वक्त के थपेड़ों की वजह से एक बहन की आंखों की रोशनी कम हो जाती है तो दूसरी की आवाज चली जाती है महज इसलिए क्योंकि इनको एक दूसरे से लड़े काफी दिन हो जाते हैं. फिल्म के क्लाइमेक्स में डिपर एक नाटक बुनता है जिसके बाद चीजें पटरी पर आती है.

शानदार अभिनय का नमूना है पटाखा

अभिनय की बात अगर इस फिल्म में करें तो इस फिल्म के सभी कलाकारों का सधा अभिनय है. दोनों बहनों के पिता की भूमिका में विजय राज को एक लंबे समय के बाद अपने हुनर को दिखने काम मौका मिला है जिसका उन्होंने भरपूर फायदा उठाया है. विजय राज ने बता दिया है की मौजूदा दौर के बॉलीवुड के शानदार कलाकारों की फेहरिस्त में उनका नाम भी शुमार है.

सुनील ग्रोवर ने भी इस मौके का पूरा फायदा उठाया है और जता दिया है कि फिक्शन में भी उनको सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो वो तुरुप के इक्के साबित हो सकते हैं. उनका काम बेहद शानदार है. सान्या मल्होत्रा ने अपने हुनर पहली फिल्म दंगल में ही दिखा दिए थे और यहां भी उनका काम बेहद परिपक्व है. लेकिन इन सबके के ऊपर कोई है तो वो है राधिका मदान. एक बिगड़ैल बड़ी बहन की भूमिका में अपनी पहली फिल्म में ही राधिका ने दिखा दिया है कि आने वाले समय में अभिनय के क्षेत्र में कई पताका फहरा सकती हैं. उनका काम फिल्म में ज़बरदस्त है.

बहनों की लड़ाई आपको बोर करेगी

तकलीफ़ होती है विशाल भारद्वाज को लेकर. फिल्म की पृष्ठभूमि राजस्थान की है और कई बार वहां की भाषा को समझने में परेशानी हो जाती है. ऐसा भी नहीं है कि राजस्थान इस फिल्म का एक अभिन्न हिस्सा है. अगर इस फिल्म की कहानी उत्तर भारत के किसी भी गांव में होती तो भी किसी को परेशानी नहीं होती और भाषा की मार से जनता बच जाती. इस फिल्म को विशाल ने खींचा भी है.

फिल्म में ऐसे कई मोमेंट हैं जब कहानी कहीं आगे बढ़ती ही नहीं है. फिल्म में इतना शोर है कि इसका लुत्फ आप ठीक से नहीं उठाते. तकलीफ इस बात की भी है कि उन्होंने अपनी फिल्म के क्लाइमेक्स को हिंदुस्तान पाकिस्तान के रिश्ते से क्यों जोड़ दिया. इसकी जरुरत क्या थी?

विशाल के निर्देशन की ताकत इस फिल्म में जरूर दिखाई देती है जिस तरह से उन्होंने फिल्म के किरदारों का खाका खींचा है वो शानदार है. आम जिंदगी के ह्ययूमर भी आपको इस फिल्म में देखने को मिलेंगे जो काफी लुभावना है. लेकिन फिल्म का अंत नतीजा अधपका ही नजर आता है. शानदार कलाकारों का बेहतरीन अभिनय इस फिल्म में आपको नज़र आएगा लेकिन इससे ज्यादा आपको शायद और कुछ ना मिले.

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