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Film Review Kedarnath : सारी फिल्म पर ‘सारा’ का कब्जा

सैफ अली खान और अमृता सिंह की बेटी सारा अली खान की केदारनाथ पहली फिल्म है और पहली ही फिल्म में वो सुशांत सिंह राजपूत पर भारी पड़ी हैं

फ़र्स्टपोस्ट रेटिंग:

Updated On: Dec 07, 2018 12:25 AM IST

Hemant R Sharma Hemant R Sharma
कंसल्टेंट एंटरटेनमेंट एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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Film Review Kedarnath : सारी फिल्म पर ‘सारा’ का कब्जा
निर्देशक: अभिषेक कपूर
कलाकार: सारा अली खान, सुशांत सिंह राजपूत, पूजा गौर, नितीश भारद्वाज

बॉलीवुड में सारा अली खान पिछले करीब दो साल से कोई नया नाम नहीं है. पहली बात तो ये है कि वो सैफ अली खान और अमृता सिंह की बेटी हैं और दूसरी बड़ी बात ये कि उन्होंने अपनी पहली फिल्म में एक्टिंग के जो झंडे गाड़े हैं वो उन्हें जल्दी ही बॉलीवुड में एक नए मुकाम पर ले जाने वाले हैं, बशर्ते अब उन्हें जो स्टारडम मिलेगा उसे वो संभाल कर रख पाएं.

तो फिल्म केदारनाथ 2013 में वहां हुई त्रासदी को याद दिलाती है. इस फिल्म में आपको ये देखने को नहीं मिलेगा कि ये हादसा वहां क्यों हुआ लेकिन ये कितना डरावना था ये देखकर आपके रौंगटे खड़े जरूर हो जाएंगे.

मुक्कू और मंसूर की लव स्टोरी

फिल्म की कहानी सारा अली खान के इर्द गिर्द घूमती है जो इस फिल्म में मुक्कू के रोल में नजर आने वाली केदारनाथ की एक कट्टर ब्राह्मण परिवार की लड़की है. शुरू से ही मुक्कू थोड़ी नकचढ़ी और उसके परिवार से उसकी कम ही बनती है. उसके पिता के रोल में पुरानी महाभारत में श्रीकृष्ण को रोल निभा चुके नितीश भारद्वाज हैं तो बड़ी बहन हैं पूजा गौर जिन्हें आप पहले भी कई टीवी सीरीयल्स में देख चुके हैं.

मंसूर के किरदार में सुशांत सिंह राजपूत हैं जिन्हें मैं शुरू से ही एक ओवररेडेट स्टार मानता हूं. ये ही वजह है कि इस फिल्म में जब एक्टिंग की बात आई है तो सारा ने हर सीन में सुशांत को पीछे छोड़ दिया है. खैर, मंसूर केदारनाथ में घोड़े पर बैठाकर तीर्थयात्रियों को सैर  कराता है. मुस्लिम होने के बाद भी उसका मंदिर में भी आना जाना है. ये बात सारा के मंगेतर को पसंद नहीं आती है और वो मंसूर के मंदिर में घुसने पर विरोध करता है.

इसी बीच मुक्कू की आंख मंसूर से लड़ जाती है. दोनों की लव स्टोरी आगे बढ़ने लगती है. धर्म दोनों की लव स्टोरी में आड़े आ जाता है. जिसके बाद फिल्म सीरियस हो जाती है और इन दोनों की लाइफ भी. तभी केदारनाथ में आ जाती है भयंकर तबाही. इसी तबाही के मंजर में क्या मुक्कू को मंसूर का प्यार मिल पाता है ये देखने के लिए आपको थिएटर्स का रुख करना चाहिए.

अभिषेक कपूर का औसत निर्देशन

इस फिल्म को बॉलीवुड में गट्टू के नाम से मशहूर फिल्ममेकर अभिषेक कपूर ने बनाया है. जो इससे पहले फितूर, काई पो चे, रॉकऑन जैसी फिल्में बना चुके हैं. इस फिल्म की स्टोरी को उन्होंने कणिका ढिल्लन के साथ मिलकर लिखा है. इसमें इन दोनों को आधे नंबर मिलने चाहिए क्योंकि इस स्टोरी में इतना बड़ा ड्रामा क्रिएट करने का स्कोप था जिसका मौका इन्होंने खो दिया है.

केदारनाथ को शूट करने में सिनेमैटोग्राफर ने शानदार काम किया है. उनकी तारीफ होनी चाहिए. लेकिन अभिषेक कपूर स्टोरी और डायरेक्शन के मामले में औसत साबित हुए हैं उन्हें आज के दौर की दूसरी फिल्मों से सीखना चाहिए.

संगीत

केदारनाथ एक लव स्टोरी है, उसे देखते हुए इसका संगीत ज्यादा अच्छा नहीं है. जिस तरह से फिल्म में लव स्टोरी को तरजीह दी गई है उसके हिसाब से संगीत मधुर और दिल को छू जाने वाला नहीं है. संगीतकार अमित त्रिवेदी इस मामले में फेल साबित हुए हैं.

उनकी पिछली एल्बम मनमर्जियां में उन्होंने जो समां बांधा था वो यहां गायब नजर आया है. केवल शंकरा वाला गाना लोगों के जेहन में उतरता है बाकी एक लव सॉन्ग और दूसरा शादी वाला गाना स्वीटहार्ट कुछ खास नहीं हैं.

वरडिक्ट

इस फिल्म का रिजल्ट यही है कि आप इसे सारा अली खान के लिए देखिए. आप जब केदारनाथ देखकर बाहर निकलेंगे तो वहां की त्रासदी आपके दिल हो हिलाकर रख देगी लेकिन सारा अली खान की एक्टिंग का सुकून आपकी त्रासदी वाली यादों को झट से भुला देगा.

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